लियो पाम में कुंडली मिलान

लियो पाम में कुंडली मिलान  

लियो पाम में कुंडली मिलान विनय गर्ग विवाह एक संयोग है, जो धरती पर संपन्न होता है । षोडश संस्कारों में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है। कुंडली मिलान भारतीय समाज में अत्यावश्यक माना जाता है। आज के इस आधुनिक युग में भी विवाह रीति-रिवाज़ों से ही होता है। पुत्र या कन्या जब विवाह के योग्य हो जाते हैं, तो ढेरों रिश्ते आते हैं। कुछ परिवारों में कन्या एवं पुत्र स्वयं ही अपना जीवन साथी चुन लेते हैं। लेकिन विवाह फिर भी रिवाज़ों के अनुसार ही होता है। जब भी किसी परिवार में विवाह की बात होती है तो कुंडली मिलान एक मुखय दृष्टिकोण होता है। यह बात सच है कि जिसके साथ जीवन बिताना है, उसको हम नहीं जानते हों तो ऐसा कोई तो आधार होना ही चाहिए जिसके आधार पर हम निर्णय कर सकें कि अमुक जातक के साथ हमारी जिंदगी ठीक-ठाक चल भी पायेगी या नहीं। वस्तुतः कुंडली मिलान के द्वारा हम वर और कन्या के रूचि, स्वभाव व आपसी सामंजस्य का विचार करते हैं। हिंदू धर्म में वैसे भी यह विचार माना जाता है कि विवाह के लिये वर और कन्या का संबंध दूर-दूर तक नहीं होना चाहिए। ऐसे में हम एक दूसरे के बारे में कैसे जान सकते हैं। इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने ऐसी पद्धति की खोज निकाली जिसके आधार पर हम वर और कन्या के वैवाहिक जीवन के भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं। कुंडली मिलान के लिये दो पहलुओं पर विचार किया जाता है। प्रथम तो अष्टकूट मिलान तथा दूसरा मंगलीक विचार किया जाता है। अष्टकूट के वर्ण विचार, वश्य विचार, तारा विचार, योनि विचार, ग्रह मैत्री विचार, गण विचार, भकूट विचार एवं नाड़ी दोष मिलान किया जाता है। वर्ण विचार द्वारा जातीय कर्म एवं वश्य विचार द्वारा यह विचार करते हैं कि कौन किसके वश में होगा, तारा विचार से वैवाहिक जीवन का भाग्य का विचार किया जाता है। योनि विचार से वर-कन्या के यौन संबंधों का विचार किया जाता है। ग्रह मैत्री द्वारा पारस्परिक संबंधों की जानकारी प्राप्त होती है। साथ ही गण विचार से सामाजिकता, भकूट विचार से आपसी सामंजस्यता एवं नाड़ी विचार से वर-कन्या का संतान विचार एवं आयु के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है। इस प्रकार, हम अष्टकूट मिलान से वह एक कन्या के वैवाहिक जीवन का अनुमान लगाया जा सकता है। अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं। मिलान के नियमानुसार 36 में से 18 गुण प्राप्त होना आवश्यक है। इसमें भी हमें ग्रह मैत्री पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जब तक आपसी संबंध ठीक नहीं होंगे तब तक वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रह सकता। इसके अतिरिक्त कुंडली मिलान के लिये मंगलीक विचार भी आवश्यक है। मोटे तौर पर हम मंगलीक विचार के लिये कुंडली में मंगल की भाव में स्थिति पर विचार करते हैं। यदि मंगल लग्न से 1,2, 4, 7, 8, 12 वें भाव में स्थित होता है तो जातक मंगलीक माना जाता है। इसमें विद्वानों के विचारों में मतांतर भी रहा है, कुछ विद्वान ज्योतिषी चंद्र, सूर्य और शुक्र से भी मंगलीक का विचार मानते हैं। मंगलीक के बारे में ज्योतिष का मत है कि मंगलीक जातकों को मंगलीक जातक से ही विवाह करना चाहिए। लेकिन कुछ विशेष नियमों के अंतर्गत मंगलीक दोष भंग होने की स्थिति में मंगलीक जातक गैर मंगलीक जातक से भी विवाह कर सकते हैं तथा इसके अतिरिक्त यदि एक जातक मंगलीक हैं और दूसरा पक्ष गैर मंगलीक है तो जिस भाव में मंगलीक जातक की कुंडली में मंगल है और दूसरे की कुंडली में उसी भाव में शनि या राहु जैसा क्रूर ग्रह है तो दोनों की कुंडली मिलान होने से मंगलीक दोष भंग हो जाता है। लियो पाम में कुंडली मिलान के इन सभी पहलुओं पर गहन अध्ययन करके इन नियमों का समावेश किया गया है तथा सूक्ष्म से सूक्ष्म पक्ष को भी महत्व देते हुये उन नियमों का पालन करके कुंडली मिलान का सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है तथा मंगलीक दोष भंग का विचार श्लोक सहित समझाया गया है। जिन स्थितियों में यदि मंगलीक दोष भंग हो रहा है तो उनके पक्ष में साक्ष्य दिये गये हैं। फ्यूचर पॉइंट द्वारा निर्मित सॉफ्टवेयर लियो पाम में कुंडली मिलान बहुत सरल है। इस पैकेज में कुंडली मिलान विभिन्न प्रकार से हो सकता है, जो गुजराती, उत्तर भारतीय तथा पारंपरिक पद्धतियों पर आधारित हैं। इस पैकेज में कुंडली बनाने के दो विकल्प हैं, जैसे किसी कन्या का कुंडली मिलान विभिन्न लड़को की अलग-अलग कुंडलियों से किया जा सकता है। एक कुंडली का मिलान विभिन्न कुंडलियों से किया जा सकता है। दोनों कुंडलियों का परीक्षण पृथक रूप से भी कर सकते हैं। दोनों कुंडलियों की गणना षष्ठांश तक हो सकती है। इन कुंडलियों को उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय, बंगला, उड़िया तथा पाश्चात्य पद्धतियो से देख सकते हैं। भाव चलित एंव ग्रहों के अंश भी स्क्रीन पर देखे जा सकते हैं। दोनों कुंडलियों का विवरण देते ही अष्टकूट सारणी के द्वारा जान सकते हैं कि कितने गुण मिलते हैं। इस सारणी में कूट, वर्ण, वश्य, तारा, योनि, मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी आदि का विस्तार से वर्णन किया गया है। अष्टकूट मिलान में दोनों कुंडलियों में मांगलिक विचार की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। दोनों कुंडलियों में मांगलिक दोष है, या नहीं? यदि है, तो उसका निवारण कैसे करें इत्यादि की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अष्टकूट के अंतर्गत ही दोनों कुंडलियों का निष्कर्ष प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त दोनों कुंडलियों का फलादेश भी जान सकते हैं। दोनों व्यक्तियों का एक-दूसरे के प्रति व्यवहार कैसा रहेगा? पति और पत्नी का स्वास्थ्य कैसा होगा? संतान का योग है, या नहीं तथा ससुराल वालों से किस प्रकार का आचरण रहेगा, इन सब बातो के बारे में विस्तृत ब्योरा प्राप्त कर सकते हैं। के लिए स्क्रीन के बायीं ओर निचले भाग में 'मेलापक' बटन पर क्लिक करना होता है। इसके पश्चात वर का जन्म विवरण इनपुट स्क्रीन पर भरते हैं, कन्या का जन्म निवास करने के लिये स्क्रीन के बायीं ओर टॉप पर '2' का चुनाव करना होता है, अर्थात् दूसरे कन्या का जम्न निवारण भरना होता है। इसके पश्चात स्क्रीन के निचले भाग में मध्य में कुंडली वाले बटन पर क्लिक करेंगे तो स्क्रीन पर अष्टकूट गुण सारणी प्रदर्शित होगी। जिसमें सभी आठ कूटें का मिलान विवरण सहित व कुल प्राप्त अंक प्रदर्शित हो रहे होंगे। यहां हम देखते हैं कि यदि प्राप्त कुल अंक '18' या '18' से अधिक हैं तो अष्कूट विचार के आधार पर कुंडली मिलान ठीक है। इसमें सभी अष्टकूटों में प्राप्त अंक अलग-अलग प्रदर्शित हो रहे होते हैं। अष्टकूट के नीचे भी सब मेन्यू में 'अष्टकूट' लिखा होता है इस पर क्लिक करने से काम्बो बॉक्स खुलेगा जिसमें आपको निम्नलिखित विकल्प दिखायी देंगे। अष्टकूट, अष्टकूट फल, मंगलीक और निष्कर्ष 'अष्टकूट' पर क्लिक करने पर उपर्युक्त स्क्रीन ही दिखाई देती रहेगी। 'अष्टकूट फल' पर क्लिक करने पर आपको अष्टकूट के विश्लेषण के बारे में जानकारी प्राप्त होनी जैसे वर्ग, गण भकूट आदि का इस कुंडली मिलान में कैसा दोष व प्रभाव होगा तथा यह दोष सामान्य है या कष्टदायक है या त्याज्य है। तथा इसी स्क्रीन पर दिया होगा कि अष्टकूट मिलान के अनुसार कुंडली मिलान ठीक है। उत्तम है। अत्युत्म है यदि की जानकारी दी जाती है। इसके बाद यदि 'मंगलिक' पर क्लिक करेंगे तो कुंडली मिलान में मंगलीक दोष का विचार, विश्लेषण व निष्कर्ष आदि की जानकारी दी होती है। यदि मंगलीक दोष है। परंतु उनका दोष वैदिक ज्योतिष के आधार पर प्रभावहीन व निरस्त हो रहा होता है तो उसका विश्लेषण भी आपको श्लोकों के साक्ष्य के साथ प्राप्त होगा तथा अंत में निष्कर्ष पर क्लिक करने पर आपको अष्टकूट मिलान में प्राप्तांक व अधिकतम अंक एवं मंगलीक के विश्लेषण के उपरांत निष्कर्ष एवं सारांश के रूप में प्राप्त होगा। इसके उपरांत यदि आप दोनों की जन्मकुंडली, ग्रह/भाव, दशा, अवकहड़ा, अष्टकूट और फलित की जानकारी चाहते हैं तो आपको कॉम्बो बॉक्स के ऊपरी कॉम्बो बॉक्स में लिखे 'अष्टकूट' पर क्लिक करना होगा। 'कुंडली' को क्लिक करने पर लग्न कुंडली प्रदर्शित हो जायेगी यदि आपने 'सेट 1' का चुनाव कर रखा है तो वर की कुंडली प्रदर्शित हो जाएगी। 'सेट 2' का चुनाव कर रखा है तो कन्या की लग्न कुंडली प्रदर्शित हो जायेगी। 'कुंडली के नीचे काम्बो बाक्स में क्लिक करने पर आप उक्त जातक की विभिन्न कुंडलियां जैसे चलित, नवमांश व अन्य वर्गीय कुडलियां षष्ठांश कुंडली तक प्राप्त हो जायेंगी। जो भी वर्गीय कुंडली आपने देखी हो उस पर क्लिक करके आप उक्त जातक की वर्ग कुंडली देख सकते हैं। इसी प्रकार 'ग्रह भाव' पर क्लिक करने पर आपको ग्रह स्पष्ट ग्रह-उप, ग्रह- भाव, चलित, ग्रह कारक तत्व, ग्रह स्वामित्व आदि की अर्थात के. पीपद्ध ति से संबंधित कुंडली की सभी जानकारी प्राप्त होगी। 'दशा' पर क्लिक करने पर आपको दस प्रकार की दशाएं पांच स्तर पर प्राप्त की जा सकती है। इसी प्रकार 'अवकहड़ा' पर क्लिक करने पर अवकहड़ा की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। इसके बाद अंत में 'फलित' पर क्लिक करने पर वर-कन्या का वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा उसके बारे में जानकारी प्राप्त होगी। इसमें वर-वधू के वैवाहिक जीवन की जानकारी निम्न शीर्षकों के अंतर्गत दी गयी है जैसे स्वभाव, धन, स्वास्थ्य, संतान, ससुराल-वर, ससुराल-कन्या। यह सभी फलित अष्टकूट गुणों के आधार पर निर्भर करती है। जो इनकी जन्मराशि व अन्य ज्योतिष तथ्यों पर आधारित होती है। यह सभी फलादेश आगामी वैवाहिक जीवन की सफलता/असफलता की झांकी को प्रस्तुत करता है। जिसके आधार पर वर कन्या के रिश्तेदार संबंधी विवाह के निर्णय ले सकते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि लियो पाम में कुंडली मिलान संबंधित संपूर्ण जानकारी ज्योतिषी की नजर में व आम व्यक्ति की नजर से उपलब्ध है। विस्तृत जानकारी के लिए आप फ्यूचर पॉइंट के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं अथवा ग्राहक सेवा से निम्नलिखित फोन पर बात कर सकते हैं।



श्री विद्या एवम दीपावली विशेषांक  नवेम्बर 2010

श्रीविद्या व दीपावली विशेषांक फ्यूचर समाचार पत्रिका का अनूठा विशेषांक है जिसमें आप रहस्यमी श्रीविद्या, श्रीयंत्र व महालक्ष्मी पूजन की दुर्लभ विधियों के साथ-साथ इस अवसर पर इस महापूजा की पृष्ठभूमि के आधारभूत संज्ञान से परिचित होकर लाभान्वित होंगे।

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