भविष्यवाणी तकनीक


नाम बदलो भाग्य बदलेगा

जुलाई 2011

व्यूस: 45105

मूलांक एवं भाग्यांक को बदला नहीं जा सकता लेकिन योजनाबद्ध ढंग से यदि नामांक, मूलांक और मूलांक का मेल हो जाए तो व्यक्ति का भाग्य बदलने में देर नहीं लगती। आइए जानें किस प्रकार ...... और पढ़ें

अंक ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न

फ़रवरी 2006

व्यूस: 43052

रत्नों की कार्य पद्धति पर अनेक विचार प्रकट किए जाते हैं। हर रत्न का रंग एवं गुण दोनों एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न होते हंै। ये कार्य भी अलग-अलग करते हैं। कुछ रत्न जल्दी असर दिखाना शुरू कर देते हैं तो कुछ धीरे-धीरे।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायरत्नभविष्यवाणी तकनीक

भवन निर्माण कार्य एवं मुहूर्त

जून 2011

व्यूस: 42986

भवन निर्माण के लिए यदि हम अच्छा मुहूर्त यानि वास्तु पुरूष की जागृत अवस्था में कार्य प्रारंभ करें तो वास्तु या अन्य किसी दोष का निवारण स्वतः ही हो जाता है। जब किसी महीने में वास्तु पुरूष चौबीस घंटे सो रहें हो तो कोई भी निर्माण कार्... और पढ़ें

ज्योतिषमुहूर्तभविष्यवाणी तकनीक

पैरों से भविष्य निर्धारण

अप्रैल 2011

व्यूस: 40612

पैरों की अंगुलियां तथा अंगूठे आदि विभिन्न भाग भविषय कथन के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की आदतों और जीवन शैली को किस प्रकार व्यक्त करते हैं और उसके भविष्य को प्रकाषित करते हैं, जानकारी के लिए पढिए यह लेख।... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंमुखाकृति विज्ञानभविष्यवाणी तकनीक

कारकांश लग्न द्वारा फलकथन

अप्रैल 2012

व्यूस: 40491

ज्योतिष की अनेकों विद्याओं में से एक विद्या जैमिनी ज्योतिष भी है जिसे जैमिनी ऋषियों द्वारा उपदेश सूत्रों के रूप में दिया गया है यह विद्या पराशरीय प्रणाली से विभिन्न होते हुये भी काफी सटीक व सूक्ष्म फलित व गणित कर पाने में सक्षम है... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरजैमिनी ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

स्वप्नों का अर्थ

जून 2010

व्यूस: 40303

स्वप्नों का अर्थ

महेश चंद्र भट्ट

स्वप्न निद्रावस्था में ही नहीं देखे जाते, जागृत अवस्था में भी देखे जाते हैं। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है।... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंसपनेभविष्यवाणी तकनीक

उच्च नीच के ग्रह क्यों और कैसे होते हैं?

अप्रैल 2015

व्यूस: 40236

ज्योतिष में रुचि रखने वाले उच्च/ नीच के ग्रहों से रोजाना मुखातिब होते हैं और ग्रहों की इस स्थिति के आधार पर फलकथन भी करते हैं। शाब्दिक परिभाषा के आधार पर ‘उच्च’ का तात्पर्य सामान्य स्तर से ऊँचा और ‘नीच’ का तात्पर्य सामान्य ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

क्या और कैसे होते हैं-उच्च, नीच, वक्री एवं अस्त ग्रह

अप्रैल 2015

व्यूस: 40101

उच्च तथा नीच राशि के ग्रह भारतवर्ष में अधिकतर ज्योतिषियों तथा ज्योतिष में रूचि रखने वाले लोगों के मन में उच्च तथा नीच राशियों में स्थित ग्रहों को लेकर एक प्रबल धारणा बनी हुई है कि अपनी उच्च राशि में स्थित ग्रह सदा शुभ फल दे... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कुंडली के द्वादश भावों में बृहस्पति का फल

अप्रैल 2004

व्यूस: 37659

सभी जानते हैं कि बृहस्पति ग्रह, समस्त ग्रह पिंडों में सबसे अधिक भारी और भीमकाय होने के कारण, गुरु अथवा बृहस्पति के नाम से जाना जाता है। यह पृथ्वी की कक्षा में मंगल के बाद स्थित है और, सूर्य को छोड़ कर, सभी अन्य ग्रहों से बड़ा है। इस... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

दैनिक क्रियाओं से संबंधित शुभ-अशुभ शकुन

जून 2010

व्यूस: 35941

जीवन में हमारे दैनिक कार्यों के साथ शुभ अशुभ शकुन जुड़े हुए होते हैं। खाना खाते समय, जागते समय, सोते समय अक्सर ऐसी ही कुछ न कुछ स्थितियां पैदा हो जाती है। आइए जानें इन शकुनों का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंशकुनभविष्यवाणी तकनीक

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