शयन एवं स्वप्नः एक वैज्ञानिक मीमांसा

शयन एवं स्वप्नः एक वैज्ञानिक मीमांसा  

स्वप्न क्या हैं? ये क्यों आते हैं? इनका हमारे भविष्य से क्या संबंध है? इसको समझने के लिए सबसे पहले समझते हैं नींद को। नींद क्या है? यह क्यों आती है? नींद की क्या-क्या अवस्थाएं हैं और नींद की किस अवस्था में स्वप्न आते हैं? वैज्ञानिकों ने इसको समझने के लिए शयन प्रयोगशालाएं बनायी हैं, जिनमें शयन कक्ष के साथ निरीक्षण कक्ष रहता है एवं प्रत्येक कक्ष में मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि के लिए ई ई जी (EEG), मांसपेशियों की गतिविधि के लिए ई एम जी (EMG) एवं आंखों की गतिविधि को नापने के लिए ई ओ जी (EOG) आदि यंत्र लगे होते हैं। शयन के दौरान ई ई जी (EEG) के द्वारा लिये गये गतिविधि ग्राफ को देखते हैं। जैसे ही मनुष्य सोने के लिए जाते हैं, जाग्रत अवस्था की कम वोल्ट एवं उच्च फ्रीक्वेंसी (14-30 Hz) की बीटा तरंगंे कुछ कम फ्रीक्वेंसी (8-12 Hz) एवं अधिक वोल्टेज की अल्फा तरंगों में बदल जाती हैं (अवस्था-1) जैसे ही कुछ नींद और आती है, वोल्टेज बढ़ती जाती है एवं फ्रीक्वेंसी कम होती जाती है। उसके बाद नींद के झटके आने लगते हैं (अवस्था - 2 एवं 3) जो एक मिनट में 2 से 5 बार दिखाई देते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे नींद गहरी होती है (अवस्था -4), तरंगों की ऊंचाई बहुत अधिक बढ़ जाती है एवं फ्रीक्वेंसी 3-4 प्रति सेेेकेंड से कम हो जाती है। स्वप्न काल लगभग 1½ घंटे पश्चात शुरू होता है। इसके दौरान आंखांे की गतिविधि अत्यधिक बढ़ जाती है। दिमाग की विद्युत गतिविधि बदल कर जाग्रत अवस्था जैसी हो जाती है। इस समय आंखों का हिलना स्वप्न के अनुसार होता है। यह स्वप्न काल दोबारा से गहरी नींद में बदल जाता है और गहरी नींद (अवस्था) फिर स्वप्न काल में बदल जाती है। सुबह होते-होते स्वप्न काल लंबा होता जाता है। पहला स्वप्न काल केवल 5 से 10 मिनट का होता है, जबकि प्रातः काल इसकी अवधि ½ घंटे से भी अधिक हो जाती है। जितना लंबा स्वप्न काल होता है, उतना ही स्वप्न याद रहने की संभावना अधिक होती हैं। यही कारण है कि प्रातः काल के स्वप्न ही अधिकतर याद रहते हैं। नींद न आने की बीमारी उम्र के साथ बढ़ती नज़र आती है, जबकि नींद न आने के बारे में शिकायत करने वाले लोग शायद सोते उतना ही हैं, जितना और लोग। गहरी नींद न आना नींद की बीमारी का कारण होता है। गहरी नींद के लिए कुछ उपाय किये जा सकते हैं: - सोने से पहले कुछ पढ़ें, या दिमाग का कार्य करें। - सोने से पहले गर्म पानी से नहाएं। - दिन में न सोएं। - प्रत्येक दिन एक समय पर ही सोएं। - रात को चाय-काॅफी आदि न लें, या धू्रमपान न करें। - लेटे हुए किसी मंत्र का जाप करें। गर्म पानी से नहाने से, या दिमागी कार्य करने से, या मंत्र का जाप करने से मस्तिष्क अंदर से गर्म हो जाता है। इससे मस्तिष्क की क्रिया बढ़ जाती है एवं क्रिया के बाद थक कर वह विश्राम अवस्था में चला जाता है। इस प्रकार गहरी नींद आ जाती है। नींद मनुष्य के जीवन का एक आवश्यक अंग है। जो कुछ भी वह दिन में देखता है, सुनता है, या सीखता है, वह रात को नींद में मस्तिष्क में सुरक्षित रहता है। साधारण व्यक्ति के लिए 6-7 घंटे की नींद काफी होती है। यदि मनुष्य को सोने न दिया जाए, तो उसकी स्मृति क्षमता कमजोर हो जाती है। उपर्युक्त विवेचन से यह साफ है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वप्न देखता है; उसको याद रहे, या न रहे। स्वप्न अवस्था में यदि किसी व्यक्ति को छेड़ा या नोचा जाए, तो उसको लगता है कि स्वप्न में उसे किसी ने काटा है; अर्थात स्वप्न में बाहरी प्रभाव और अधिक उभर कर महसूस होते हैं। एक प्रयोग में स्वप्नावस्था में लोगों के ऊपर पानी की फुहार डाली गयी। लगभग सभी ने उठने के बाद बताया कि उन्होंने सपने में पानी देखा। विज्ञान में स्वप्न को मात्र सोते हुए मस्तिष्क की बेतरतीब तंत्रीय क्रिया बताया गया है। स्वप्न किसी भविष्य की सूचना देता है, इस तथ्य को केवल कल्पना माना है। लेकिन वैदिक विज्ञान में स्वप्न की पूर्ण मीमांसा है। जिसको विज्ञान ने बेतरतीब तंत्रीय क्रिया माना है, वह गतिविधि भी तो मानव मस्तिष्क की है और उसके मस्तिष्क में वही सब कुछ है, जिसे उसने देखा, सुना, या महसूस किया है। अतः स्वप्न अवश्य मनुष्य से संबंधित हैं। स्वप्न में कई बार भविष्य साफ-साफ दिखाई देता है। ऐसा क्यों और कैसे ? विज्ञान अभी इसकी खोज में है। लेकिन वैज्ञानिकों के अलावा इस तथ्य को कोई भी साधारण व्यक्ति नहीं नकारेगा कि उसकी जिंदगी का कोई न कोई स्वप्न अवश्य ही भविष्य में सच हुआ। स्वप्न कुछ महत्वपूर्ण तथ्य 1. कुत्ते, बिल्ली और अन्य सभी जानवर जैसे- सांप, चूहे और मछलियां आदि भी स्वप्न देखते हैं। जो जन्म से अंधे हैं वे भी स्वप्न देखते हैं। 2. जो लोग कहते हैं कि हमें स्वप्न नहीं आते उन्हें केवल स्वप्न याद नहीं रहते। स्वप्न सभी को आते हैं। 3. स्वप्न में केवल वही देखते हैं जो हमने पहले देखा या महसूस किया होता है, उसी का एक परिवर्तित रूप ही हमारे स्वप्न में आता है। 4. अधिकतर स्वप्न डरावने, उदासीनता भरे या दुःख दर्द के होते हैं। 5. लगभग प्रत्येक रात्रि में एक व्यक्ति चार से सात बार स्वप्न देख सकता है। स्वप्न प्रत्येक रात्रि में एक से दो घंटे रहते हैं। 6. पुरुषों के स्वप्नों में 70% पुरुषों या पुरुष संबंधी ही स्वप्न आते हैं जबकि महिलाओं के स्वप्नों में 50 प्रतिशत पुरुष व 50 प्रतिशत महिलाएं होती हैं। 7. स्वप्नावस्था में हमारा मस्तिष्क डाईमिथाईलट्रिप्टामीन नामक रसायन उत्पन्न करता है। इसी रसायन की दवा खाने से प्रचुर मात्रा में स्वपन आते हैं। 8. कई महत्वपूर्ण आविष्कारों का कारण स्वप्न रहा है जैसे सिलाई मशीन, Periodic Table, आल्टरनेटिंग करंट जनरेटर और गूगल पर लैरी पेज आदि। 9. निद्रावस्था में हमारा मस्तिष्क बाहरी प्रभावों, स्पन्दनों और अनुभवों को स्वप्न में भाषान्तरित कर देता है। 10. खर्राटों के साथ स्वप्न नहीं आते हैं। 11. एक व्यक्ति अपने जीवन के औसतन छः साल स्वप्न में व्यतीत कर देता है। 12. अभ्यास द्वारा आप अपने स्वप्नों को नियंत्रित कर सकते हैं। सिनेमा की तरह आप अपने स्वप्नों के आरंभ और अंत में इच्छानुसार तब्दीली ला सकते हैं। इसे ल्यूसिड ड्रीमिंग (Lucid Dreaming) कहते हैं। 13. यदि स्वप्नावस्था में व्यक्ति को बार-बार जगाया जाए तो वह गुस्से का शिकार हो जाता है।


स्वपन, शकुन एवं टोटके विशेषांक  जून 2014

फ्यूचर समाचार के स्वपन, शकुन एवं टोटके विशेषांक में अनेक रोचक और ज्ञानवर्धक आलेख हैं जैसे- शयन एवं स्वप्नः एक वैज्ञानिक मीमांसा, स्वप्नोत्पत्ति विषयक विभिन्न सिद्धान्त, स्वप्न और फल, क्या स्वप्न सच होते हैं?, शकुन विचार, यात्राः शकुन अपषकुन, जीवन में शकुन की महत्ता, काला जादू ज्योतिष की नजर में, विवाह हेतु अचूक टोटके, स्वप्न और फल, धन-सम्पत्ति प्राप्त करने के स्वप्न, शकुन-अपषकुन क्या हैं?, सुख-समृद्धि के टोटके शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जन्मकुण्डली से जानें कब होगी आपकी शादी?, श्रेष्ठतम ज्योतिषी बनने के ग्रह योग, सत्यकथा, निर्जला एकादषी व्रत, जानें अंग लक्षण से व्यक्ति विषेष के बारे में, पंच पक्षी की गतिविधियां, हैल्थ कैप्सूल, भागवत कथा, सीमन्तोन्नयन संस्कार, लिविंग रूम व वास्तु, वास्तु प्रष्नोत्तरी, पिरामिड वास्तु, ज्योतिष विषय में उच्च षिक्षा योग, पावन स्थल, वास्तु परामर्ष, षेयर बजार, ग्रह स्थिति एवं व्यापार, आप और आपका पर्स आदि आलेख भी सम्मिलित हैं।

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