तिलों का ज्योतिष में महत्व

तिलों के अध्ययन को Moleosophy कहा जाता है। हस्त विज्ञान, टैरो कार्ड तथा अंकषास्त्र की तरह ही डवसमवेवचील का अध्ययन भी ज्योतिष की ही शाखा है । ज्योतिष के अनुसार सिर्फ हाथ और माथे की रेखाएं ही नहीं बल्कि शरीर पर बने कई अन्य चिह... और पढ़ें

ज्योतिषअन्य पराविद्याएंविविध

आगस्त 2014

व्यूस: 163796

लाल किताब के टोटके

लाल किताब के टोटके

महेश चंद्र भट्ट

राशियों पर आधारित विभिन्न टोटके केवल लाल किताब में दिये गए हैं। आइए, इस लेख द्वारा जानें कि विभिन्न राशि वाले जातकों को सुखी जीवन के लिए क्या-क्या उपाय करने चाहिए।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायलाल किताबसफलताटोटकेराशि

मार्च 2011

व्यूस: 152327

जन्म वार से शरीर का आकर्षण

यह सूर्य का वार है। सर्वप्रथम इसका नंबर एक है। जिसका जन्म 1, 10, 19 और 28 तारीख में हो तो उस जातक पर सूर्य का प्रभाव रहेगा। सूर्य ग्रहों का राजा है और आत्मा का कारक है। इस वार को जन्मे जातक... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगआकर्षणभविष्यवाणी तकनीक

मई 2013

व्यूस: 130510

कन्या का विवाह कहां होगा

कन्या का विवाह कहां होगा

सीताराम त्रिपाठी

माता-पिता अपनी कन्या का विवाह करने के लिए वर की कुंडली का गुण मिलान करते है। कन्या के भविष्य के प्रति चिंतित माता-पिता का यह कदम उचित हिया। किन्तु इसके पूर्व उन्हें यह देखना चाहिए। की लडकी का विवाह किस उम्र में, किस दिशा में तथा क... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणविवाहभविष्यवाणी तकनीक

नवेम्बर 2006

व्यूस: 126912

गृह कलह निवारण के अनुभूत उपाय

गृह कलह की कोई न कोई वजह जरुर होती है जिसे पति – पत्नी के तनाव का मुख्य कारण उनके घरवालों को लेकर उत्पन्न कलह होती है। कलह के कारण कई बार तो दाम्पत्य जीवन में तनाव इतना बढ़ जाता है की तलाक तक की नौबत आ जाती है।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायटोटके

जुलाई 2006

व्यूस: 110642

नाभि चढ़ना : एक वास्तविक समस्या

शिशु रूप में जब मानव गर्भावस्था में होता है, तब नाभि ही एकमात्र वह मार्ग होता है, जिसके माध्यम से वह अपनी सभी महत्वपूर्ण क्रियाओं, जैसे सांस लेना, पोषक तत्वों को ग्रहण करना तथा व्यर्थ और हानिकारक पदार्थों का निष्कासन करता हहै। जन्... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यज्योतिषीय विश्लेषणविविध

अकतूबर 2011

व्यूस: 110139

रत्न चयन व् धारण विधि -विधान

रत्न चयन व् धारण विधि -विधान

भगवान सहाय श्रीवास्तव

सही रत्न का चुनाव करना एक कठिन कार्य है, क्योंकि रत्न जहां लाभ करते हैं. वहीँ हानि भी पहुंचा सकते हैं. लग्न, चतुर्थ, पंचम, नवम, दशम, द्वितीय ये शुभ भाव हैं. यदि इनसे सम्बंधित ग्रह जन्मकुंडली में स्वग्रही... और पढ़ें

ज्योतिषरत्नसुख

मई 2012

व्यूस: 106762

लग्न कुंडली देखे या चलित कुंडली

जब भविष्यवाणी करने की बात आती है तो भाव चलित कुंडली बहुत महत्वपूर्ण होती है। लोग प्रायः भ्रमित रहते हैं की किस कुंडली का प्रयोग किया जाए क्योंकि कभी कभार दोनों कुंडलियों में ग्रह स्थितियाँ अलग-अलग होती है।... और पढ़ें

ज्योतिषटैरोभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2006

व्यूस: 94355

तुला राशि को साढेसाती का प्रभाव सुखद रहेगा

शनि १५ नवंबर २०११ को तुला राशि में प्रवेश करेंगे शनि की साढेसाती कन्या, तुला, वृश्चिक राशि पर रहेगी। इन तीनों राशियों में तुला राशि के जातकों के लिए शनि की साढेसाती शुभ रहेगी।... और पढ़ें

ज्योतिषमंत्रभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2011

व्यूस: 84209

कुंडली में कारक, अकारक और मारक ग्रह

ग्रहों को नैसर्गिक ग्रह विचार रूप से शुभ और अशुभ श्रेणी में विभाजित किया गया है। बृहस्पति, शुक्र, पक्षबली चंद्रमा और शुभ प्रभावी बुध शुभ ग्रह माने गये हैं और शनि, मंगल, राहु व केतु अशुभ माने गये हैं। सूर्य ग्रहों का राजा है ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2015

व्यूस: 82568

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