ज्योतिषीय योग


प्रतिस्पर्धात्त्मक परीक्षा में सफलता कैसे ?

अप्रैल 2010

व्यूस: 20356

मानव के समस्त कार्य और व्यवसाय को संचालित करने में नेत्रों की भूमिका जिस प्रकार अग्रगण्य मानी गई है ठीक उसी प्रकार ज्ञान, विज्ञान विद्या के क्षेत्र में ज्योतिष विज्ञान दृष्टि का कार्य करता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगशिक्षाकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

अष्टम भावस्थ शनि और मृत्यु

जुलाई 2005

व्यूस: 19436

अष्टम भाव रहस्यमय है और इसके कुछ कारकत्व भी रहस्य से जुड़े हैं। शनि तो रहस्यमय है ही। अष्टम भाव का कारक भी शनि ही है। अष्टम भाव में ही 22वां द्रेष्काण होता है। शनि यदि अष्टम भावस्थ हो तो उसकी दृष्टियां दशम, द्वितीय व पंचम भावों प... और पढ़ें

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अष्टम भावस्थ शनि का विवाह पर प्रभाव

जनवरी 2009

व्यूस: 17764

प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने एकमत से जातक की कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का निर्णायक भाव माना है और इसे जाया भाव, भार्या भाव, प्रेमिका भाव, सहयोगी, साझेदारी भाव स्वीकारा है।... और पढ़ें

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जन्मकुंडली में व्यवसाय या नौकरी योग

अप्रैल 2010

व्यूस: 17752

जन्मकुंडली में व्यवसाय या नौकरी योग : वाणिज्यं नृपमान्यताश्व गमनं मल्लत्वराज्यक्रिया, दासत्वं कृषि वैद्यकीर्ति निधि निक्षेपाश्चयज्ञादयः। श्रेष्ठत्वं गुरुयंत्र मंत्र जननी विस्तार पुण्यौषधो रूस्थानाभर मंत्र सिद्धिविभवाः स्याददत्तपुत... और पढ़ें

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शनि से बनने वाले योग

मार्च 2013

व्यूस: 17735

शनि से बनने वाले योग

अशोक सक्सेना

शनि का नाम सुनकर ही जातक भयभीत/ चिंताग्रस्त हो जाते हैं, जबकि ऐसा सोचना हमेशा सत्य नहीं होता। शनि देव को भगवान शिव ने न्यायधीश का पड़ दिया है। और उसका दायित्व शनिदेव पूर्ण निष्ठां से व बिना किसी दुराग्रह के संपादित करते हैं।... और पढ़ें

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नेप्च्यून, प्लूटो तथा हर्षल से संबंधित कुछ प्रभावी योग

फ़रवरी 2006

व्यूस: 17518

पत्रिका के आधार पर फल कथन हेतु मुख्यतः सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु तथा केतु को ही व्यवहार में लिया जाता है। किंतु वर्तमान में हर्षल, नेप्च्यून तथा प्लूटो नामक 3 अन्य ग्रहों का भी समावेश इनमें किया गया है।... और पढ़ें

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द्वादश भाव संबंधी शुभ फल

जनवरी 2007

व्यूस: 16724

ज्योतिष शास्त्र के प्रवर्तक ऋषियों ने जन्म कुंडली के षष्ठ, अष्टम और द्वादश भावों को दुःख स्थान तथा अन्य भावों को सुस्थान की संज्ञा दी है। दुःस्थानम् षष्टभरिपुव्ययभावमाहुः सुस्थानमन्यभवनं शुभदं प्रदिष्टम। -फलदीपिका सामान्यतः छ... और पढ़ें

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राजभंग योग

आगस्त 2010

व्यूस: 16506

राजभंग योग

आचार्य किशोर

उच्च कोटि के राजयोग जहां फलित होते देखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं राजयोगों का भंग होना भी फलीभूत हुआ है। ऐसा क्यों होता है, आइए कुछ कुंडलियों के माध्यम से इस विषय की तह तक पहुंचने का प्रयास करें।... और पढ़ें

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महान भविष्यवक्ता कीरो

अकतूबर 2010

व्यूस: 16288

अंक विज्ञान के क्षेत्र में कीरो का नाम बहुत ही सम्मानपूर्वक लिया जाता है। कीरो एक महान अंक विशेषज्ञ होने के साथ-साथ महान हस्तरेखा विशेषज्ञ एवं महान भविष्यवक्ता भी थे। किन ग्रहों की शुभ स्थिति एवं बल ने इस महान व्यक्तित्व को इस क्ष... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगदशाकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

काला जादू ज्योतिष की नजर में

जून 2014

व्यूस: 15970

काला जादू जिसे अभिचार (Abhichara) के नाम से भी जाना जाता है, जोकि विष्व के विभिन्न स्थानों में कई रूपों में प्रचलित है, इसके द्वारा नकारात्मक शक्तियों को जागृत किया जाता है। काला जादू का मुख्य ध्येय शत्रु को उस स्थान ... और पढ़ें

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