कैसे करे पुखराज रत्न की पहचान

कैसे करे पुखराज रत्न की पहचान  

व्यूस : 48582 | अप्रैल 2006

पुखराज को अन्य प्राकृतिक रत्नों से अलग करना कुछ सरल है लेकिन पुखराज को कृत्रिम पुखराज और वह भी अलग-अलग तरीकों से बने हुए पुखराज से सिर्फ देखकर अलग करना बहुत ही कठिन है। इन्हें यंत्र से एक-दूसरे से अलग किया जा सकता है।

इस अंक में हम आपको पुखराज के बारे में कुछ खास बातों से अवगत कराएंगे।

पुखराज, जिसे अंग्रेजी में Yellow Sapphire Corundum कहते हैं देखने में हल्के पीले या गहरे पीले रंग का होता है। यह चमकीला और पारदर्शी होता है। यह सफेद रंग का भी होता है जिसे अंगे्रजी में White Sapphire Corundum कहते हैं।


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असली और नकली पुखराज:

पुखराज की तरह देखने वाले कई प्राकृतिक एवं सिंथैटिक रत्न उपलब्ध हैं। सिर्फ आंखांे से पहचान करना बहुत कठिन है। जैसे

प्राकृतिक: Yellow Beryl, Natural Zircon, Natural Spiral, Tourmaline, Scapolite, Topaz, Citrine Quartz, Chrysoberyl Etc.

कृत्रिम: SCZ, Synthetic Spinal, Syn Glass, Synthetic Yellow sapphire

Synthetic Yellow Sapphire भी अलग-अलग विधियों से बनता है। कुछ को तो सिर्फ देखकर पहचानना नामुमकिन सा ही है। जैस

1. Flame Fusion Method

2. Flux Fusion Method

3. Cgochralspi Method

4. Hydrothermal Method

5. Floating Zone Method

इसे अलग-अलग को अलग-अलग विधियों से पहचाना जाता है। आइए जानें कि इन सभी में कैसे अंतर किया जाता है। वैसे तो पुखराज को अन्य प्राकृतिक रत्नों से अलग करना कुछ सरल है लेकिन पुखराज को कृत्रिम पुखराज और वह भी अलग-अलग तरीकों से बने हुए पुखराज से सिर्फ देखकर अलग करना बहुत ही कठिन है। इन्हें यंत्र से एक-दूसरे से अलग किया जा सकता है। रत्न प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास यंत्र या माध्यम निम्नलिखित हैं।

1. Reference: इससे रत्नों की प्रकाश को मोड़ने की क्षमता को आंकते हैं। हर रत्न की अपनी एक निर्धारित सीमा होती है जिसे त्प् अर्थात कहते हैं जो अलग रत्नों के अलग-अलग रासायनिक संयोजन पर आधारित है। पुखराज एवं कृत्रिम पुखराज की RI एक सी ही नजर आती 1.76-1.77 DR 008 यह एक जैसी इसलिए होती है क्योंकि दोनों का रासायनिक संयोजन एक जैसा होता है जो दूसरे प्राकृतिक रत्न हैं उन्हें बहुत ही सरलता से अलग किया जा सकता है क्योंकि यह कभी भी 1.76-1.77 DR 008 न होकर कुछ और मिलेगी जैसे ब्पजतपदम फनंतज्र (सुनैला) की 1.54-1.55 .DR 008


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2. आपेक्षिक घनत्व: इससे हम रत्न का घनत्व नापकर देखते हैं कि वह पानी से कितना गुना भारी है। इससे प्राकृतिक रत्नों को, जो देखने में एक ही रंग के होते हैं, अलग किया जा सकता है। परंतु प्राकृतिक पुखराज एवं कृत्रिम पुखराज में फर्क नहीं किया जा सकता।

3. Pulariscope: कुछ रत्न Singly Refractive (SR) तथा कुछ Doubly Refractive (DR) होते हैं। DR में भी Uniaxial एवं Biaxial होते हैं। स्वाभाविक बनावट को देखकर हम यह बता सकते हैं कि अमुक रत्न कौन सा हो सकता है। पुखराज में DR, Uniaxial लेते हैं। इससे हम काफी रत्नों को अलग कर सकते हैं।

4. Dricroscope: इससे हम रत्नों में Pleochroism देखते हैं। SR रत्नों में Pleochroism नहीं मिलता, DR रत्नों में Pleochroism दिखाई देता है। इसमें भी 2-3 रंग देख सकते हैं। 2 रंग को Dichroism और 3 रंग को Trichoism कहते हैं। जैसे पुखराज में Dichroism दिखाई देता है परंतु Glass में Pleochroism ही नहीं मिलता।

5. Microscope: यह बहुत महत्वपूण्र् यंत्र है। इससे भी हम बहुत से रत्न अलग कर सकते हैं। पुखराज (प्राकृतिक) में ऐसी बहुत सी खूबियां होती हैं जिनसे आप इसे दूसरे रत्नों से अलग कर सकते हैं।

प्राकृतिक पुखराज में Hexagonal Zoning, Haxagonal Crystals, Liquid Fingerprints, Directional Needles, Silk आदि दिखाई दे सकते हैं।

Synthetic Yellow Sapphire Immersionscope में Plato Lines (Fluxo Fusion) दिखाई देते हैं। Gas Bubbles भी दिखाई दे सकते हैं।

Synthetic Yellow Sapphire : Flux Fingerprints, Seed Plate (Flux Fusion) Flux Remnants दिख सकते हैं।

इन सभी खूबियों को देखकर व पहचान कर एक रत्न विशेषज्ञ असली व नकली पुखराज को एक दूसरे से आसानी से अलग कर सकता है।

एक विचार: यह धारणा जो रत्न बिल्कुल कांच की तरह साफ होता है उसमें बाल जैसे दिखने वाला कुछ भी नहीं होना चाहिए बिल्कुल गलत है।

अच्छे से अच्छे पुखराज में भी कोई न कोई छोटे बाल जैसा Inclusion मिल ही जाता है। कांच जितने साफ 1,00,000 पुखराज में से 1 या 2 ही पुखराज निकल पाते हैं तो फिर ये तो बड़े नौ रत्न हैं।


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  • कुछ बातें जो हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए
  • नग खरीदते वक्त सर्टिफिकेट जरूर मांगें।
  • सर्टिफिकेट पर नग की फोटो होनी चाहिए व अन्य विवरण जैसे: वजन, माप, पहचान चिह्न आदि भी होने चाहिए। इससे कोई भी आपको नकली नग नहीं दे पाएगा।

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पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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