लोशु चक्र चलाता है आपका जीवन चक्र

लोशु चक्र चलाता है आपका जीवन चक्र  

लगभग 4000 वर्ष पहले चीन के राजा हसिया वू नदी के किनारे विचारमग्न अवस्था में उस बाढ़ को रोकने की विधि खोज रहा था जो बार-बार अपने प्रकोप से जनता को कष्ट देती थी। एक बार राजा हसिया को उस नदी में एक कछुए का कवच मिला जिसके ऊपर कुछ सफेद और काले बिंदु एक विशिष्ट क्रम में अंकित थे। चीन में उस समय कछुए के कवच का मिलना बहुत अच्छा शकुन समझा जाता था क्योंकि चीनी लोगों की मान्यता थी कि कछुए के कवच में स्वयं भगवान का वास होता है। राजा और वू एवं उसके साथियों ने उस कवच के ऊपर अंकित बिंदुओं का ध्यानपूर्वक विश्लेषण किया एवं 3 ग 3 का एक पूर्ण वर्ग बना कर उसे लोशु चक्र का नाम दिया। इस चक्र की यह विशेषता थी कि इसकी उध्र्वाधर, क्षैतिज एवं विकर्णीय रेखाओं के अंकों को जोड़ने पर अंक 15 की प्राप्ति होती थी। अंक पांच, जिसे चीन के लोग अति शुभ मानते थे, का स्थान चक्र के मध्य में आया। इस खोज के बाद आर्द-चिंग, फेंग शुई, चीनी अंकशास्त्र, त्रिगाम एवं नौ की आदि विधाओं का उद्भव हुआ। पारम्परिक चीनी अंकशास्त्री आज भी एशिया के विभिन्न हिस्सों में मनुष्य के व्यक्तित्व और जीवन शैली का उस की जन्म तिथि अनुसार प्रभाव इस लोशु चक्र के माध्यम से विश्लेषण कर अपने ग्राहकों को आश्चर्यचकित कर रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध वास्तुविद एवं अंकशास्त्री डाॅ. पूर्ण चंद्र राव ने इस च्रक्र की विशेषताओं से अवगत कराया। यहां इस लोशु चक्र का विशद् वर्णन प्रस्तुत है।× लोशु चक्र आत्म निरीक्षण का एक साधन है। यह मनुष्य के चरित्र एवं व्यक्तित्व के पक्षों को लीक से हटकर प्रामाणिक एवं प्रेरणाजनक तरीके से उजागर करता है। यह चक्र आत्मज्ञान, सफलता और स्वच्छंदता की कुंजिका है। लोशु चक्र में 1 से लेकर 9 प्रत्येक अंक के लिए एक स्थान निर्धारित होता है। व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों 4 9 2 3 5 7 8 1 6 4 9 2 3 5 111 को उसी स्थान पर रखना होता है चाहे फिर एक अंक की आवृत्ति बार-बार ही क्यों न हो, नीचे दिए गए चित्र के अनुसार अंक लोशु चक्र में उपस्थित रहते हैं। इस अंक के स्थान में अपनी जन्म तिथि भरकर लोशु चक्र की उपयोगिता को जानने का प्रयास करते हैं। एक व्यक्ति जिसका जन्म 13.12.1954 को हुआ। लोशु चक्र में इस प्रकार जन्म तिथि को उपयोग करेंगे। अंक 1 जल तत्व, कैरियर, उत्तर दिशा, अंक 2 पृथ्वी, दक्षिण-पश्चिम दिशा आपसी सामंजस्य, (रोमांस डायरेक्शन), और प्रारंभ करने की क्षमता का प्रतीक, अंक 3 आत्म विश्वास, पूर्व दिशा, लकड़ी तत्व, अंक 4 संचित धन, योजनाएं, लकड़ी तत्व, दक्षिण-पूर्व दिशा, अंक 5 पृथ्वी तत्व, योजना, ब्रह्म स्थल (घर का मध्य भाग) अंक 6 उत्तर-पश्चिम दिशा, सुनहरी धातु, व्यापारिक अवसर, मददगार लोग, ईश्वरी शक्ति, अंक 7 सिल्वर धातु, पश्चिम दिशा, सृजनात्मकता मानसिक आराम, अंक 8 उत्तर-पूर्व दिशा, स्मरण शक्ति, स्थिरता, पूर्णता, पृथ्वी एवं अंक 9 दक्षिण दिशा, अग्नि तत्व, मान-सम्मान आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इस व्यक्ति के ऊपर की पंक्ति में तीनों अंक 4, 9 एवं 2 की उपस्थिति दर्शाती है कि यह व्यक्ति उच्च बौद्धिक सामथ्र्य के साथ-साथ उत्तम स्मरण शक्ति का मालिक है। यह व्यक्ति तेज दिमाग, स्पष्टवादी, न्याय प्रिय और उत्तम विश्लेषण क्षमता का स्वामी है। लेकिन उसके मन में कभी-कभी स्वयं को दूसरों से उत्कृष्ट समझने की भावना भी आती है। इस जन्म तिथि में अंक 6 एवं 7 का अभाव है जिसके कारण इस व्यक्ति को जीवन में उन्नति करने में काफी मेहनत करनी पड़ी है। ऐसे लोग जीवन में कई अवसरों को खोते हैं। अंतर्भावनाओं को दूसरों से छुपाकर रखने की प्रवृत्ति के कारण संबंधों में अनिश्चितता बनी रहती है। अंक 7 के अभाव के कारण दिमाग हर समय कुछ न कुछ सोचता रहता है। 2, 5, 8 तीनों पृथ्वी तत्व हैं। जिन लोगों की जन्मतिथि में ये तीनों अंक नहीं पाए जाते उन्हें भूमि का सुख मिलने में कई रुकावटें आती हैं। इस व्यक्ति की जन्म तिथि में अंक 8 का अभाव बताता है कि आखिर में रुकावटंे जरूर आएंगी। मन में असुरक्षा की भावना बनी रहेगी। ऐसे लोगों में याददाश्त कमजोरी भी पाई जाती है। उक्त व्यक्ति की जन्मतिथि में अंक 1 की उपस्थिति तीन बार है जो बताती है कि उसके मन में कार्य करने की योजनाएं बनती रहती हैं। ऐसे लोगों की पसंद उम्दा होती है। वे दूसरों की भावनाओं की कदर करते हुए उनके दृष्टिकोण को समझते हुए अपना दृष्टिकोण भी सही रूप से व्यक्त करने की क्षमता रखते हैं। जन्मतिथि या जन्म नाम में अनुपस्थित अंकों का अपने शरीर एवं वातावरण में विभिन्न फेंग शुई यंत्रों द्वारा उपचार किया जा सकता है। जैसे पृथ्वी तत्व कम होने पर उससे संबंधित चीजों को अपने शयन कक्ष या कार्यालय में रखना, धातु तत्व कम होने पर धातु का धारण करना। लकड़ी तत्व, कम होने पर पौधे एवं लकड़ी के अन्य सामान रखना आदि। इस प्रकार हम लोशु चक्र में अंकों की उपस्थिति, अनुपस्थिति, संख्या एवं ग्रुप में होने या न होने के कारण होने वाले प्रभावों को जानकर समस्याओं के समाधान का उपाय कर सकते हैं।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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