हिस्टीरिया

अप्रैल 2010

व्यूस: 35982

हिस्टीरिया

अविनाश सिंह

‘हिस्टीरिया' रोग एक मनोरोग है। इस रोग का मूल कारण होता है रोगी किसी अतृप्त इच्छा को अपने अंतर्मन में दबाए रखता है। आइए, इस रोग के लक्षण व विभिन्न लग्नों में ज्योतिषीय कारणों का पता लगाएं।... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायराशि

पं. लेखराज शर्मा जी की विलक्षण प्रतिभा

मार्च 2013

व्यूस: 35754

जीवन में अनेक व्यक्तियों से मिलकर हम उनके चमत्कारी व्यक्तित्व से अत्यंत प्रभावित होते हैं। उनकी विशेषता गुण व् कार्य प्रणाली इस हद तक चमत्कारिक होती हैं। की उनके आगे नतमस्तक होने को मन चाहता हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरजैमिनी ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

विभिन्न भावों में मंगल का फल

जून 2013

व्यूस: 35587

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में मंगल जातक को साहसी, निर्भीक, क्रोधी, किसी हद तक क्रूर बनाता है, पित्त रोग का कारक होता है तथा चिड़चिड़ा स्वभाव वाला बनाता है। उसमें तत्काल निर्णय लेने की क्षमता होती है तथा वह लोगों को प्रभावित करने तथा अ... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

लाल किताब के टोटके

जनवरी 2013

व्यूस: 35362

लाल किताब के टोटके

फ्यूचर पाॅइन्ट

टेवे में जो ग्रह उच्च का या अपने घर का हो, उस ग्रह की वस्तुए कभी दान नहीं करनी चाहिए। चन्द्रमा यदि खाना नं २ या ४ में हो तो चंद्रमा की वस्तुएं दूध, चावल, मोती का दान कभी नहीं करना चाहिए।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायआकर्षणबाल-बच्चेलाल किताबकानूनी समस्याएंटोटके

राशि के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से आयु-आरोग्य तथा धन, यश की प्राप्ति

मई 2010

व्यूस: 34984

एक मुखी रुद्राक्ष: इस रुद्राक्ष को कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है यह साक्षात् भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। इसे धारण करने से यश, मान, प्रतिष्ठा, धन, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपाययशरूद्राक्षसंपत्तिराशि

भयभीत न हों अष्टम चंद्र से

अप्रैल 2009

व्यूस: 33177

अष्टम चंद्र यानि जन्म कुंडली में आठवें भाव में स्थित चंद्र। आठवां भाव यानि छिद्र भाव, मृत्यु स्थान, क्लेश'विघ्नादि का भाव। अतः आठवें भाव में स्थित चंद्र को लगभग सभी ज्योतिष ग्रंथों में अशुभ माना गया है और वह भी जीवन के लिए अशुभ। ज... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

विभिन्न लग्नों में सप्तम भावस्थ गुरु का प्रभाव एवं उपाय

अप्रैल 2013

व्यूस: 32917

पौराणिक कथाओं में गुरु को भृगु ऋषि का पुत्र बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सर्वाधिक शुभ ग्रह माना गया है। गुरु को अज्ञान दूर कर सदमार्ग की और ले जाने वाला कहा जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

भंग हो केमद्रुम योग, तो बने राजयोग

जून 2011

व्यूस: 32739

केमद्रुम योग के बारे में अधिकांशतः इसके नकारात्मक पक्ष पर अधिक बल है यदि हम इसके सकारात्मक पक्ष का गंभीर पूर्वक विवेचन करें तो कुछ विशेष योगों की उपस्थिति में केमद्रुम योग भंग होकर राजयोग में परिवर्तित हो जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

शादी में देरी: कारण-निवारण

मार्च 2014

व्यूस: 32706

वैवाहिक जीवन सुखमय बीते इसके लिए शादी से पहले गुण मिलान के साथ-साथ ग्रह मिलान भी आवश्यक है। कन्या की कुंडली में विवाह कारक बृहस्पति होता है और पुरूष की कुंडली में विवाह का विचार शुक्र से किया जाता है। यदि दोनों ग्रह शुभ हों और उनप... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

शनि मंगल युति

अकतूबर 2014

व्यूस: 32673

शनि मंगल युति

किशोर घिल्डियाल

कालपुरुष की पत्रिका में शनि दशम व एकादश भाव तथा मंगल प्रथम व अष्टम भाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसी की भी पत्रिका में इन दोनों ग्रहों का युति अथवा दृष्टि संबंध जातक विशेष को गुप्त रूप से कर्म कर लाभ प्राप्त करने जैसे फलांे की ... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

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