अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल

अप्रैल 2015

व्यूस: 32590

अस्तग्रहों के बारे में कहा गया है -‘त्रीणि अस्ते भवे जड़वत’ अर्थात किसी जन्म चक्र में तीन ग्रहों के अस्त हो जाने पर व्यक्ति जड़ पदार्थ के समान हो जाता है। ऐसा व्यक्ति स्थिर बना रहना चाहता है, उसके शरीर, मन और वचन सभी में शिथिलता... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

ग्रहों का उदय और अस्त

अप्रैल 2010

व्यूस: 32551

ग्रहों का उदय और अस्त

फ्यूचर पाॅइन्ट

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अं... और पढ़ें

ज्योतिषआकाशीय गणितग्रह

कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

मई 2014

व्यूस: 32163

प्रथम भाव केतु यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति रोगी, चिन्ताग्रस्त, कमजोर, भयानक पशुओं से परेशान तथा पीठ के कष्ट का भागी होता है। वह अपने द्वारा पैदा की गई समस्याओं से लड़ने वाला, लोभी, कंजूस तथा गलत लोगों का चयन करने के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

खाने में किसके साथ क्या खाएं क्या न खाएं

जनवरी 2015

व्यूस: 32013

अक्सर संतुलित आहार की बात होती है लेकिन इसके अतिरिक्त यह जानना भी आवश्यक है कि किस चीज को किसके साथ खाएं या किसको किसके साथ न खाएं। हम खाने में एक साथ कई चीजें खाना पसंद करते हैं। लेकिन एक ही समय कुछ चीजों को एक साथ खान... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यभविष्यवाणी तकनीक

लोकसभा चुनाव 2014

अप्रैल 2014

व्यूस: 31855

लोकसभा चुनाव 2014

डॉ. अरुण बंसल

शनि को राजनीति का कारक एवं गुरु को सत्ता, नीति और महत्वाकांक्षाओं के प्रदर्षन से जोड़ा जाता है। इन महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति हेतु शनि और गुरु दोनों का अपना महत्व है। शनि मानवता एवं न्याय व्यवस्था का प्रतीक है। अभी शनि उच्च राषिस्थ ... और पढ़ें

ज्योतिषघटनाएँरत्न

नौकरी कब मिलेगी ?

अप्रैल 2014

व्यूस: 31831

नौकरी कब मिलेगी ?

फ्यूचर पाॅइन्ट

शास्त्रों के अनुसार ग्रहों का मानव शरीर पर किसी न किसी रूप में प्रभाव पड़ते हैं। ये प्रभाव प्रतिकूल या अनुकूल हो सकते हैं। मानव की सभी क्रियाएं, कमोबेश, इन ग्रहों के द्वारा संचालित होती हैं। नौ ग्रहों में किस ग्रह की महादशा और अंतर... और पढ़ें

ज्योतिषदशावशीकरणग्रहगोचर

राजयोग तथा विपरीत राजयोग

जुलाई 2013

व्यूस: 31814

फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार:- दुःस्थानभष्टमरिपु व्ययभावभाहुः सुस्थानमन्य भवन शुभदं प्रदिष्टम्। (अ. 1.17) अर्थात् ‘‘जन्मकुण्डली के 6,8,12 भावों को दुष्टस्थान और अन्य भावों को सुस्थान कहते हैं।’’ अन्य भावों में केन्द्र (1,4,7,10) तथा त... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

भविष्य जानने की प्राचीन विद्या रमल

अकतूबर 2011

व्यूस: 31667

रमल भूत, भविष्य, वर्त्तमान, रूप, आयु तथा मृत्यु हर प्रकार के शुभाशुभ फल ज्ञात करने की प्राचीन विद्या है. भारतीय विद्वानों के मतानुसार ज्योतिष के अन्य अंगों की भाँती 'रमल' विद्या भी मूलत" भारत की ही दें है.... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकरमल शास्त्र

आइ. ए. एस. तथा आई.पी.एस. बनने के ज्योतिषीय योग

फ़रवरी 2011

व्यूस: 31214

शिक्षा प्राप्ति के बाद कार्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पूर्व प्रशासन के क्षेत्र में उच्च पद प्राप्ति की महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने में किन ज्योतिषीय योगों से मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त की जा सकती है। आइए, जानें उन योगों के ब... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

राहु: शुभ अथवा अशुभ

मार्च 2013

व्यूस: 30825

ज्योतिष की दृष्टि से हमारे जीवन में घटित होने वाली शुभ या अशुभ प्रत्येक घटना नव ग्रहों पर ही आधारित होती है और नवग्रहों में ही राहु का नाम विशेष चर्चा में रहता है। जन्मकुंडली में राहु का नाम सुनते ही व्यक्ति अनिष्ट की आशंका करने ल... और पढ़ें

ज्योतिषउपायदशाघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकटोटके

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