विवाह के समय ध्यान रखने योग्य बातें

अकतूबर 2013

व्यूस: 25035

हिंदू धर्म शास्त्रों में हमारे सोलह संस्कार बताए गए हैं। इन संस्कारों में काफी महत्वपूर्ण विवाह संस्कार है। शादी को व्यक्ति का दूसरा जन्म भी माना जाता है क्योंकि इसके बाद वर-वधू सहित दोनों के परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल जाता है।... और पढ़ें

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दाम्पत्य जीवन सुखी बनाने के उपाय

मार्च 2014

व्यूस: 23792

विवाह के बाद पति-पत्नी का दांपत्य जीवन प्रारंभ होता है जो दीर्घकाल तक चलता रहता है परंतु कभी-कभी ऐसा होता है कि कुंडली मिलान ठीक न होने या स्वभाव में भिन्नता, संतान का न होना, संतान का बिगड़ जाना, शारीरिक अक्षमता आदि के कारण दांपत्... और पढ़ें

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दाम्पत्य जीवन में सप्तमेश की स्थिति के फल

अप्रैल 2015

व्यूस: 23722

लगभग सभी ज्योतिष ग्रन्थों के अनुसार शुभ भाव के स्वामी शुभ भावों में स्थित होने पर शुभ फल करते हैं। यहाँ शुभ भाव से अभिप्राय है केन्द्र व ़ित्रकोण के भाव। दाम्पत्य जीवन पर सप्तमेश की स्थिति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है। यदि सप्तमे... और पढ़ें

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कुंडली में बहु विवाह एवं द्विभार्या योग

जून 2015

व्यूस: 22982

शादी के बारे में हर व्यक्ति को जानने की इच्छा होती है। आज के आधुनिक समय में किसी-किसी व्यक्ति की शादी भी नहीं हो पाती और किसी जातक की दो या तीन बार शादी हो जाती है। शादी कितनी बार होगी इसको हम कुंडली की सहायता से जान सकते हैं। ... और पढ़ें

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प्रेम का प्रतीक फिरोजा

जुलाई 2013

व्यूस: 22784

किसी के प्रति अपना प्रेम प्रकट करना हो, तो उसे फिरोजा की बनी मुद्रिका भेंट करनी चाहिए। यह प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी, अथवा मित्र किसी को भी भेंट की जा सकती है। इसमें अनुराग का रंग चढ़ा होता है। अगर पहले से प्रेम अंकुरित है, तो वह ... और पढ़ें

उपायरत्नविवाह

षट्कर्म साधन

आगस्त 2010

व्यूस: 19728

षट्कर्म साधन

डॉ. अरुण बंसल

शरीर एवं मन के रोगों की शांति से लेकर किसी को अपनी ओर आकर्षित करने या स्तंभन करने के लिए भारतीय वेद शास्त्रों में अनेक प्रकार के अनुष्ठानों का वर्णन है। प्रसतुत लेख में षट्कर्म साधना क्रिया की विधि व विभिन्न कार्यों के लिए कौन सा ... और पढ़ें

ज्योतिषअन्य पराविद्याएंउपायबाल-बच्चेशिक्षाशत्रुमंत्रविवाहसफलतासंपत्ति

नाड़़ी दोष विचार

जनवरी 2011

व्यूस: 18101

नाड़़ी दोष विचार

ब्रजकिशोर शर्मा ‘ब्रजवासी’

नाडि शब्द नाडि मंडल से संबंधित है, जिसका अर्थ है कि आकाशीय विषुवत् सेवा। नाडी कूटं तं संग्राह्यं, कूटानां तु शिरोमणिम्। ब्रह्मणा कन्यका कण्ठ सूत्रत्वेन विनिर्मितम्॥ (अर्थात् जिस प्रकार विवाहित कन्या के लिए मंगल सूत्र आवश्यक है, उस... और पढ़ें

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अष्टम भावस्थ शनि का विवाह पर प्रभाव

जनवरी 2009

व्यूस: 17764

प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने एकमत से जातक की कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का निर्णायक भाव माना है और इसे जाया भाव, भार्या भाव, प्रेमिका भाव, सहयोगी, साझेदारी भाव स्वीकारा है।... और पढ़ें

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कन्या विवाह का अचूक उपाय

मार्च 2014

व्यूस: 16640

जन्म पत्रिका में संयम और बौद्धिकता से यदि तलाशा जाये तो ग्रह-नक्षत्रों के ऐसे अनेक संयोग मिल जाएंगे जो लड़कियों का विवाह करवाने, न करवाने अथवा विलंब आदि से करवाने के संकेत देते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

अंक मेलापक: प्रेम संबंध व दाम्पत्य सुख

जून 2015

व्यूस: 16392

जिस तरह नामांक के मेल से वैवाहिक जीवन में अनुकूलता लाई जा सकती है, उसी तरह मूलांक व भाग्यांक के आधार पर भी अनुकूल जीवन साथी चुनकर दाम्पत्य जीवन में अधिक स्थिरता और सुख-सौहार्द का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।... और पढ़ें

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