भविष्यवाणी तकनीक


दैनिक क्रियाओं से संबंधित शुभ-अशुभ शकुन

जीवन में हमारे दैनिक कार्यों के साथ शुभ अशुभ शकुन जुड़े हुए होते हैं। खाना खाते समय, जागते समय, सोते समय अक्सर ऐसी ही कुछ न कुछ स्थितियां पैदा हो जाती है। आइए जानें इन शकुनों का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंशकुनभविष्यवाणी तकनीक

जून 2010

व्यूस: 36131

विभिन्न भावों में मंगल का फल

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में मंगल जातक को साहसी, निर्भीक, क्रोधी, किसी हद तक क्रूर बनाता है, पित्त रोग का कारक होता है तथा चिड़चिड़ा स्वभाव वाला बनाता है। उसमें तत्काल निर्णय लेने की क्षमता होती है तथा वह लोगों को प्रभावित करने तथा अ... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

जून 2013

व्यूस: 35842

भयभीत न हों अष्टम चंद्र से

अष्टम चंद्र यानि जन्म कुंडली में आठवें भाव में स्थित चंद्र। आठवां भाव यानि छिद्र भाव, मृत्यु स्थान, क्लेश'विघ्नादि का भाव। अतः आठवें भाव में स्थित चंद्र को लगभग सभी ज्योतिष ग्रंथों में अशुभ माना गया है और वह भी जीवन के लिए अशुभ। ज... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2009

व्यूस: 34264

अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल

अस्तग्रहों के बारे में कहा गया है -‘त्रीणि अस्ते भवे जड़वत’ अर्थात किसी जन्म चक्र में तीन ग्रहों के अस्त हो जाने पर व्यक्ति जड़ पदार्थ के समान हो जाता है। ऐसा व्यक्ति स्थिर बना रहना चाहता है, उसके शरीर, मन और वचन सभी में शिथिलता... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अप्रैल 2015

व्यूस: 34053

शनि मंगल युति

शनि मंगल युति

किशोर घिल्डियाल

कालपुरुष की पत्रिका में शनि दशम व एकादश भाव तथा मंगल प्रथम व अष्टम भाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसी की भी पत्रिका में इन दोनों ग्रहों का युति अथवा दृष्टि संबंध जातक विशेष को गुप्त रूप से कर्म कर लाभ प्राप्त करने जैसे फलांे की ... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2014

व्यूस: 33718

भंग हो केमद्रुम योग, तो बने राजयोग

केमद्रुम योग के बारे में अधिकांशतः इसके नकारात्मक पक्ष पर अधिक बल है यदि हम इसके सकारात्मक पक्ष का गंभीर पूर्वक विवेचन करें तो कुछ विशेष योगों की उपस्थिति में केमद्रुम योग भंग होकर राजयोग में परिवर्तित हो जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

जून 2011

व्यूस: 33562

विभिन्न लग्नों में सप्तम भावस्थ गुरु का प्रभाव एवं उपाय

पौराणिक कथाओं में गुरु को भृगु ऋषि का पुत्र बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सर्वाधिक शुभ ग्रह माना गया है। गुरु को अज्ञान दूर कर सदमार्ग की और ले जाने वाला कहा जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

अप्रैल 2013

व्यूस: 33273

कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

प्रथम भाव केतु यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति रोगी, चिन्ताग्रस्त, कमजोर, भयानक पशुओं से परेशान तथा पीठ के कष्ट का भागी होता है। वह अपने द्वारा पैदा की गई समस्याओं से लड़ने वाला, लोभी, कंजूस तथा गलत लोगों का चयन करने के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

मई 2014

व्यूस: 32436

राजयोग तथा विपरीत राजयोग

फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार:- दुःस्थानभष्टमरिपु व्ययभावभाहुः सुस्थानमन्य भवन शुभदं प्रदिष्टम्। (अ. 1.17) अर्थात् ‘‘जन्मकुण्डली के 6,8,12 भावों को दुष्टस्थान और अन्य भावों को सुस्थान कहते हैं।’’ अन्य भावों में केन्द्र (1,4,7,10) तथा त... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

जुलाई 2013

व्यूस: 32346

भविष्य जानने की प्राचीन विद्या रमल

रमल भूत, भविष्य, वर्त्तमान, रूप, आयु तथा मृत्यु हर प्रकार के शुभाशुभ फल ज्ञात करने की प्राचीन विद्या है. भारतीय विद्वानों के मतानुसार ज्योतिष के अन्य अंगों की भाँती 'रमल' विद्या भी मूलत" भारत की ही दें है.... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकरमल शास्त्र

अकतूबर 2011

व्यूस: 32282

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