अलग-अलग देशों में नववर्षोत्सव

अलग-अलग देशों में नववर्षोत्सव  

व्यूस : 3775 | जनवरी 2012
अलग-अलग देशों में नववर्षोत्सव डाॅ. हनुमान प्रसाद उŸाम प्रत्येक देश में उत्सव अपने-अपने तौर-तरीकों से मनाया जाता है। इन उत्सवों में ही नव संदेश देने वाला त्यौहार आता है ‘नववर्षोत्सव’। किस देश में किस तरह से नववर्ष मनाया जाता है पढ़िए इस लेख में। चीन: चीन देश में नववर्ष विलक्षण परिपाटियों के साथ मनाया जाता है। इस दिन रसोई देवता की उपासना की जाती है तथा चावल से खास मिठाई तैयार की जाती है। इस मिठाई के किसी एक टुकड़े में एक सिक्का छिपाकर रख दिया जाता है। नववर्ष के पूर्व भोज पर जब परिवार के सदस्य भोजन के लिए एकत्र होकर बैठते हैं, तो वह मिठाई वितरित की जाती है। 13 दिन पूर्व से ही व्यक्ति नववर्ष के पर्व की तैयारियों में लग जाते हैं। जब नूतन वर्ष आता है, तो व्यक्ति सभी के सम्मुख भगवान की मूर्तियों को सुगंधित जल से स्नान कराके इस सुगंधित जल को पिचकारियों में भरकर एक दूसरे पर बौछार करके बिना रंग की होली खेलते हैं। चीन में मिठाई बांटने के बाद सभी व्यक्ति मिठाई खाते हैं। यदि किसी सदस्य की मिठाई में वह सिक्का निकलता है, तो उसके लिए नववर्ष विशेष शुभ और सौभाग्य का परिचायक समझा जाता है। म्यांमार (बर्मा): यहां नववर्ष बड़े हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। नववर्ष के इस पर्व को यहां ‘तिजान’ नाम से जाना जाता है। प्रसन्नता के इस अवसर पर व्यक्ति एक-दूसरे को बधाई देते हैं तथा मिठाइयां बांटते हैं। जापान: जापान में नववर्ष का त्यौहार अत्यंत रोचक होता है। इस वक्त वहां घर के बाहरी दरवाजों को गहरे हरे अन्नानास और पंखों से ढके हल्के हरे बांस की छड़ियों से सजाते हैं। खुशी, उमंग और दीर्घ जीवन के परिचायक के रूप में व्यक्ति दरवाजों पर चमकीले लाल मत्स्य, केकड़े, सिंदूरी लाल कपड़े और संतरे-सेव सरीखे फल लटकाते हैं। यहां प्रत्येक व्यक्ति इस मौके पर अपने लिए नये वस्त्र की व्यवस्था करता है चाहे वह कितना ही गरीब क्यों न हो। अपने कार्य व्यवसाय से वह अपने को तीन दिन अलग रखता है। इन दिनों ये लोग प्रार्थना करते हैं, अपने संबंधी साथियों से मिलने जाते हैं तथा उन्हें खिलाते-पिलाते हैं। इस पर्व पर प्रचलित रिवाज का एक आकर्षक भाग यह है कि आयोजन के पहले दिन बिल्कुल सबेरे ही लोग किसी कुआं-तालाब या नदी से ताजा जल लाते हैं, जिसे ‘नवजात जल’ कहते हैं। आज के दिन जापानी व्यक्ति अपना समस्त पिछला बकाया हिसाब चुकता कर खुशी का एहसास करते हैं। आस्ट्रेलिया: यहां नववर्ष पर सर्वाधिक उत्साह, खुशी तथा शोरगुल का वातावरण रहता है। इस अवसर पर वहां के नागरिक शुभ चीजों को एक-दूसरे को देते हैं। मसलन चिमनी, ब्रश, स्वर्ण मुद्रा आदि। इंग्लैण्ड: इंग्लैण्ड में पुराने वर्ष का अंतिम दिन और नए साल का प्रथम दिन हंसी-खुशी मनाने और दावतें उड़ाने में बीत जाता है। प्रत्येक परिवार का मुखिया पहली जनवरी को समस्त सदस्यों के समेत एक मेज के चारों तरफ कुर्सियां लगाकर बैठ जाते हैं। तब एक बड़े कटोरे में एक गर्म पेय लिया जाता है। यह पेय सौंठ, अदरक तथा अन्य इसी प्रकार के सेहतमंद चीजों का अर्क होता है। समस्त परिजन बारी-बारी से उस कटोरे में से एक-एक घंूट पीते जाते हैं। स्काॅटलैण्ड: स्काॅटलैंड में नववर्ष आज भी बड़े आकर्षक ढंग से तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पुराने वर्ष की अंतिम रात में 12 बजे से नवयुवक घर से निकलते हैं तथा अपने साथ केक, मक्खन आदि लेकर अपने मित्रों के घर जाते हैं। आधी रात बीतने के बाद जो व्यक्ति पहले घर में आता है, उसका स्वागत बड़ी प्रसन्नता के साथ किया जाता है। 31 दिसंबर की शाम को यहां के लोग अपने घर-आंगन में किसी एक पौधे को रेशम के लाल वस्त्र से ढककर नववर्ष की दुल्हन बनाते हैं। तत्पश्चात् पहली जनवरी के भोर में पौधे से घूंघट उठाकर नववर्ष का स्वागत किया जाता है ताकि प्रकृति खूब फूले-फले तथा नववर्ष हंसी-उमंग से बीते। मिस्र: वहां आज भी पुरातन रिवाज के आधार पर नववर्ष का अभिनंदन चावल और सिंदूर से किया जाता है ताकि प्रकृति की उम्र और ज्यादा हो और नववर्ष में जनहित की उम्मीदों में वास्तविकता का रंग भर सके। दक्षिण अफ्रीका: दक्षिण अफ्रीका में नववर्ष राष्ट्रीय त्यौहार की भांति मनाया जाता है, जिसे ‘क्यूक्वेचवाना’ कहा जाता है। ‘क्यूक्वेचवाना’ से आशय है ज्वार की फल तैयार होने के अवसर पर भगवान को धन्यवाद देने का पर्व। इसी दिन यहां का राजा अपनी सेनाओं का निरीक्षण भी करता है और सैनिकों को विवाह करने की अनुमति भी प्रदान की जाती है। इस दिन सामूहिक रूप में विवाह का भी आयोजन होता है। रूस: रूस में नववर्ष दो बार मनाने का रिवाज है। पहली बार तो एक जनवरी को जब समस्त संसार में मनाया जाता है, दूसरी बार 13 जनवरी को नववर्ष मनाया जाता है। 13 जनवरी को नववर्ष मनाने का कारण यह है कि पुराने समय में रूस के व्यक्ति परंपरागत वर्ष को भी मनाते थे। उनका पुरातन कैलेण्डर आज के अनुसार 13 जनवरी से प्रारंभ होता था। रूसी अपने पुराने परंपरागत साल का स्वागत पर्व के रूप में मनाते हैं। यही परंपरा आज भी प्रचलित है। इसलिए वहां वर्ष में दो बार नववर्ष मनाया जाता है।

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