अध्यात्म, धर्म आदि


लक्ष्मी चंचला क्यों?

लक्ष्मी चंचला है यह एक ध्रुव सत्य है। धन की देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी होतु हुए भी चंचल है। भगवान विष्णु जो कि गंभीर व धैर्यवान हैं, जिनका स्वरूप शाश्वत व चिर स्थाई है वहीं उनकी पत्नी लक्ष्मी चंचला हंै... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रतसुखसंपत्ति

नवेम्बर 2010

व्यूस: 4633

होली

होली

फ्यूचर पाॅइन्ट

होली का पर्व प्रतिवर्ष फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह दो भागों में विभक्त है। पूर्णिमा को होली का पूजन और होलिका दहन तथा फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा को रंग- गुलाल, कीचड़ आदि से होली।... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

मार्च 2015

व्यूस: 4606

विवाहिता की मांग में सिंदूर लगाना अनिवार्य

विवाह संस्कार के समय ही वर वधू की मांग में सिंदूर लगाता है। मस्तक पर जिस स्थान पर सिंदूर लगाया जाता है, वह स्थान ब्रह्मरंध्र और अधिप नामक मर्म के ठीक ऊपर का भाग है। स्त्री जातक के शरीर में यह भाग, पुरुष की अपेक्षा, अधिक कोमल होता ... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदि

अप्रैल 2004

व्यूस: 4503

भगवत्प्राप्ति का सरलतम सूत्र: शरणागति

अनेक बार यह प्रश्न सामने आता है कि भगवत्प्राप्ति कैसे हो? इस बात में सबका एक मत है कि किसी पूजा, पाठ, तप, यज्ञ या दान से भगवत्प्राप्ति नहीं हो सकती। इसका एक मात्र सरल सूत्र है- शरणागति । यह क्या है? भगवत्प्राप्ति कैसे करें? जान... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

जुलाई 2006

व्यूस: 4489

लघु कथाएं

लघु कथाएं

फ्यूचर पाॅइन्ट

जब मुख्य मुख्य देवता और दानव अमृत की प्राप्ति के लिए क्षीरसागर को मथ रहे थे, तब भगवान् ने कच्छप के रूप में अपनी पीठपर मंदराचल धारण किया। उस समय पर्वत के घूमने कारण उसकी रगड़ से उनकी पीठ की खुजलाहट थोड़ी मिट गयी, जिससे वे कुछ क्षणो... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

फ़रवरी 2013

व्यूस: 4486

वास्तु की नजर में गया एवं बोध् गया

किसी भी शहर के सुव्यवस्थित वास्तु पर उस शहर का समृद्धि एवं विकास निर्भर करता है। अतः शहर वास्तु के अनुरूप हो, तो उस शहर का विकास चरमोत्कर्ष पर होता है। जहां तक बोध गया एवं गया का सवाल है, यह एक प्राचीन, धार्मिक एवं ऐतिहासिक शहर है... और पढ़ें

स्थानअध्यात्म, धर्म आदिवास्तुमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

जनवरी 2004

व्यूस: 4473

भागवत कथा

भागवत कथा

ब्रजकिशोर शर्मा ‘ब्रजवासी’

पांडवों के महाप्रयाण के पश्चात् भगवान के परम भक्त राजा परीक्षित श्रेष्ठ ब्राह्मणों की शिक्षानुसार पृथ्वी का शासन करने लगे। उन्होंने उत्तर की पुत्री ‘इरावती’ से विवाह किया। उससे जन्मेजय आदि चार पुत्रों की प्राप्ति हुई... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

आगस्त 2014

व्यूस: 4428

मंत्र और अध्यात्म

मंत्र और अध्यात्म

पुनीत कुमार

भारतीय वांङ्गमय अध्यात्म, मंत्र, तंत्र और यंत्र साहित्य से परिपूर्ण है। अध्यात्म भारतीय ऋषियों का मौलिक चिंतन है। उन्होंने स्वयं मंत्र का साक्षात्कार किया और तब ही उसे लोगों के सम्मुख प्रस्तुत किया।... और पढ़ें

उपायअध्यात्म, धर्म आदिवशीकरणमंत्र

नवेम्बर 2010

व्यूस: 4411

आयुष्य चिंतन

आयुष्य चिंतन

रामप्रवेश मिश्र

शांति-अशांति और जीवन-मृत्यु एक सिक्के के दो पहलू हैं। जब आयु सीमा समाप्त होती है तब मृत्यु का दरवाजा खुल जाता है। मृत्यु चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि ‘जातस्य ध्रुवं मृत्यु’ं गीता का प्रवचन है। इस भूतल पर मृत्यु ही एक सत्य है। फि... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदि

जनवरी 2005

व्यूस: 4393

पितृ दोष: समस्या और समाधान

जन्मपत्री का नवम भाव भाग्य भाव कहलाता है। इसके अतिरिक्त इस भाव से पिता और पूर्वजों का विचार भी किया जाता है। धर्म शास्त्रों में यह मान्यता है कि पूर्व जन्म के पापों के कारण पितृ दोष का निर्माण होता है। व्यक्ति का जीवन सुख-द... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

सितम्बर 2016

व्यूस: 4386

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