ज्योतिषीय योग


नौकरी एवं व्यवसाय

नौकरी एवं व्यवसाय

फ्यूचर पाॅइन्ट

किसी कुंडली के आधार पर कैसे निर्णय करेंगे कि जातक नौकरी करेगा या अपना व्यवसाय करेगा? यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि जातक का कार्यक्षेत्र क्या होगा?... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगविविध

दिसम्बर 2011

व्यूस: 1877

गृह सुख योग

गृह सुख योग

फ्यूचर पाॅइन्ट

आधुनिक युग में सुंदर व सुसज्जित आवास की चाहत सभी को होती है। परंतु सभी की यह अभिलाषा पूर्ण नहीं हो पाती। जन्म कुंडली में स्थित ग्रहों की स्थिति इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार होती है, प्रस्तुत है गृह सुख एवं गृह बाधा देने वाले... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगसुखभविष्यवाणी तकनीक

दिसम्बर 2006

व्यूस: 2110

जब चाहत पूरी नहीं होती

जन्म लेते ही चाहत हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ जाती है बचपन में यह माता-पिता, खेल तथा चाकलेट आदि के प्रति होती है तो युवावस्था में युवा साथी के प्रति।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगदशाकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

मई 2011

व्यूस: 1870

कुंडली में शनि पीड़ित होने से उत्पन्न समस्याएं

ग्रहों की चर्चा आते ही अधिकांश लोगों का ध्यान ‘‘शनि’’ की ओर ही आकर्षित होता है तथा एक भय की दृष्टि से इसे देखते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योग

नवेम्बर 2011

व्यूस: 1932

सन् 2010 मेष, कर्क, तुला और वृश्चिक के नाम

नव वर्ष को लेकर लोगों की उत्सुकता और चिंता स्वाभाविक है। हर व्यक्ति जानना चाहता है कि नए वर्ष में उसका भविष्य कैसा होगा।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2010

व्यूस: 1923

योग, दशा और गोचार

योग, दशा और गोचार

ईश्वर लाल खत्री

प्रश्न: वर्तमान समय का फलादेश करने के लिए योग, दशा और गोचर में से किसका महत्व अधिक है और क्यों? अपने उत्तर को उदाहरण की सहायता से प्रमाणित करें।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगदशाभविष्यवाणी तकनीकगोचर

मार्च 2015

व्यूस: 4380

अष्टम भावस्थ शनि-II संतान

पिछले शोध पत्र में शनि के अष्टम भावस्थ होने को रहस्यमय कहा गया था। अष्टमस्थ शनि की पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि होने के कारण इसका शुभ-अशुभ प्रभाव शिक्षा, संतान आदि पर होना चाहिए। पंचम भाव को पूर्व पुण्य भाव भी कहा जाता है। पूर्व जन्म ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगबाल-बच्चेग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अकतूबर 2005

व्यूस: 4841

गर्भधारण संभावनाएं कब-कब

विवाह के बाद समय आता है संतानोत्पत्ति का जिसे शास्त्रों के अनुसार पितृऋण के रूप में जाना जाता है। जब बार-2 गर्भपात या गर्भधारण में देरी होती है तो दम्पति का चिंतित होना स्वाभाविक होता है। निराश दम्पति कई बार समय आने से पहले ही दत... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगबाल-बच्चेदशाभविष्यवाणी तकनीकगोचर

अप्रैल 2005

व्यूस: 4917

चिकित्सक योग

चिकित्सक योग

रश्मि चैधरी

एक सफल चिकित्सक बनने में किन ग्रहों का योग होता है। इस आलेख में प्रस्तुत है चिकित्सा व्यवसाय में सफलता दिलाने वाले ग्रह योगों का विवरण... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2011

व्यूस: 4500

बहुविवाह एवं बहुविवाह योग पर विचार

प्राचीन में बहुविवाह को अधिक मान्यता थी। इस समय अनेक राजा-महाराजाओं ने अनेकों पत्नियां, दासियां रखते थे। जहां तक देवता भी अनेक पत्नियां व पटरानियां रखते थे। स्वयं भगवान राम के पिता जनक के तीन रानियां थी। कृष्ण ने कई रानियां व सैकड़... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2007

व्यूस: 4938

एकाधिक वैवाहिक संबंध के ज्योतिषीय आयाम

ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत सभी महानुभावों के पास आम लोग किसी न किसी समस्या को लेकर आते रहते हैं। समस्याएं अधिकतर व्यक्ति के व्यवसाय, विवाह, बच्चे, स्वास्थ्य एवं आर्थिक पहलुओं से संबंधित होती हैं। परंतु अभी कुछ समय से जिस समस्य... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाहभविष्यवाणी तकनीक

जनवरी 2007

व्यूस: 5357

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