ज्योतिष


वक्री ग्रहों के संबंध में ज्योतिष प्रकाशतत्व में कहा गया है कि-“क्रूरा वक्रा महाक्रूराः सौम्या वक्रा महाशुभा।।” अर्थात क्रूर ग्रह वक्री होने पर अतिक्रूर फल देते हैं तथा सौम्य ग्रह वक्री होने पर अति शुभफल देते हैं।... more

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली में संतान योग

फ्यूचर पाॅइन्ट

जीवन में समस्त सुखों में महत्पूर्ण हैं. संतानसुख. भारतीय हिन्दू धर्मशास्त्र में पांच प्रकार के ऋणों की चर्चा की गई हैं जिनमें एक पितृ ऋण. पितृ ऋण बगैर संतान उत्पति के नहीं चुकाया जा सकता. वंश को आगे बढाने हेतु पुत्रोत्पति ही पितृ ... more

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगबाल-बच्चेभविष्यवाणी तकनीक

इस अंक में हम आपको पुखराज के बारे में कुछ खास बातों से अवगत कराएंगे। पुखराज जिसे अंग्रेजी में yellow sapphire corundum कहते है देखने में हल्के पीले या गहरे पीले रंग का होता है। यह चमकीला और पारदर्शी होता है। यह सफेद रंग का भी होता... more

ज्योतिषटैरोरत्न

बारहवां घर खुले आकाश का, व्यय का तथा मोक्ष का भाव है। शनि बारहवें घर का शनि व्यक्ति को असाधारण बनाता है, वह नेक भी हो सकता है बद भी। इस घर के शनि वाला व्यक्ति बिना किसी खास कारण के अपने को संतुष्ट महसूस नहीं करता। शनि व्यक्तिगत वि... more

ज्योतिषउपायग्रह

नवग्रहों में सूर्य राजसी ग्रह माना जाता है। मेष राशि में सूर्य उच्चस्थ होते हैं और तुला राशि में नीचस्थ। प्रस्तुत है सूर्य के नीच भंग राजयोग का कुंडलीय विश्लेषण।... more

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय योगयशकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीकसफलता

मानव जीवन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, यह तो हम सभी जानते हैं। लेकिन अगर हम यह कहें कि ग्रहों का मानव जीवन पर प्रभाव अवश्य पड़ता है और वह अकाट्य होता है तो इसमें शायद मत भिन्नता हो सकती है। बहुत से बुद्धिजीवी, विशेषकर वैज्ञानिक, जो... more

ज्योतिषविवाहभविष्यवाणी तकनीक

विवाह के विषय में जानना इतना आसान नहीं क्योंकि विवाह हमारे सोलह संस्कारों में एक मुख्य संस्कार है। हमारे ज्योतिष शास्त्र में विवाह के विषय में अनेक ग्रन्थ मिलते है। ज्योतिष शास्त्र ऐसा शास्त्र है जिससे हर विषय की सटीक जानकारियां उ... more

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

सर्वतोद्रद्र मंडंल

रामचंद्र शर्मा

मंडल, यंत्र एवं चक्र में अनेकानेक गुप्त शक्तियों को समाहित एवं नियंत्रित करने की असीम क्षमता होती है। मंडल का उपयोग देवता विशेष की पूजा एवं विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति हेतु होता है। मंडल एवं चक्र देवतारूपी महामंत्र है। इस पर पूजित ... more

ज्योतिषमेदनीय ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

हमारे जन्मांग चक्र में विभिन्न भावों को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष चार भागों में बांटा जाता है। 1, 5, 9 धर्म भाव, 2, 6, 10 अर्थ भाव, 3, 7, 11 काम भाव और 4, 8, 12 मोक्ष भाव है।... more

ज्योतिषज्योतिषीय योगशिक्षाकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

सौर मंडल में सभी ग्रह सूर्य के चारों और अपने-अपने अंडाकार पथ पर निरंतर परिक्रमा करते रहते है। सूर्य से बढती दूरी के क्रम में ग्रह हैं। - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, गुरु और शनि। चूंकि हम पृथ्वी पर ग्रहों के प्रभावों के आकलन के लिए प... more

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय विश्लेषणकुंडली व्याख्या

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