तलाक एवं पुनर्विवाह: एक विश्लेषण

ज्योतिषशास्त्र में बृहस्पति एवं शुक्र को श्रेष्ठ शुभ फलदायक माना गया है। मानसागरी ग्रंथ के अनुसार बृहस्पति या शुक्र केंद्र या त्रिकोण में हो, तो सभी अरिष्टों का नाश हो जाता है। दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने में भी बृहस्पति एवं शु... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2007

व्यूस: 12026

वक्री ग्रह व विवाह सुख

वक्री ग्रह व विवाह सुख

किशोर घिल्डियाल

भारतीय ज्योतिष में विवाह सप्तम भाव से देखा जाता है। सप्तम भाव जहां जीवन साथी हेतु देखा जाता है वहीं उसके स्वामी की स्थिति, उसका लग्नेश के साथ संबंध और इन सबसे ऊपर शुक्र (भोगकारक) ग्रह की स्थिति का आकलन सही प्रकार से किया जाए... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2014

व्यूस: 11800

विवाह तिथि का अचूक निर्धारण

भारतीय ज्योतिष विद्या में किसी घटना के समय निर्धारण की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि गणनाकर्ता उलझ कर रह जाता है। पाराशरी, जैमिनी, कृष्णमूर्ति और सामुद्रिक पद्धतियों में काल निर्धारण की भिन्न-भिन्न तकनीकें प्रचलन में हैं। विवाह तिथि स... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगदशाविवाहभविष्यवाणी तकनीकगोचर

अप्रैल 2007

व्यूस: 11645

विविध वैवाहिक समस्याएं व समाधान

प्रश्न: विवाह न होना या देरी से होना, विवाह के पश्चात जीवन सुखी न रहना, तलाक हो जाना या बिना तलाक के अलग हो जाना, वैवाहिक जीवन नित्य प्रति क्लेशपूर्ण रहना जैसी समस्याओं हेतु क्या वैदिक, तांत्रिक, आध्यात्मिक, लाल किताब के उपाय ... और पढ़ें

उपायरत्नलाल किताबमंत्रविवाहरूद्राक्ष

मई 2013

व्यूस: 11388

विवाह में विलंब के कारण

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से विवाह में विलम्ब होने के प्रमुख कारण हैं जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में अशुभ, अकारक एवं क्रूर ग्रहों का स्थित होना तथा सप्तमेश एवं उसके कारक ग्रह बृहस्पति/ शुक्र एवं भाग्येश का निर्बल होना । यदि पृथकताव... और पढ़ें

ज्योतिषउपायज्योतिषीय योगविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जून 2013

व्यूस: 11187

अंक ज्योतिष द्वारा गुण मिलान

हमारे समाज में विवाह के समय वर एवं कन्या की कुंडली मिलान करके विवाह करने की प्रथा है। लेकिन कभी-कभी जातक-जातिका को अपना जन्म समय ज्ञात नहीं होता है। ऐसे में हम अंक ज्योतिष द्वारा उनके नामांक, मूलांक एवं भाग्यांक के आधार पर गुण ... और पढ़ें

अंक ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणविवाहभविष्यवाणी तकनीक

नवेम्बर 2016

व्यूस: 11000

चर दशा और विवाह

चर दशा और विवाह

फ्यूचर पाॅइन्ट

हमारे ऋिषि मुनियों ने वैदिक ज्योतिष में अनेक दशाओं का वर्णन किया है। इनमें ऋषि जैमिनी की वह महत्वपूर्ण चर दशा भी है जिसका वर्णन किया है। इस आलेख में विवाह में चर दशा की भूमिका का वर्णन प्रस्तुत है। विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार... और पढ़ें

ज्योतिषदशाजैमिनी ज्योतिषविवाहभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2005

व्यूस: 10799

प्रेम विवाह कैसे, कहां और किससे ?

प्रेम मनुष्य के अन्तर्गत मन की वह सृष्टि है, जिसमें आप्लावित होकर मानव मन उस हर्षातिरेक में निमग्न हो जाता है। राधा कृष्ण की जुगल जोड़ी से जिस प्रेम की गंगोत्री का उद्गम माना जाता है तथा हीर-रांझा और लैला-मजनंू, शिरी-फरहाद और न ज... और पढ़ें

ज्योतिषआकर्षणविवाह

जुलाई 2015

व्यूस: 10676

कृष्णमूर्ति पद्धति एवं विवाह

भविष्यवाणियां करने की अनेक पद्धतियां हैं, जैसे टैरो कार्ड, अंक शास्त्र, हस्त रेखा, पाराशरी पद्धति, कृष्णमूर्ति पद्धति आदि। उपर्युक्त सभी पद्धतियों का उपयोग किया गया है, लेकिन सटीक भविष्यवाणियां तथा घटना कब घटित होगा, इसका निर्णय ज... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगदशाकुंडली व्याख्याकृष्णामूर्ति ज्योतिषविवाहभविष्यवाणी तकनीकगोचर

जुलाई 2004

व्यूस: 9942

विवाह के लिए विशेष महत्वपूर्ण हैं गुरु, शुक्र एवं मंगल

हमारे शास्त्रों में 16 संस्कार बताये गये हैं जिनमें विवाह सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है। हमारे समाज में जीवन को सुचारू रूप से चलाने एवं वंश को आगे बढ़ाने के लिए विवाह करना आवश्यक माना गया है। जब हम कुंडली में विवाह का विचार करते हैं ... और पढ़ें

ज्योतिषविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2013

व्यूस: 9831

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