मायावती की जीत और सितारे

मायावती की जीत और सितारे  

मायावती की जीत और सितारे आचार्य किशोर, यश शर्मा ‘कर्ण’ उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश की कमान संभालते ही मुलायम सरकार के कई फैसलों को रद्द कर, कई नई घोषणाएं कर डालीं। एक दलित महिला नेत्री अपने विरोधियों को ईंट का जवाब पत्थर से देने में अधिक रुचि दिखाएगी है या फिर उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में। उनके ग्रह-नक्षत्र उन्हें कहां तक ले जाएंगे, आइए जानें .... दबे-कुचले और कमजोर वर्ग के लोगों की मदद करने, अपराध मुक्त शासन देने तथा संपूण्र् ा समाज की भलाई करने के संकल्प के साथ बसपा अध्यक्ष मायावती ने चैथी बार प्रदेश की बागडोर संभाली है। प्रस्तुत है उनकी कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण। मायावती की जन्म कुंडली में राज्येश, पंचमेश व सप्तमेश का पंचम भाव में युति संबंध पाराशरीय राजयोग है, जो क्रूर ग्रह मंगल व शनि से बना है तथा इनके साथ राहु का संयुक्त होना उन्हें दलितों का प्रबल सहयोग मिलने का संकेत देता है। उनकी कारकांश कुंडली में पंचम भाव में तीन राजयोग कारक ग्रहों का संबंध प्रबल राजयोग का संकेत दे रहा है। ऋषि जैमिनी के अनुसार शुभ भाव में पंचमेश, आत्मा कारक, अमात्य कारक, पुत्र कारक व कलत्र कारक ग्रहों का संबंध राजयोग देता है, उनके अनुसार पंचम भाव राजयोग कारक होता है। इसी प्रकार पंचमेश भी राजयोग कारक होता है। मायावती की जन्म कुंडली व कारकांश कुंडली दोनों में कारक ग्रहों की युति पंचम भाव में है। कारकांश कुंडली में पंचम भाव में स्थित इन ग्रहों पर जैमिनी के ग्रह दृष्टि सिद्धांतानुसार पंचमेश शनि, स्वगृही मंगल, तृतीय भावस्थ राहु और द्वादश भावस्थ गुरु की दृष्टि के अतिरिक्त केतु की भी पूर्ण दृष्टि होने के कारण आठ ग्रहों का प्रभाव पंचम भाव को अत्यंत बलवान बना रहा है। कारकांश में पराक्रम भाव में पराक्रम कारक मंगल, राहु व शनि स्थित है तथा सूर्य, चंद्र व बुध की दृष्टि के फलस्वरूप 6 ग्रहों का प्रभाव इस भाव को मजबूती देता है। पराक्रम व बुद्धि के भावों का बलवान होना उन्हें राजनीति के क्षेत्र में विजय व पांडित्य प्रदान कर रहा है। जब हम आरूढ़ लग्न बनाते हैं, तो उनका आरूढ़ लग्न उनका लग्न भाव ही बन जाता है जिससे लग्न भाव बली हो जाता है। जैमिनी के सिद्ध ांतानुसार जब भी लग्न में आरूढ़ लग्न आता है तो उस स्थिति में दशम भाव को आरूढ़ लग्न मान देती है। मायावती की कुंडली में वर्तमान समय में शनि की महादशा में मंगल की अंतर्दशा 10.5.2007 से चल रही है जो 17.6.2008 तक चलेगी। यह अवधि उनके लिए उत्तम रहेगी क्योंकि योगकारक ग्रह मंगल की अंतर्दशा 10‑5‑2007 से ही शुरू हुई है। उनकी कुंडली में शनि योगकारक नहीं है परंतु अपने ही नक्षत्र में वृश्चिक राशि में मंगल के साथ स्थित है। शनि की महादशा 4.11.1994 को शुरू हुई। अकारक शनि ने काफी उतार-चढ़ाव दिखाए और उसकी महादशा 2013 तक विशेष शुभ नहीं रहेगी। 15 जुलाई 2007 के पश्चात जब शनि राशि से गोचर में अष्टम में चलेगा तब उनके लिए कई समस्याएं पैदा होंगी और शासन चलाना मुश्किल होगा तथापि योगकारक ग्रह मंगल की अंतर्दशा 17‑6‑2008 तक का समय तनाव के साथ निकाल लंेगी। फिर राहु की अंतर्दशा में शनि की महादशा के दौरान 24.4.2011 तक विशेष परेशानी होगी। गोचर में राहु जन्म राशि (मकर राशि) पर चलेगा और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करेगा। इस दौरान उनके विरोधी उनके विरुद्ध षड्यंत्र रचेंगे। 24.4. 2011 से 5.11.2013 तक शनि में गुरु की अंतर्दशा, स्थिति को संभालने में मददगार साबित होगी। नवांश में शुक्र एवं बुध भाग्य एवं कर्म स्थान में अपने-अपने घर में बलवान हंै इसलिए शनि की महादशा के पश्चात 2013 स े प्रारभ्ं ा हाने े वाली बुध की महादशा 17 साल तक मायावती लिए उत्तम रहेगी क्योंकि बुध केंद्र में सूर्य व चंद्र के साथ है। सूर्य वर्गोत्तम है। शासन चलाने के लिए सूर्य एवं मंगल का बलवान होना जरूरी होता है। चलित कुंडली में सूर्य व बुध सप्तम केंद्र स्थान में स्थित हैं। कुल मिलाकर उनकी कुंडली में शनि की महादशा अति उत्तम प्रतीत नहीं होती, परंतु शनि का जन्म कुंडली में केंद्रेश होकर त्रिकोण भाव में योगकारक मंगल के साथ योग होने से अशुभ फलों में निश्चित रूप से कमी आएगी। यही कारण है कि उनके राजनीतिक जीवन में गठबंधन की राजनीति की जटिल समस्याओं का अतं हअु ा और उन्ह ंे अतं तः पणर््ू ा बहुमत मिला। इसके अतिरिक्त सुनफा योग जैसे कई राजयोग उन्हें मिल रहे हैं।



काल सर्प योग विशेषांक   जून 2007

क्या है काल सर्प योग ? काल सर्प योग का प्रभाव, कितने प्रकार का होता है काल सर्प योग? किन परिस्थियों में शुभ होता है. काल सर्प योग ? काल सर्प बाधा निवारण के उपाय, १२ प्रकार के काल सर्प योगों का कारण, निवारण, समाधान

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.