विवाह और वैवाहिक जीवन

विवाह के विषय में विचार करने के लिए जातक की जन्मकुंडली के सप्तम भाव का विश्लेषण करते हैं। जब विवाह संपन्न होता है तो उसके कुटुंब में वृद्धि होती है अतः जातक के द्वितीय भाव का भी विश्लेषण करते हैं। क्योंकि जातक का विवाह होता है, अत... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2010

व्यूस: 7137

शादी के समय निर्धारण में सहायक योग

विवाह संबंधी प्रश्न पर विचार करते समय सर्व प्रथम कुंडली में सातवें भाव, सप्तमेश, लग्नेश, शुक्र एवं गुरु की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिये। विवाह के लिये सप्तम भाव है। सप्तमेश को देखना इसलिये आवश्यक है क्योंकि यही इस भाव का स्वामी... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

मार्च 2014

व्यूस: 7042

कब होगा विवाह

कब होगा विवाह

निहाल जयपुरिया

विवाह के विषय में सभी प्रश्नों में कुंडली में सातवें भाव, सप्तमेश, लग्नेश, शुक्र एवं गुरु की स्थिति को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। सप्तम भाव इसलिए देखते हैं कि कुंडली में विवाह से संबंधित यही भाव है। सप्तमेश को इसलिए देखा जाता है ... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

जनवरी 2010

व्यूस: 6926

तलाक क्यों?

तलाक क्यों?

बालकिशन भारद्वाज

रागुआज लगभग प्रत्येक इंसान अपने पुत्र व पुत्री के विवाह में लाखों, करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं, उसके बावजूद भी विवाह के कुछ माह के उपरांत शादीशुदा जोड़ा कोर्ट में होता है तलाक की अर्जी लिए। आखिर क्या वजह है कि इतनी संपन्नता के वि... और पढ़ें

ज्योतिषघटनाएँज्योतिषीय योगविवाहग्रह

मार्च 2014

व्यूस: 6674

मंगल दोष एवं प्रेम विवाह

विवाह संपूर्ण मानव जाति के लिए परमात्मा की एक अनुपम भेंट है. भारत वर्ष में लोग प्राचीन कला से ही विद्या अध्ययन के बाद विवाह करते थे, लेकिन वर्त्तमान समय के युवा वर्ग के बाद विवाह करते थे, लेकिन वर्त्तमान समय के युवा वर्ग यह नहीं म... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2011

व्यूस: 6598

प्रेम-विवाह और ज्योतिषीय ग्रह योग

‘प्रेम-विवाह’ एक ऐसा शब्द है जो अपने अंदर कई भावनाओं को समेटे हुए है। जहां अभिभावकों के लिए यह चिंता, आशंका, क्रोध, संशय आदि का कारण बनता है, वहीं नवयुवक तथा नवयुवतियों के लिए यह संतोष, आशा एवं सुखद भविष्य की कल्पना को ऊंची उड़ान द... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाह

मई 2013

व्यूस: 6290

पंचम भाव - कुछ तथ्य

पंचम भाव - कुछ तथ्य

राकेश कुमार मिश्रा

जब हम किसी के प्रणय संबंधों को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखते हैं तो प्रथमतः पंचम भाव पर विचार करते हैं। इस भाव में उदर गर्भ एवं मस्तिष्क गर्भ होते हैं जिनसे शिशु के जन्म, विचार एवं भविष्य की योजनाओं का विचार किया जाता है। ये जन्म ए... और पढ़ें

ज्योतिषघरविवाह

जनवरी 2007

व्यूस: 6224

मंगल एवं शुक्र की भूमिका: संदर्भ सप्तम भाव

चंद्र मन का प्रतिनिधित्व करता है और मन काम शक्ति का कारक है। सभी प्रकार के संबेधों का कारण भी चंद्र होता है। जब चंद्र की दृष्टि, युति आदि सूर्य से हो, तो संबंध में आश्रय पाने के विचार होते हैं। मंगल कारण कर्मठ व्यक्तियों से, बुध क... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2007

व्यूस: 6180

सिंहस्थ गुरु में विवाह वर्जित क्यों?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह विषयों में वर का सूर्य बल एवं चंद्र बल तथा वधू का गुरु बल एवं चंद्र बल देखा जाता है। सूर्य आत्मकारक ग्रह है। गुरु हृदयकारक एवं जीवन को प्रशस्त करने वाला ग्रह है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह भी मा... और पढ़ें

ज्योतिषविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जून 2015

व्यूस: 6155

विवाह सुख में बाधा दर्शाने वाले योग और लाल किताब द्वारा उनके उपाय

विवाह होकर भी कई बार दंपतियों को वैवाहिक सुख नहीं मिल पाता। इसके मूल में कई ऐसी बातें हैं जिनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। छोटे-छोटे सरल उपायों द्वारा वैवाहिक जीवन को सुखी बनाया जा सकता है। क्या हैं वैवाहिक सुख की बाधाएं और उन... और पढ़ें

ज्योतिषउपायलाल किताबविवाह

जुलाई 2006

व्यूस: 6124

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