कैसे विकसित करें टाउनशिप

कैसे विकसित करें टाउनशिप  

कैसे विकसित करें टाउनशिप कुलदीप सलूजा आजकल अपने मकान का सपना साकार करते हर बड़े शहर के आसपास छोटे-छोटे टाउनशिप (सामुहिक आवास) बनायें जा रह े ह।ंै इनम ंे सरु क्षा क े साथ-साथ शाॅपिंग माॅल, स्कूल, हाॅस्पिटल, बैं. क्वेट हाॅल, मल्टिप्लेक्स, बैंक स्वीमिंग पूल, गार्डन इत्यादि हर प्रकार की सुख-सुविधा उपलब्ध रहती है। जहाँ हर इन्कम ग्रुप वालों के लिये इनमें प्लाॅट, फ्लैट, डुपलेक्स, पेन्ट हाउस, बंगले, दुकानें इत्यादि उपलब्ध रहते है।  टाउनशिप के लिए भूखंड किसी भी शहर के दक्षिण या र्नैत्य कोण में खरीदना चाहिए। हर शहर की यह दिशाएं अन्य दिशाओं की तुलना में ज्यादा वैभव शाली होती है। ऐसी जगह पर टाउनशिप बनान से रिर्टन ज्यादा अच्छा मिलता है।  टाउनशिप ऐसे भूखण्ड पर बनाएं, जिसके उत्तर-पूर्व में गहरे गड्ढे, तालाब, नदी इत्यादि और दक्षिण व पश्चिम में ऊंचे-ऊंचे टीले व पहाड़ियां हों। ऐसा स्थान टाउनशिप की प्रसिद्धि और समृद्धि के लिए वरदान सिद्ध होगा। अच्छे आर्थिक लाभ के लिए वह भूखण्ड जहां आप टाउनशिप का निर्माण करना चाहते हैं। उसका आकार आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए। कभी अनियमित आकार के भूखण्ड पर टाउनशिप नहीं बनाना चाहिये।  टाउनशिप की भूखण्ड की उत्तर, पूर्व एवं ईशान दिशा का दबा, कटा एवं गोल होना बहुत अशुभ होता है, इससे टाउनशिप के बिल्डर को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत भूखण्ड की इन दिशाओं का बड़ा होना बहुत शुभ होता है। यदि भूखण्ड की यह दिशाएं दबी, कटी या गोल हांे, तो इन्हें शीघ्र बढ़ाकर या घटाकर समकोण करके इसके अशुभ परिणामों से बचना चाहिए। टाउनशिप की अच्छी सफलता के लिए इसके भूखण्ड का उत्तर, ईशान व पूर्व का भाग दक्षिण, र्नैत्य व पश्चिम भाग की तुलना में नीचा होना चाहिए। भूखण्ड का इन दिशाओं में ऊंचा होना दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है। भूखण्ड का ईशान कोण या उत्तर पूर्व दिशा ऊंची हो, तो वहां की मिट्टी निकालकर दक्षिण पश्चिम दिशा या र्नैत्य कोण में डालकर भूखण्ड को समतल करने के बाद निर्माण कार्य षुरू करना चाहिए। टाउनशिप के अन्दर की सभी सड़के पूर्व से पश्चिम या दक्षिण से उत्तर समान्तर होनी चाहिये ताकि अन्दर बनने वाले सभी भवन आयताकार या वर्गाकार भूखण्ड पर ही बनें। टाउनशिप का मुख्य प्रवेशद्व ार व अन्य द्वार, पूर्व ईशान, दक्षिण आग्नेय, पश्चिम वायव्य या उत्तर ईशान में रखना चाहिये। कभी भी मुख्य द्वार पूर्व आग्नेय, दक्षिण र्नैत्य, पश्चिम र्नैत्य या उत्तर वायव्य में नहीं रखना चाहिये। यही नियम अन्दर बनने वाले किसी भी फ्लैट, आॅफिस इत्यादि के द्वार पर भी लागू होंगे। टाउनशिप में स्वीमिंग पूल, कृत्रिम जलप्रपात, तालाब, कुआॅ, बोरिंग इत्यादि किसी भी प्रकार के गड्ढे का निर्माण उत्तर, पूर्व दिशा या ईशान कोण में करना चाहिए। इसके विपरीत अन्य किसी भी दिशा में इनका होना अशुभ होता है। टाउनशिप के मध्य में किसी भी प्रकार का गड्ढा भयंकर आर्थिक कष्ट देता है। टाउनशिप में बारिश का पानी पूर्व, उत्तर-पूर्व या उत्तर में बहना चाहिये। टाउनशिप की ड्रैनेज का पानी भी उत्तर या पूर्व दिशा से बाहर जाना चाहिये। वाटर सप्लाई के लिये वाटर टाॅवर (ओव्हर हैड टैंक) भूखण्ड के र्नैत्य या दक्षिण दिशा में बनाई जा सकती है। टाउनशिप में बिजली के मीटर, ट्रांसफार्मर, जेनरेटर अन्य विद्युत उपकरणों की व्यवस्था आग्नेय कोण में ही करनी चाहिए। टाउनशिप में ऊँची-ऊँची इमारतें दक्षिण, पश्चिम दिशा एवं र्नैत्य कोण में बनानी चाहिए और मध्य ऊँचाई की इमारतें आग्नेय एवं वायव्य कोण में और कम ऊँचाई की इमारतें उत्तर पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिये। टाउनशिप में अधिक से अधिक ओपन एरिया उत्तर व पूर्व दिशा में रखना चाहिये। अच्छे स्वास्थ्य के लिए टाउनशिप में पूजा का स्थान, चिंतन व ध्यान योग कंेद्र, गार्डन इत्यादि पूर्व दिशा या ईशान कोण में बनाना चाहिए, ताकि वहाँ रहने वालों को सूर्य से मिलने वाली सुबह की जीवनदायी किरणों का भरपूर लाभ मिल सके। टाउनशिप में वाॅटर पार्क उत्तर ईशान एवं मध्य उत्तर में, एम्युजमेन्ट पार्क, मल्टिप्लेक्स, बैंक्वेट हाॅल, हैल्थ क्लब व अन्य क्लब का निर्माण वायव्य कोण में करना चाहिए। टाउनशिप में एज्युकेशन सेन्टर, हाॅस्पिटल, बैंक, शाॅपिंग माल इत्यादि छोटे बनाना हो तो पूर्व दिशा में और यदि बडे़ बनाना हो तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में बनाना चाहिये। टाउनशिप में किसी भी प्रकार की बिल्डिंग जैसे मल्टिस्टोरी फ्लैट्स, शाॅपिंग माल, स्कूल, हाॅस्पिटल, बैंक, क्लब इत्यादि का निर्माण भी आयताकार या वर्गाकार में ही करना चाहिये। इनमें बनने वाले फ्लैट व उनके कमरे भी आयताकार या वर्गाकार होने चाहिये। टाउनशिप की किसी भी बिल्डिंग एवं फ्लैट के ईशान कोण व मध्य में टायलेट बाथरूम नहीं बनाना चाहिये।



वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2007

गृह वास्तु के नियम एवं उपाय, उद्धोगों में वास्तु नियमों का उपयोग, वास्तु द्वारा मंदिर में अध्यातम वृद्धि, शहरी विकास एवं वास्तु, पिरामिड एवं वास्तु, अस्पताल, सिनेमा घर एवं होटल के वास्तु नियम, वास्तु में जल ऊर्जा का स्थान

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.