शयन एवं स्वप्नः एक वैज्ञानिक मीमांसा

शयन एवं स्वप्नः एक वैज्ञानिक मीमांसा  

व्यूस : 9007 | आगस्त 2003

स्वप्न क्या हैं? ये क्यों आते हैं? इनका हमारे भविष्य से क्या संबंध है? इसको समझने के लिए सबसे पहले समझते हैं नींद को। नींद क्या है? यह क्यों आती है? नींद की क्या-क्या अवस्थाएं हैं और नींद की किस अवस्था में स्वप्न आते हैं? वैज्ञानिकों ने इसको समझने के लिए शयन प्रयोगशालाएं बनायी हैं, जिनमें शयन कक्ष के साथ निरीक्षण कक्ष रहता है एवं प्रत्येक कक्ष में मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि के लिए ई ई जी (EEG) मांसपेशियों की गतिविधि के लिए ई एम जी (EMG) एवं आंखों की गतिविधि को नापने के लिए ई ओ जी (EOG) आदि यंत्र लगे होते हैं।

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शयन के दौरान ई ई जी (EEG) के द्वारा लिये गये गतिविधि ग्राफ को देखते हैं। जैसे ही मनुष्य सोने के लिए जाते हैं, जाग्रत अवस्था की कम वोल्ट एवं उच्च फ्रीक्वेंसी (14-30 Hz) की बीटा तरंगंे कुछ कम फ्रीक्वेंसी (8-12 Hz) एवं अधिक वोल्टेज की अल्फा तरंगों में बदल जाती हैं (अवस्था-1) जैसे ही कुछ नींद और आती है, वोल्टेज बढ़ती जाती है एवं फ्रीक्वेंसी कम होती जाती है। उसके बाद नींद के झटके आने लगते हैं (अवस्था - 2 एवं 3) जो एक मिनट में 2 से 5 बार दिखाई देते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे नींद गहरी होती है (अवस्था -4), तरंगों की ऊंचाई बहुत अधिक बढ़ जाती है एवं फ्रीक्वेंसी 3-4 प्रति सेकेंड से कम हो जाती है। स्वप्न काल लगभग 1½ घंटे पश्चात शुरू होता है।

इसके दौरान आंखांे की गतिविधि अत्यधिक बढ़ जाती है। दिमाग की विद्युत गतिविधि बदल कर जाग्रत अवस्था जैसी हो जाती है। इस समय आंखों का हिलना स्वप्न के अनुसार होता है। यह स्वप्न काल दोबारा से गहरी नींद में बदल जाता है और गहरी नींद (अवस्था) फिर स्वप्न काल में बदल जाती है। सुबह होते-होते स्वप्न काल लंबा होता जाता है। पहला स्वप्न काल केवल 5 से 10 मिनट का होता है, जबकि प्रातः काल इसकी अवधि ) घंटे से भी अधिक हो जाती है। जितना लंबा स्वप्न काल होता है, उतना ही स्वप्न याद रहने की संभावना अधिक होती हैं। यही कारण है कि प्रातः काल के स्वप्न ही अधिकतर याद रहते हैं। नींद न आने की बीमारी उम्र के साथ बढ़ती नज़र आती है, जबकि नींद न आने के बारे में शिकायत करने वाले लोग शायद सोते उतना ही हैं, जितना और लोग। गहरी नींद न आना नींद की बीमारी का कारण होता है। गहरी नींद के लिए कुछ उपाय किये जा सकते हैं:


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  • सोने से पहले कुछ पढ़ें, या दिमाग का कार्य करें।
  • सोने से पहले गर्म पानी से नहाएं।
  • दिन में न सोएं।
  • प्रत्येक दिन एक समय पर ही सोएं।
  • रात को चाय-काॅफी आदि न लें, या धू्रमपान न करें।
  • लेटे हुए किसी मंत्र का जाप करें।

गर्म पानी से नहाने से, या दिमागी कार्य करने से, या मंत्र का जाप करने से मस्तिष्क अंदर से गर्म हो जाता है। इससे मस्तिष्क की क्रिया बढ़ जाती है एवं क्रिया के बाद थक कर वह विश्राम अवस्था में चला जाता है। इस प्रकार गहरी नींद आ जाती है। नींद मनुष्य के जीवन का एक आवश्यक अंग है। जो कुछ भी वह दिन में देखता है, सुनता है, या सीखता है, वह रात को नींद में मस्तिष्क में सुरक्षित रहता है।

साधारण व्यक्ति के लिए 6-7 घंटे की नींद काफी होती है। यदि मनुष्य को सोने न दिया जाए, तो उसकी स्मृति क्षमता कमजोर हो जाती है।उपर्युक्त विवेचन से यह साफ है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वप्न देखता है; उसको याद रहे, या न रहे। स्वप्न अवस्था में यदि किसी व्यक्ति को छेड़ा, या नोचा जाए, तो उसको लगता है कि स्वप्न में उसे किसी ने काटा है; अर्थात स्वप्न में बाहरी प्रभाव और अधिक उभर कर महसूस होते हैं। एक प्रयोग में स्वप्नावस्था में लोगों के ऊपर पानी की फुहार डाली गयी। लगभग सभी ने उठने के बाद बताया कि उन्होंने सपने में पानी देखा।

विज्ञान में स्वप्न को मात्र सोते हुए मस्तिष्क की बेतरतीब तंत्रीय क्रिया बताया गया है। स्वप्न किसी भविष्य की सूचना देता है, इस तथ्य को केवल कल्पना माना है। लेकिन वैदिक विज्ञान में स्वप्न की पूर्ण मीमांसा है। जिसको विज्ञान ने बेतरतीब तंत्रीय क्रिया माना है, वह गतिविधि भी तो मानव मस्तिष्क की है और उसके मस्तिष्क में वही सब कुछ है, जिसे उसने देखा, सुना, या महसूस किया है। अतः स्वप्न अवश्य मनुष्य से संबंधित हैं। स्वप्न में कई बार भविष्य साफ-साफ दिखाई देता है। ऐसा क्यों और कैसे ? विज्ञान अभी इसकी खोज में है। लेकिन वैज्ञानिकों के अलावा इस तथ्य को कोई भी साधारण व्यक्ति नहीं नकारेगा कि उसकी जिंदगी का कोई न कोई स्वप्न अवश्य ही भविष्य में सच हुआ।


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