पितृ दोष: समस्या और समाधान

जन्मपत्री का नवम भाव भाग्य भाव कहलाता है। इसके अतिरिक्त इस भाव से पिता और पूर्वजों का विचार भी किया जाता है। धर्म शास्त्रों में यह मान्यता है कि पूर्व जन्म के पापों के कारण पितृ दोष का निर्माण होता है। व्यक्ति का जीवन सुख-द... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवउपायअध्यात्म, धर्म आदिभविष्यवाणी तकनीक

सितम्बर 2016

व्यूस: 5122

सरस्वती यंत्र से विद्या प्राप्ति

वैदिक ज्योतिष हजारों सालों से भी सरस्वती यंत्र का प्रयोग विद्या प्राप्ति के लिए तथा अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए करता रहा है तथा आज भी श्री सरस्वती यंत्र के विधिवत प्रयोग से अनेक प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण की जा सक... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवउपाययंत्र

फ़रवरी 2016

व्यूस: 5521

कष्ट निवारक शनि अष्टक

कष्ट निवारक शनि अष्टक

श्रीकृष्ण शर्मा

शनिदेव की प्रसन्नता एवं अनुकूलता प्राप्त करने हेतु दशरथकृत शनि स्तोत्र बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इसके नित्यपाठ से शनि तथा अन्य ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। पाठकों के हितार्थ शुद्धरूप में स्तोत्र दिया जा रहा है। शन... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवग्रह

नवेम्बर 2006

व्यूस: 9389

उत्तरायण और मकर संक्रांति की भ्रांति

हर वर्ष की तरह जनवरी-2016 में भी, सूर्य देवता के मकर राशि में प्रवेश करते ही, भारत में मकर संक्रांति बड़ी धूम-धाम से मनाई जायेगी और हर वर्ष की तरह एक-दूसरे को फोन पर और ॅींजे।चच आदि पर शुभकामनाएं देने का तांता सा लग जायेगा। मकर स... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रतभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2016

व्यूस: 5047

जन्माष्टमी निर्णय

जन्माष्टमी निर्णय

डॉ. अरुण बंसल

हाल ही में जन्माष्टमी 1 व 2 सितंबर को मनाई गई। वृन्दावन व अनेक मंदिरों में 1 सितंबर को व मथुरा, बिड़ला मन्दिर आदि में 2 सितंबर को।... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिखगोल-विज्ञानयशपर्व/व्रत

सितम्बर 2010

व्यूस: 4554

दीपावली की शुभकामनाएं

दीपावली पूजन स्थिर लग्न में ही करना चाहिए, ताकि लक्ष्मी जी घर में स्थिरता से वास करें। दीपावली के दिन स्थिर लग्न संध्या काल में वृष एवं सिंह लग्न होते हैं। दिल्ली में वृष लग्न 17रू44 . 19रू39 तक रहेगा एवं सिंह लग्न मध्य रात्रि उपर... और पढ़ें

ज्योतिषदेवी और देवउपायपर्व/व्रतमंत्रभविष्यवाणी तकनीक

नवेम्बर 2015

व्यूस: 2700

सूर्योपासना का महिमामय केंद्र हड़िया

सूर्योपासना का महिमामय केंद्र हड़िया

राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

आदि अनादि काल से भारत भूमि में देवोपासना निर्बाध रूप से जारी है जिनमें जगत के प्रत्यक्ष देव श्री सूर्य का विशिष्ट स्थान है। भारत देश में सूर्य पूजन का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितनी हमारी सभ्यता संस्कृति। सूर्य देव, रवि, म... और पढ़ें

देवी और देवस्थानमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

नवेम्बर 2016

व्यूस: 2454

ऐतिहासिक देवी तीर्थ माई पद्मावती मंदिर

भारतवर्ष के मध्यकालीन ख्यातनाम नगरों में शेरघाटी अपनी भौगोलिक बनावट और शौर्य शक्ति के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। शेरशाह के जमाने में ‘सड़क-ए-आजम’ और आज का जी. टी. रोड (राष्ट्रीय राजमार्ग-2) के किनारे और मगध की प्रसिद्ध तोया मोरहर... और पढ़ें

देवी और देवस्थानमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

अप्रैल 2014

व्यूस: 5579

भगवान श्रीराम की गया यात्रा एवं गया श्राद्ध

राज्याभिषेक होने के बाद राजतंत्र को सृदृढ़ कर प्रजा की रक्षा के लिए विधि व्यवस्था कर भगवान श्रीराम ने तीर्थों की यात्रा की थी। अयोध्या से चलकर पूर्व दिशा के शोराभद्रादि तीर्थों में अवगाहन एवं अपने पितरों का तर्पण पिंड दान करते हुए ... और पढ़ें

देवी और देवस्थानउपायअध्यात्म, धर्म आदिसुखमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

अकतूबर 2008

व्यूस: 5379

सिद्धपीठ ‘रजरप्पा’

सिद्धपीठ ‘रजरप्पा’

राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

प्रकारान्तर से भारतवर्ष में शक्ति पूजा की विशद् परंपरा रही है। यहां देवी विभिन्न रूपों में युगों-युगों से देवताओं, संतों, ऋषि-मुनियों एवं जनसामान्य द्वारा पूजित इस चराचर जगत् में घटित समस्त कार्यों की हेतु प्रतीत होती हैं। संप... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

अकतूबर 2014

व्यूस: 5661

दर्शनीय है भगवती तारापीठ: केसपा

दर्शनीय है भगवती तारापीठ: केसपा

राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

रत्नगर्भा धरती भारतवर्ष में समय समय पर ऐसे महात्माओं का अवतरण हुआ हैं। जिन्होंने विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ओत प्रोत होकर न सिर्फ भारतीय आदर्शों का पूरी ईमानदारी से अनुपालन व् संरक्षण किया वरन जनकल्याणार्थ कितने... और पढ़ें

देवी और देवस्थानविविधमन्दिर एवं तीर्थ स्थल

फ़रवरी 2013

व्यूस: 6932

महाकुम्भ का महात्म्य

महाकुम्भ का महात्म्य

फ्यूचर पाॅइन्ट

हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्राचीन धार्मिक उत्सवों के प्रमाण मिलते हैं। उनमें कुम्भ एवं महाकुम्भ भी हैं। इस अवसर पर भव्य एवं विशाल मेला लम्बे समय तक चलता हैं। जहाँ, मनोरंजन के साथ साथ, मानव चरित्र को आवश्यक विधियों की ओर... और पढ़ें

देवी और देवस्थानअध्यात्म, धर्म आदिपर्व/व्रत

फ़रवरी 2013

व्यूस: 7536

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