ज्योतिष


राहु का प्रभाव

सुरेंद्र कुमार शर्मा

ब्रह्मांड में स्थित नव-ग्रहों में से प्रमुख सात ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, तथा शनि) को छोड़कर शेष दो छाया ग्रहों (राहु-केतु) में राहु का विशेष स्थान है। हालांकि इन छाया ग्रहों का कहीं भौतिक अस्तित्व नहीं ह... more

ज्योतिषघरग्रह

ग्रहों को नैसर्गिक ग्रह विचार रूप से शुभ और अशुभ श्रेणी में विभाजित किया गया है। बृहस्पति, शुक्र, पक्षबली चंद्रमा और शुभ प्रभावी बुध शुभ ग्रह माने गये हैं और शनि, मंगल, राहु व केतु अशुभ माने गये हैं। सूर्य ग्रहों का राजा है ... more

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणग्रहभविष्यवाणी तकनीक

वैवाहिक जीवन व दोष एवं निवारण

मई 2010

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विवाह में विलंब और वैवाहिक जीवन में क्लेश, तनाव, मानसिक पीड़ा और तलाक जैसी स्थिति किन योगों के कारण होती है। इन स्थितियों से बचाव के लिए किए जाने वाले उपायों का वर्णन।... more

ज्योतिषउपायज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्यामंत्रविवाहभविष्यवाणी तकनीकयंत्र

संग्रहणी पेट का गंभीर रोग

जून 2011

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संग्रहणी रोग में शरीर में वसा का भंडार कम हो जाता है। इसके कारण शरीर के सारे अंग सिकुड़कर छोटे हो जाते हैं। आइए जानें, विभिन्न लग्नों में संग्रहणी रोग का ज्योतिषीय विश्लेषण... more

ज्योतिषस्वास्थ्यज्योतिषीय विश्लेषणभविष्यवाणी तकनीकराशि

सफलता की गारंटी ‘‘शुभ मुहूर्त’’ पाना मुश्किल नहीं है

जून 2011

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मुहूर्त की गणना उन लोगों के लिए भी लाभदायक है जो अपना जन्म विवरण नहीं जानते। ऐसे लोग शुभ मुहूर्त की मदद से अपने प्रत्येक कार्य में सफल होते देखे गए हैं। दैनिक जीवन में शुभ कार्यों के लिए सरल शुभ मुहूर्त का विचार निम्न प्रकार से कि... more

ज्योतिषमुहूर्तपंचांगभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली का विश्लेषण करते हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों जैसे- सभी ग्रहों की स्थिति, डिग्री, दृष्टि, गति, नवांश और चलित की स्थिति आदि को अवश्य ही ध्यान में रखना चाहिए और उन्हीं के अनुसार भविष्यकथन करना चाहिए। इन सभी पहलुओं को देख कर अगर ... more

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

रत्न न केवल आभूषणों की ही शोभा बढाते है। बल्कि इनमे दैविक शक्ति भी विद्यमान होती है। रत्नों की संख्या काफी बड़ी है। परंतु ८४ रत्नों को ही मान्यता प्राप्त है। ९ मुख्य रत्न क्रमश: माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमे... more

ज्योतिषटैरोरत्न

शनि-चंद्र का विष योग

जून 2013

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शनि-चंद्र का विष योग

सीताराम सिंह

फलदीपिका’ ग्रंथ के अनुसार ‘‘आयु, मृत्यु, भय, दुख, अपमान, रोग, दरिद्रता, दासता, बदनामी, विपत्ति, निन्दित कार्य, नीच लोगों से सहायता, आलस, कर्ज, लोहा, कृषि उपकरण तथा बंधन का विचार शनि ग्रह से होता है। ‘‘अपने अशुभ कारकत्व के कारण शनि... more

ज्योतिषज्योतिषीय योगघरभविष्यवाणी तकनीक

प्रस्तुत लेख में ग्रहों की शांति के लिए कुछ सरल व अचूक उपाय प्रस्तुत है-जिनमें लाल किताब व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के उपाय सम्मिलित हैं।... more

ज्योतिषउपायग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

शनि दोष शांति उपाय

अंकुर नागौरी

मंगलवार को वानरों को गुड़ चना खिलाना/ हनुमान चालीसा शनि उपाय हेतु रामबाण औषधि है। हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा पढने से चमत्कारिक फल मिलता है... more

ज्योतिषउपायग्रह

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