1. वर्गाकार हाथ में हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच के भाग (राहु क्षेत्र) पर एक से अधिक क्राॅस लिवर की गड़बड़ी तथा मन में अधीरता के परिचायक हैं। (धैर्य की कमी पायी जाती है) तथा इनमें ऐसे जातक आलसी प्रवृŸिा के होते हैं। अच्छी-अच्छी बात करने तथा सजने संवरने के शौकीन होते हैं लेकिन कर्मठ कम होते हैं। यदि राहु क्षेत्र पर डमरू का निशान हो तो जातक तंत्र-मंत्र का ज्ञाता होता है। 2. चेननुमा हृदय रेखा के साथ कुछ रेखाएं बुध पर्वत की तरफ नीचे को झुकी हों तो ऐसे जातक जल्दी ही थक जाते हैं। इसी में जिग-जेग रेखा (आड़ी तिरछी रेखा) जातक को मनचला बनाती हैं। एक से अधिक लोगों पर दिल आता है तथा समय के साथ पसंद बदलती रहती है। चेननुमा रेखा का वर्गाकार हाथों में दिखना यह साबित करता है कि व्यक्ति अपने व्यापार तथा कार्य को गति नहीं दे पाता। बड़े जोश के साथ प्रारंभ करता है लेकिन फिर बीच में ही रोकना पड़ता है। मूड बदलता रहता है तथा दूसरों की अपेक्षा अपने आप से ज्यादा प्यार करता है। यदि राहु की रेखा हृदय को छूती है तो हृदय की धड़कन अथवा घबराहट जल्दी से होती है, दिल की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। चेननुमा हृदय रेखा कमजोर जिगर तथा डरपोक प्रवृत्ति को दर्शाती है। 3. चंद्रमा की ओर सीधी जाने वाली रेखा यात्रा रेखा के नाम से जानी जाती है। यदि यह भाग्य रेखा को छूती हुई चंद्र पर्वत की तरफ आगे बढ़ती है तो जातक अपने उत्तम भाग्य के कारण बिना किसी विशेष मकसद के देश-विदेश की यात्रा करता है। यदि यह रेखा एक दूसरी समानांतर रेखा के साथ चंद्रमा की तरफ बढ़ती है तो जातक विशेष कार्य और मकसद के लिए देश-विदेश की यात्राएं करता है। यदि यात्रा रेखा में द्वीप का निशान हो तो व्यक्ति दूर प्रदेश में मृत्यु तुल्य कष्ट भोगता है तथा विदेश में उसकी मृत्यु भी होती है, मृत्यु ज्यादातर पानी तथा रोड एक्सीडेंट में होती है। इन्हीं रेखाओं को हम प्रेम रेखा के नाम से भी जानते हैं। समानांतर रेखाएं आपको प्रेम तथा रोमांस की ओर खींचती हैं। 4. आयु रेखा में दो समानांतर रेखाएं शुक्र पर्वत की ओर जाती हैं। ये रेखाएं 1 से 2 साल की उम्र के अंदर बड़ी चोट दर्शाती हैं व शरीर में किसी बड़ी चोट के निशान होते हैं। ये चोटें अंदरुनी भी हो सकती हैं जो बड़ी उम्र में परेशानी को दर्शाती हैं। यदि आयु रेखा और भाग्य रेखा आपस में जुड़ी हुई हों तथा चतुर्भज का निर्माण करती हों तो व्यक्ति अपने किसी विशिष्ट गुण के कारण रोजी-रोटी कमाता है। जिंदगी भर भाग्य से खाएगा। शुक्र पर्वत पर जालीनुमा धब्बे व्यक्ति में यौन संबंधी बीमारी को दर्शाते हैं। यदि वर्गाकार हाथ में उच्च मंगल पर्वत से कोई रेखा बुध पर्वत को छूती है तो व्यक्ति के अंदर सन्यास के गुण आ जाते हैं अथवा वह प्रायः निराश रहता है। जिंदगी में सब कुछ मिलने के बाद भी निराशा तथा कुंठा भरी रहती है। यदि मंगल-बुध रेखा के बीच में द्वीप का निशान मस्तिष्क रेखा के आस-पास हो तो व्यक्ति को मिर्गी आना व चक्कर खाकर बेहोश होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। मंगल बुध की साधारण तथा पतली रेखा की युति में गले संबंधी रोेग, थायराइड की गड़बड़ी, आवाज का साफ न होना, तुतलाना तथा त्वचा संबंधी बीमारी होती है। 5. इस हाथ में मस्तिष्क रेखा जितनी चंद्रमा की तरफ झुकी हुई होती है व्यक्ति का स्वभाव उतना ही कल्पनाशील होता है। यदि मस्तिष्क रेखा चंद्रमा तथा मंगल पर्वत की तरफ झुककर फिर सीधी होती है तो व्यक्ति बहुत स्वतंत्र विचारों वाला होता है। वह बिना किसी चीज की परवाह किये मनमानी करता है तथा बाद में ऊब जाने के बाद उस चीज को छोड़ ही देता है जैसे नशा, जुआ व अपव्ययी होना आदि। एकदम से मस्तिष्क रेखा का उठना व्यक्ति को बड़बोला, गाली-ग्लौज करने वाला बनाता है तथा मन पर नियंत्रण नहीं होता है। मस्तिष्क रेखा में बने हुए त्रिभुज तथा द्वीप सिर के बालों का झड़ना तथा सिर में दर्द को दर्शाता है। यदि मस्तिष्क रेखा दो से तीन जगह पर टेढ़ी-मेढ़ी होती है और चंद्रमा को छूती है तो जातक को बी.पी. (रक्तचाप) तथा मूत्र विकार की समस्या देती है, पैर भी प्रायः मोटे अथवा चर्बी युक्त होते हैं। 6. भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर श्नि पर्वत की ओर एकदम सीधी जाए तो अच्छे शनि को दर्शाती है। लेकिन यदि भाग्य रेखा दो शाखा से शुरू होकर दो शाखा में ही खतम हो जाती है तथा जिसके दोनों पोर त्रिभुज से बंद हो तो ऐसा व्यक्ति जीवन पर्यंत क्या करेगा क्या नहीं करेगा का निर्णय लेने में असमर्थ रहता है। यदि कोई कार्य शुरू भी करता है तो आधे में ही मन ऊब जाता है। ऐसी रेखा वाले व्यक्ति दूसरे के अधीनस्थ होते पाये गये हैं। किसी के व्यक्तिगत सहयोग से ही कुछ कर पाते हैं। नीचे से भाग्य रेखा का कई शाखाओं में विभक्त होना आत्मघात तथा गलत कार्य करने के लिए उकसाता है। 7. सीधी स्पष्ट आयु रेखा व्यक्ति को कर्मठ, नीतिप्रज्ञ बनाती है तथा धनात्मक ऊर्जा प्रदान करती है लेकिन यदि शाखाएं मणिबंध की तरफ नीचे को जाए तो निराशा में जीवन व्यतीत होता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों से तुलना करते-करते अपना जीवन व्यतीत करता है और कुछ भी नहीं पाता। आयु रेखा को काटती हुई सीधी रेखा अधीर बनाती है तथा पेट की गड़बड़ी, खास तौर पर गैस की समस्या को दर्शाती है। आयु रेखा में गहरे छोटे-छोटे द्वीप पारीवारिक समस्या, विवाह तथा शुभ कार्य में बाधक होते हैं। जिनके हाथ में ऐसी रेखा होती है उनका विवाह विलंब से होता है। बीच से टूटी हुई आयु रेखा निराशा का सबब बनती है, लेकिन अल्पायु को देखने के लिए अन्य ग्रहों को देखना जरूरी है। केतु के क्षेत्र पर क्राॅस का निशान अचानक से उपलब्धि दिला सकता है तथा यदि यह निशान भाग्य रेखा से लगा हुआ हो तो पथरी तथा कैंसर जैसी समस्या देता है। केतु के क्षेत्र में क्रास का निशान कई बार बिना मेहनत के फल देता है तथा समाज में नाम होता है। एक से अधिक क्राॅस के निशान मानसिक पीड़ा, चेचक, भूत-प्रेतबाधा जादू-टोना आदि के द्योतक हंै।


परा विद्यायें विशेषांक  अकतूबर 2010

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