सूर्य

सूर्य

अजय भाम्बी

आदिकाल में जब ब्रह्माण्ड से ब्रह्मा जी की उत्पति हुई तो उन्होंने सर्वप्रथम ॐ का उच्चारण किया। यही ॐ दृष्टि का प्रथम शब्द था सूर्य का शरीर कहा जाता है। जब ब्रह्मा के चारों मुखों से वेद प्रकट हुए तब वे सूर्य के तेज से प्रकाशित हुए।... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

मार्च 2013

व्यूस: 10029

एड्स

एड्स

अविनाश सिंह

‘एडस' एक लाइलाज बीमारी है जो विश्व के लिए एक चुनौती बनी हुई है। चिकित्सा विज्ञान को अभी तक इस बीमारी पर सफलता प्राप्त नहीं हुई है। आइए प्रस्तुत लेख द्वारा एडस के लक्षण, निदान, विभिन्न लग्नों में एड्स रोग की संभावना और उनके कारणों ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायराशि

मार्च 2010

व्यूस: 10018

नक्षत्रों का महत्व

नक्षत्रों की खोज राशियों से पहले हुई थी। पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। नक्षत्रों को अन्य धर्म में तारों के नाम से भी जाना जाता हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रराशि

फ़रवरी 2013

व्यूस: 9908

चन्द्र

चन्द्र

अजय भाम्बी

दक्षराज की 27 कन्याओं के चन्द्रमा से विवाह के विषय में बहुत ही सुन्दर कथा का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार राजा दक्ष की सभी कन्याओं में रोहिणी सबसे अधिक रूप और गुणों से परिपूर्ण थी।... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

अप्रैल 2013

व्यूस: 9832

अक्षय तृतीया एवं आपकी राशि

अक्षय तृतीया का दिन एक सर्वमान्य शुभ दिन है। इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए किसी विशेष समय या मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। आज के दिन किसी भी व्यापार, उद्योग, नौकरी या पेशे को आरम्भ कर सकते हैं। अक्षय तृतीया... और पढ़ें

ज्योतिषघटनाएँउपायपर्व/व्रतराशि

मई 2014

व्यूस: 9112

किस वस्तु का व्यापार करें किससे होगा लाभ

कौन ग्रह तथा किस तरह के विषेष ग्रह योगों से और किस व्यापार से लाभ होगा। इस लेख में इस विषय पर संक्षेप में बड़ी उपयोगी और सटीक जानकारी दी गई है।... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकसफलतासंपत्तिराशि

अप्रैल 2011

व्यूस: 8690

कुंडली में पंच महापुरूष योग एवं रत्न चयन

ज्योतिष में पंचतारा ग्रह मंगल, बुध, गुरु, शुक्र एवं शनि द्वारा केंद्र भावों (लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशम) में उच्च, स्वगृही अथवा मूल त्रिकोण होकर, स्थित होने पर पंच महापुरूष योग बनते हैं जिनका प्रभाव राजयोगों की तरह होता है। यदि ग्रह... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगरत्नराशि

जून 2013

व्यूस: 8160

चिकित्सा ज्योतिष का महत्व

ज्योतिष एक ऐसी विद्या है जिसके द्वारा बीमारियों का पूर्वानुमान लगाकर उनसे बचने के उपाय किए जाते हैं या उसकी तीव्रता कम की जा सकती है। प्रस्तुत है इस संदर्भ में विभिन्न ग्रह व जन्मपत्री के प्रत्येक स्थान व राशि से शरीर के कौन-कौन स... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यचिकित्सा ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकराशि

जनवरी 2010

व्यूस: 6964

ज्योतिष में रत्नों का महत्व

नवरत्नों का ज्योतिष के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। सभी रत्नों में अपूर्व दैवी शक्ति निहित है। रत्नों का हम पर जो प्रभाव पड़ता है वह ग्रहों के रंगों और अनेक प्रकार की किरणों की उत्सर्जन क्षमता के कारण है। विद्वानों ने प्रयो... और पढ़ें

ज्योतिषउपायरत्नराशि

मई 2014

व्यूस: 6871

लग्नानुसार कालसर्प योग

लग्नानुसार कालसर्प योग

राजेंद्र शर्मा ‘राजेश्वर’

मेषादि द्वादश राशियों के लग्न में निर्मित होने वाले कालसर्प योगों का विभिन्न रूपों में अलग अलग प्रभाव होता हैं। मेष तथा वृश्चिक लग्न-मंगल की राशि मेष-वृश्चिक लग्न में जन्मकुंडली में कालसर्प निर्मित हो तो मंगल और राहु दोनों से पीड़... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीकराशि

मार्च 2013

व्यूस: 6705

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