दाम्पत्य जीवन पर राहु का दुश्प्रभाव

राहु की छाया दाम्पत्य जीवन को तीव्रता से प्रभावित करती है। राहु तथा मंगल मिलकर जहां जातक को जिद्दी बनाते हैं वहीं राहु का सप्तम भाव पर प्रभाव विवाह विच्छेद तक करा देता है, कैसे? आइए जानें...... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2006

व्यूस: 3658

सानिया-सोहराब रिश्ते में दरार क्यों

सानिया की जन्म कालिक कुंडली के गोचर ग्रहों के अनुसार जनवरी 2010 में सानिया मिर्जा पर सूर्य में शुक्र में राहु में बुध की दशांतर दशा चल रही थी। चंद्र चतुर्थ भाव में होकर कलह पैदा करता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगदशाकुंडली व्याख्याकुंडली मिलानविवाहभविष्यवाणी तकनीकगोचर

अप्रैल 2010

व्यूस: 3835

जन्म कुंडली से जानें कब होगी आपकी शादी?

शादी के बारे में कहा जाता है कि जोड़ियां स्वर्ग में निर्धारित होती हैं धरती पर तो केवल आयोजित होती हैं। शादी सात जन्मों का बंधन होता है। इतने पहले निर्धारित हुई शादी धरती पर संपन्न होने में इतनी देर क्यों हो जाती है। इस प्रश्न ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगदशाविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जून 2014

व्यूस: 286966

विवाह में मुहूर्त का महत्व

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कुंडली मिलानी चाहिए या नहीं। ऐसे कुछ प्रश्न आज हमारे सामने हैं जिन्हें लेकर हम तथा समाज दुखी है ऐसा क्यों? आइए कारण ढूंढ़ते हैं। कुंडली मिलान करने के पश्चात शादी की तारीख पक्की की जाती है। एक तो ज्यादातर शाद... और पढ़ें

ज्योतिषविवाहमुहूर्त

जनवरी 2007

व्यूस: 4434

मंगली दोष एवं ग्र्रह मेलापक

दांपत्य जीवन एवं दांपत्य सुख का निर्णय करने वाले अनेक महत्त्वपूर्ण तथ्यों में से मंगली दोष एक है। यह अकेला न तो दांपत्य जीवन को सुखमय बना सकता है और न दुःखमय। अतः लोगों को चाहिए कि वे मंगली के नाम से न घबराएं तथा इसके प्र्रभाव का ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2009

व्यूस: 6126

विवाह और वैवाहिक जीवन

विवाह के विषय में विचार करने के लिए जातक की जन्मकुंडली के सप्तम भाव का विश्लेषण करते हैं। जब विवाह संपन्न होता है तो उसके कुटुंब में वृद्धि होती है अतः जातक के द्वितीय भाव का भी विश्लेषण करते हैं। क्योंकि जातक का विवाह होता है, अत... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2010

व्यूस: 8056

प्रेम-विवाह और ज्योतिषीय ग्रह योग

‘प्रेम-विवाह’ एक ऐसा शब्द है जो अपने अंदर कई भावनाओं को समेटे हुए है। जहां अभिभावकों के लिए यह चिंता, आशंका, क्रोध, संशय आदि का कारण बनता है, वहीं नवयुवक तथा नवयुवतियों के लिए यह संतोष, आशा एवं सुखद भविष्य की कल्पना को ऊंची उड़ान द... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाह

मई 2013

व्यूस: 7344

पंचम भाव - कुछ तथ्य

पंचम भाव - कुछ तथ्य

राकेश कुमार मिश्रा

जब हम किसी के प्रणय संबंधों को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखते हैं तो प्रथमतः पंचम भाव पर विचार करते हैं। इस भाव में उदर गर्भ एवं मस्तिष्क गर्भ होते हैं जिनसे शिशु के जन्म, विचार एवं भविष्य की योजनाओं का विचार किया जाता है। ये जन्म ए... और पढ़ें

ज्योतिषघरविवाह

जनवरी 2007

व्यूस: 7051

तलाक क्यों?

तलाक क्यों?

बालकिशन भारद्वाज

रागुआज लगभग प्रत्येक इंसान अपने पुत्र व पुत्री के विवाह में लाखों, करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं, उसके बावजूद भी विवाह के कुछ माह के उपरांत शादीशुदा जोड़ा कोर्ट में होता है तलाक की अर्जी लिए। आखिर क्या वजह है कि इतनी संपन्नता के वि... और पढ़ें

ज्योतिषघटनाएँज्योतिषीय योगविवाहग्रह

मार्च 2014

व्यूस: 7644

कब होगा विवाह

कब होगा विवाह

निहाल जयपुरिया

विवाह के विषय में सभी प्रश्नों में कुंडली में सातवें भाव, सप्तमेश, लग्नेश, शुक्र एवं गुरु की स्थिति को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। सप्तम भाव इसलिए देखते हैं कि कुंडली में विवाह से संबंधित यही भाव है। सप्तमेश को इसलिए देखा जाता है ... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

जनवरी 2010

व्यूस: 8179

शादी के समय निर्धारण में सहायक योग

विवाह संबंधी प्रश्न पर विचार करते समय सर्व प्रथम कुंडली में सातवें भाव, सप्तमेश, लग्नेश, शुक्र एवं गुरु की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिये। विवाह के लिये सप्तम भाव है। सप्तमेश को देखना इसलिये आवश्यक है क्योंकि यही इस भाव का स्वामी... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

मार्च 2014

व्यूस: 8264

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