शेयर बाजार और ज्योतिष

शेयर बाजार और ज्योतिष  

सूर्य से बुध की युति में अस्त और उदय होने की स्थिति शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब बुध का अस्त पूर्व दिशा में होता है तब शेयर के भाव तेजी की तरफ होते हैं, किंतु जब बुध का अस्त पश्चिम दिशा में होता है, तब बाजार में मंदी का माहौल बनता है। इसी तरह जब बुध का उदय पूर्व दिशा में होता है, तब बाजार में तेजी का और जब पश्चिम दिशा में होता है, तब मंदी का माहौल बनता है। सूर्य का गोचर भ्रमण विभिन्न नक्षत्रों से होता है, तब तेजीकारक या मंदीकारक या मिश्रफल कारक नक्षत्रों के प्रभाव से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आते हैं। सूर्य को एक राशि का भ्रमण पूरा करने में एक माह लगता है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में ज्योतिष की भूमिका अहम होती है। इसलिए निवेश करने के पूर्व इससे संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों पर अच्छी तरह विचार कर लेना श्रेयस्कर होता है। यहां उन्हीं सिद्धांतों का संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत है जिसके अनुसार निवेश करने से लाभ हो सकता है। सबसे पहले वारों और राशियों के प्रभाव पर विचार करें। मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व राशियां हैं और इन राशियों में ग्रहों की स्थिति के अनुसार शेयर बाजार में परिवर्तन शीघ्र आता है। वृष, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व की राशियां हैं और इन राशियों में ग्रहों की स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे बदलाव आता है। मिथुन और तुला राशियां वायु तत्व हैं और इन राशियों में ग्रहों की चाल से शेयर बाजार में अचानक बदलाव आता है। कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व राशियां हैं और इन राशियों में ग्रहों की चाल से स्थिर बदलाव आता है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर विचार करने के लिए ग्रहों की चाल समझने से पहले राशियों की प्रकृति समझना जरूरी होता है। मेष, कर्क, तुला और मकर के चर राशियां होने के कारण त्वरित बदलाव आता है। वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर राशियां होने के कारण बहुत धीमी गति से बदलाव लाती हैं। मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियों के द्विस्वभाव होने के कारण शेयर के भावों में बदलाव विलंब से आता है। अब वारों व राशियों के गुण-धर्म के आधार पर भावों में उतार-चढ़ाव पर विचार करें। मेष: यह राशि मंदी कारक है और ग्रह योग से त्वरित बदलाव लाती है। यह शेयर के भावों में अत्यधिक मंदी का संकेत देती है, इसलिए बहुत सोच समझ कर कारोबार करना चाहिए। वृष: यह राशि तेजी की सूचक है। इसके पृथ्वी तत्व की होने के कारण भावों में एक तरफा वृद्धि होती है। मिथुन: यह राशि मंदी की सूचक है। वायु तत्व और द्विस्वभाव राशि होने के कारण शेयर के भावों में त्वरित उछाल लाकर त्वरित मंदी लाती है। कर्क: यह राशि तेजीकारक है और ग्रहयोग से त्वरित तेजी लाती है। सिंह: यह राशि मंदी की सूचक है। इसके ग्रह के साथ योग से शेयर के भावों में कभी धीमी और कभी त्वरित गति से उतार आता है। कन्या: यह राशि मिश्रफल का संकेत देती है। फलतः इस राशि में ग्रह के योग से मध्यम बदलाव आता है। तुला: चर स्वभाव और वायु तत्व की इस राशि में ग्रह योग से त्वरित उछाल की संभावना बनती है। किंतु इसके प्रति अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है। वृश्चिक: यह तेजी कारक राशि है। इस राशि में ग्रह योग से शेयर के भावों में धीरे-धीरे या कभी-कभी रुक-रुक कर तेजी आती है। धनु: सामान्यतः यह तेजी सूचक राशि है। वायु तत्व की इस राशि में ग्रह योग से अचानक तेजी-मंदी की संभावना बनती है। मकर: यह राशि मंदी की सूचक है। इसमें शेयर के भावों में सुधार लाने की क्षमता नहीं है। कुंभ: यह राशि मंदीकारक है किंतु वायुतत्व होने के कारण कभी-कभी अचानक तेजी-मंदी का संकेत देती है। मीन: यह तेजीकारक राशि है। शेयर के भावों में धीमी गति से सुधार का संकेत देती है। इसके अलावा शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव जानने के लिए ग्रहों के गुणधर्म, कारकत्व, उदय-अस्त, वक्री और मार्गी गति आदि की जानकारी आवश्यक होती है। गुरु, शुक्र, बलवान चंद्र और अकेला बुध सब मंदी का संकत देते हंै। गुरु ग्रह लंबी मंदी का संकेत देता है। शुक्र और बुध अल्प समय के लिए मंदी लाते हंै। सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु तेजीकारक ग्रह माने जाते हैं। क्षीण चंद्र और पापग्रह युक्त बुध तेजीकारक होते हंै। चंद्र की तेजी-मंदी अल्पकालीन होती है और उसका विभिन्न नक्षत्रों में गोचर भ्रमण दैनिक तेजी-मंदी पर विशेष प्रभाव डालता है। चंद्र की तरह बुध भी अल्प समय के लिए तेजी या मंदी दर्शाता है। सूर्य से बुध की युति में अस्त और उदय होने की स्थिति शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब बुध का अस्त पूर्व दिशा में होता है तब शेयर के भाव तेजी की तरफ होते हैं, किंतु जब बुध का अस्त पश्चिम दिशा में होता है, तब बाजार में मंदी का माहौल बनता है। इसी तरह जब बुध का उदय पूर्व दिशा में होता है, तब बाजार में तेजी का और जब पश्चिम दिशा में होता है, तब मंदी का माहौल बनता है। सूर्य का गोचर भ्रमण विभिन्न नक्षत्रों से होता है, तब तेजीकारक या मंदीकारक या मिश्रफल कारक नक्षत्रों के प्रभाव से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आते हैं। सूर्य को एक राशि का भ्रमण पूरा करने में एक माह लगता है। मंगल को एक राशि का भ्रमण पूर्ण करने में 45 दिन लगते हंै। किंतु कभी-कभी मंगल के वक्री और मार्गी होने से भ्रमण पूरा करने में उसे 4 से 5 महीने का समय लग जाता है। इस दौरान निवेश के प्रति विशेष सावधानी रखनी पड़ती है। गुरु, शनि और राहु का प्रभाव लंबी अवधि तक रहने से लंबी तेजी या मंदी का संकेत मिलता है। इसके अतिरिक्त जब शनि और गुरु जैसे ग्रह वक्री होते हैं, तब तेजी-मंदी का माहौल दीर्घकालीन होता है। सामान्यतः ज्योतिष शास्त्र में सूक्ष्म गणित पर विचार शेयर बाजार की चाल समझने में विशेष लाभदायक रहेगा। ग्रहों की राशि, अंश, नवांश, नक्षत्र, नक्षत्र पद, युति, प्रतियुति, दृष्टि इत्यादि का विश्लेषण अत्यावश्यक होता है। इन सबके बावजूद शेयर बाजार की चाल के बारे में भविष्यवाणी करना बहुत कठिन कार्य है क्योंकि जब भी सेन्सेक्स या निफ्टी नीचे आती है तब कई शेयरों के भाव नीचे या ऊपर जाते हंै। इसी तरह जब सेन्सेक्स या निफ्टी ऊपर आती है तब ज्यादातर शेयरों के भाव ऊपर और कुछ के नीचे जाते हैं। राशियों और ग्रहों का प्रभाव किसी क्षेत्र पर तेजी या मंदी कारक होने के कारण ऐसी घटना देखने में आती है। इस प्रकार जैसा कि ऊपर कहा गया है, ग्रहों की युति, दृष्टि और नक्षत्रों में गोचर भ्रमण पर सूक्ष्मता से विचार कर निवेश करने से निवेशकों को लाभ मिल सकता है।


रुद्राक्ष एवं आध्यात्मिक वास्तु विशेषांक   फ़रवरी 2007

प्रकृति के कोष से हमें कई जिवानोपर्यांत वस्तुएं प्राप्त होती है. ऐसी ही वस्तुओं में एक है रुद्राक्ष. रुद्राक्ष का आध्यात्मिक और औषधीय महत्त्व बहुत है. शुद्ध रुद्राक्ष की पहचान कैसे की जाए? रुद्राक्ष का सम्बन्ध भगवान शिव से कैसे जुडा हुआ हैं? रुद्राक्ष धारण

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