सुंदर बाल हर व्यक्ति की चाह

सुंदर बाल हर व्यक्ति की चाह  

बाल किसी भी स्त्री के सौंदर्य तथा पुरुष के व्यक्तित्व मंे अहम भूमिका निभाते हैं। मुख्य रूप से किसी व्यक्ति के सिर पर कितने बाल होंगे, यह जन्म के समय ही तय हो जाता है। हर व्यक्ति के प्रतिदिन औसतन 100 बाल टूट जाते हैं और नये आते रहते हैं। बालों के रोगों में उनका गिरना, सिकरी रोग, सूखापन, बालों का जल्दी-जल्दी टूटना या बाल दोमंुहे हो जाना। आदि प्रमुख हैं। बाल अगर स्वस्थ होंगे तो अवश्य ही नर्म एवं चमकदार रहेंगे। रोग कोई भी हो, कारण होता है खाए जाने वाले भोजन में पोषक तत्वों की कमी। भोजन में जिन-जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता है वह हैं: विटामिन ए: जैसा कि सभी लोग जानते हैं विटामिन ए आंखों तथा त्वचा के लिए अत्यंत जरूरी है। बालों को स्वस्थ रखने के लिए भी इसकी बहुत आवश्यकता है परंतु अधिक कृत्रिम विटामिन ए बालों के लिए हानिकारक हो सकता है। बीटा केरोटिन: यह पदार्थ सभी लाल, पीले फल और हरी पत्तियों वाली सब्जियांे में प्रचुर मात्रा में मिलता है, बालों के लिए लाभदायक है। इसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं होते। विटामिन बी: सभी बी समूह के विटामिन बालों के लिए अति आवश्यक हैं। ये सभी हरे पत्तों एवं सब्जियांे, सोयाबीन, गाजर, फूल गोभी, हरी मटर एवं अंकुरित अनाज आदि से प्रचुर मात्रा में मिलते हंै। विटामिन एच: विटामिन एच को बायोटिन भी कहते हैं। इस विटामिन की शरीर को जरूरत वसा, कार्बोहाइइªेट एवं प्रोटीन की विभिन्न रासायनिक क्रियाओं में पड़ती है। इस विटामिन से त्वचा, बाल, पसीने की ग्रंथियां, नाड़ी कोशिका तंत्र तथा मासंपेशियां आदि सभी स्वस्थ रहते हैं। इस विटामिन की कमी उन लोगों में हो जाती है जो दौरे की दवाएं, एन्टीबायटिक या कच्चा अंडा खाते हैं। प्रकृति में बायोटीन सेला चावल, जौ, ज्वार, हरी मटर, अखरोट, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन, पालक, फूलगोभी, हरी गोभी, आलू, शकरकंदी एवं दूध से बने पदार्थों से मिलता है। लौह तत्व: इस तत्व की कमी से बाल मुरझाए हुए से रहते हैं। यह पत्ते वाली सब्जियांे, गुड़ एवं लोहे की कड़ाही में भोजन पकाने से आसानी से प्राप्त होता है। आंवला: इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले विटामिन सी और एन्ज़ाइम सुपरआक्साईड डिसमुटेज त्वचा एवं बालों के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभप्रद हैं। इस फल का इस्तेमाल गर्मी के मौसम में अत्यंत लाभदायक है क्योंकि यह शरीर की सुस्त कार्यप्रणाली को चुस्त करता है। प्रोटीन: भोजन में प्रोटीन समुचित मात्रा में रहने चाहिए। दाल, सेला चावल, गेहूं, मटर, सोयाबीन एवं रामदाना आदि से अच्छे प्रोटीन मिल जाते हैं। दूध और दही भी प्रोटीन के उत्तम स्रोत हैं। मांसाहारी लोग किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन न करें तो अति उत्तम है। ऐसा भोजन पचाने के लिए अम्ल की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है। विटामिन ई: यह फ्री रेडिकल स्कवेंजर का काम बखूबी करता है। यह अंकुरित गेहंू, सूखे फलों एवं रामदाना (चैलाई के बीज) में प्रचुर मात्रा में मिलता है। सिलिका: संभवतः इसकी कमी से भी कुछ लोगों में बालों पर असर पड़ता है। भारतीय भोजन में हल्दी एवं आलू इसकी पूर्ति के लिए काफी हैं। जिंक: कुछ लोगों में इसकी भी कमी रहती है, जिससे खासकर बच्चों में बालों के साथ आंत के रोग हो जाते हैं। शरीर की प्रतिरोध क्षमता भी कम हो जाती है। यह चने, मसूर की दाल, अखरोट एवं मूंगफली से मिलता है। आयोडीन: सीताफल की गिरी, चिलगोजों एवं आयोडाइज्ड नमक में मिलता है। सेलिनियम रू सेलिनियम की भी जरूरत सूक्ष्म मात्रा में बालों के स्वास्थ्य के लिए पड़ती है। यह हमें ब्राजील गिरी ;ठतं्रपस छनजद्धए पनीर, ज्वार, सेला चावल, अखरोट, मक्का, गेहू, सोयाबीन आदि से मिलता है। बालों की देखभाल: बहुत हल्के हाथ से सिर की त्वचा एवं बालों की मालिश करनी चाहिए और बहुत कम शेम्पू इस्तेमाल करना चाहिए। बालों में अधिकांश अंश पानी है। इसलिए स्वस्थ बालों के लिए अधिक से अधिक पानी पीने की जरूरत है। बालों को विद्युत ड्रायर से सुखाने से बाल तो सूख जाते हैं, साथ में उनका पानी भी उड़ जाता है और उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सिर की त्वचा में रक्त संचार बढ़ाने के लिए ब्रुश और मालिश करें। प्रेन्च ट्विस्ट और पोनी टेल जैसे बालों के विन्यास से बालों पर अत्यधिक खिंचाव पड़ता है। इससे माथे के आगे से बाल टूट जाते हैं और व्यक्ति गंजा हो जाता है। बालों में रबर बैंड का प्रयोग कदापि न करें। प्लास्टिक के कंघों की जगह लकड़ी के कंघे प्रयोग करें क्योंकि प्लास्टिक से विद्युत उत्पन्न होती है जिससे बालों को नुकसान पहुंचता है। बालों में रूसी इसलिए होती है क्योंकि त्वचा की कोशिका का टर्नओवर (नवीनीकरण) बढ़ जाता है। आम तौर पर इन कोशिकाओं को त्वचा की सतह पर आने में 24 दिन लगते हंै परंतु रूसी में 12 दिन में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है। बालों में रूसी के साथ-साथ खुजली हो और त्वचा लाल हो गई हो तो यह त्वचा रोग के लक्षण हैं। इसके लिए त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करें। रूसी छूत की बीमारी नहीं है। रूसी दूर करने के लिए शेंपू में सेलेनियम सल्फाइड, जिंक, कोलतार आदि मिले होने पर त्वचा की पपड़ी का उत्पादन कम हो जाता है और जो बन चुकी है वह साफ हो जाती है। अन्य उपाय में मेथी को भिगोकर, फिर उसे पीसकर बालों में लगाकर 3-4 घंटे छोड़ दें। बाद में शिकाकाई से धो लें । बहेड़ा: बहेड़ा का तेल भी बालों के लिए अच्छा है। ब्राह्मी: ब्राह्मी को बालों में लगाए जाने वाले तेल तथा चेहरे की त्वचा को कोमल तथा सुंदर बनाने वाली क्रीमों में इस्तेमाल किया जाता है। भृंगराज: भृंगराज को केशराज के नाम से भी जाना जाता है। इसका तेल बालों को लंबे एवं चमकदार बनाने के लिए अनंत काल से प्रयोग में लाया जा रहा है। यह तेल सिर दर्द में भी जादू सा असर करता है। गुड़हल: गुड़हल के फूल एवं पत्तियों का रस हर्बल तेल में मिलाकर या काली मेहंदी के साथ इस्तेमाल किया जाता है। उत्तरी भारत में मशहूर जवाकुसुम नामक तेल गुड़हल के फूलों से तैयार किया जाता है। इस तेल से बाल काले, लंबे एवं रूसीरहित रहते हैं। ग्वारपाठा/धृतकुमारी ;।सवम टमतंद्धः जगह-जगह पाया जाने वाला यह पौधा मानव जगत के लिए वरदान है। इसके लेप एवं सेवन से त्वचा में रक्तसंचार बढ़ जाता है। इसका इस्तेमाल सूखे बाल, दो मुंहवाले बाल, टूटते बाल जैसे सभी रोगों में किया जाता है। इसके जैल जैसे पदार्थ के लेप से त्वचा नमीयुक्त, नर्म एवं तरोताजा हो जाती है। अलसी के तेल और ग्वारपाठे की जैल को मिलाकर त्वचा पर लगाने से बढ़ती उम्र से आई झु£रयां भी कम हो जाती हैं। आजकल घाव भरने वाली क्रीम में और जले व न भरने वाले घावों के लिए इसका भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। बसंत का आगमन होली के त्यौहार से होता है। इस त्योहार में प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के अबीर, गुलाल, पानी के रंग, ग्रीस एवं पेंट आदि बालों एवं त्वचा पर लग जाते हैं जो साधारण साबुन एवं शेंपू से नहीं निकलते। त्वचा और बाल निर्जीव एवं शुष्क हो जाते हैं। इन सबके लिए रीठायुक्त शेंपू न केवल रंगांे को ही साफ करता है, उन्हें मुलायम और जानदार भी बना देता है। मुलतानी मिट्टी: आप जल्दी में हों, समय नहीं हो, बालों में ग्रीस एवं मिट्टी भरी हो तो मुलतानी मिट्टी का पाउडर बालों में लगाकर मालिश कर 10 मिनट तक छोड़ दें और फिर कंघे से अच्छी तरह साफ कर दें। अगर बाल सूखे, मुरझाए हुए और टूटते रहते हों तो बालों में पहले तिल या खुमानी का तेल लगाएं। एक घंटे बाद मुलतानी मिट्टी का लेप कर दें। 30 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोकर रीठा युक्त शेंपू से साफ करें। फिर तिल का तेल सूखे बालों में लगाकर हवा में सूखने दें। दो मंुहे बालों के लिए पहले जैतून का तेल सिर में लगाएं, दो घंटे बाद बालों ंपर तौलिया रख गर्म पानी डालते रहें। बालों को मुलतानी मिट्टी और दही के मिश्रण से धोएं। दूसरे दिन से हर्बल शेम्पू से धो लें । एक नहीं 6 रोगों से मुक्ति 8-10 गिलास पानी का नियम से नित्य सेवन करने से न केवल बाल ही स्वस्थ रहेंगे अपितु अन्य रोगों से भी बचेंगे। जैसे- - हृदय रोग - गुर्दे की पथरी - पेशाब में संक्रमण - कब्ज - बवासीर - आंत उतरना


रुद्राक्ष एवं सन्तान गोपाल विशेषांक  मई 2006

ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु कणों से हुई है। ज्योतिष में प्रचलित अनेक उपायों में से रुद्राक्ष का उपयोग ग्रहों की नकारात्मकता एवं इनके दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है ताकि पीड़ा को कमतर किया जा सके। अनेक प्रकार के रुद्राक्षों को या तो गले में या बांह में धारण किया जाता है। रुद्राक्ष अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें से अधिकांश रुद्राक्षों का नामकरण उनके मुख के आधार पर किया गया है जैसे एक मुखी, दो मुखी, तीन मुखी इत्यादि। इस विशेषांक में रुद्राक्ष के अतिरिक्त सन्तान पर भी चर्चा की गई है। इस विशेषांक के विषय दोनों है। इसमें रुद्राक्ष एवं संतान दोनों के ऊपर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को सम्मिलित किया गया है जैसे: रुद्राक्ष की उत्पत्ति एवं महत्व, अनेक रोगों में कारगर है रुद्राक्ष, सन्तान प्राप्ति के योग, कैसे जानें कि सन्तान कितनी होंगी, लड़का होगा या लड़की जानिए स्वर साधना से, सन्तान बाधा निवारण के ज्योतिषीय उपाय, इच्छित सन्तान प्राप्ति के सुगम उपाय, सन्तान प्राप्ति के तान्त्रिक उपाय आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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