ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

मासारंभ में सूर्य मिथुन में, चंद्रमा मीन में, मंगल वृष में, बुध मिथुन में, गुरु मिथुन में, शुक्र कर्क में, शनि तुला में, राहु तुला में, केतु मेष में, नेप्च्यून कुंभ में,यूरेनस मीन में तथा प्लूटो धनु राशि में होंगे। मासारंभ में गुरु ग्रह का मिथुन राशि में उदित होना तथा वक्री गति के शनि से और राहु से नव पंचम योग में रहना तथा मंगल ग्रह से द्विद्वादश योग में रहना कुछ प्रांतों में उपद्रवी लोगों के उपद्रवी व हिंसक कार्यों में वृद्धि करेगा जिससे जनता में भय की भावना पैदा होगी। ये योग दैनिक उपयोगी वस्तुओं में महंगाई को और बढ़ावा देते हं जिससे आम लोगों के मन में शासकों के प्रति आन्दोलन की भावना लाएगा। यह योग कहीं सत्ता परिवर्तन का भी संकेत देता है। 5 जुलाई को मंगल का मिथुन राशि में आकर सूर्य, गुरु व बुध के साथ चतुर्ग्रही योग में आना तथा राहु से दृष्टित होना जो कि वक्री गति के शनि के साथ स्थित है, यह योग विश्व के विशिष्ट व्यक्तियों के लिए कष्टकारी रहेगा। पूर्वी यूरोपीय देशों में भूस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट तूफान व कहीं अराजकता के कारण जन-धन की हानि का कारक बन रहा है। 16 जुलाई को सूर्य का कर्क राशि में आकर शुक्र से राशि संबंध बनाना व शनि से दृष्ट होना तथा मंगल, गुरु, बुध से द्विद्वादश योग में आ जाना राजनीतिज्ञों में परस्पर विरोधाभास की स्थिति को और बढ़ाएगा तथा राजनैतिक अस्थिरता का वातावरण पैदा करेगा। कई नए-नए रोगों से आम जनता को पीड़ा होगी। प्राकृतिक आपदाएं, समुद्री तूफान या बाढ़ इत्यादि जन धन के लिए हानिकारक रहेगा। कहीं अत्यधिक वर्षा और कहीं एकदम सूखे के संकेत बनते हंै। सोना व चांदी मासारंभ में 1 जुलाई को गुरु ग्रह का उदय होना तथा बुध ग्रह का अस्त हो जाना बाजारों में तेजी का योग बनाएगा। 5 जुलाई को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश कर सूर्य, बुध व गुरु से राशि संबंध बनाना और इसी दिन सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र पर आकर सर्वतोभद्रचक्र द्वारा मूला, उत्तरा फाल्गुनी व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों को वेधना बाजारां में तेजी की लहर को आगे बढ़ाएगा। बाजारों में राजनैतिक प्रभाव के कारण यह योग दो तरफा भी जा सकता है अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 6 जुलाई को शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र पर आकर अनुराधा, मघा व धनिष्ठा नक्षत्रों को वेधना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक बनाएगा। 8 जुलाई को शनि का मार्गी गति में आना और इसी दिन सोमवती अमावस्या का होना बाजारों में पूर्ववत तेजी का रूख बनाएगा। 10 जुलाई को चंद्र दर्शन बुधवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में मंदी का सूचक बन रहा है। 14 जुलाई को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र में आकर पूर्वाषाढ़ा, हस्त व उत्तराभाद्रपद नक्षत्रों को वेधना चांदी में मंदी के रूख को आगे बनाएगा। 16 जुलाई को सूर्य का कर्क राशि में आकर शुक्र से संबंध बनाना तथा शनि से दृष्टित होना तथा आषाढ़ संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों में पुनः तेजी की लहर चला देगा। 17 जुलाई को शुक्र का मघा नक्षत्र में आकर भरणी, श्रवण व अश्लेषा नक्षत्रों को वेधना सोने में पूर्ववत तेजी का योग बनाएगा तथा चांदी में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनाएगा। 19 जुलाई को सूर्य का पुष्य नक्षत्र में आकर ज्येष्ठा, पूर्वा फाल्गुनी व शतभिषा नक्षत्रों को वेधना तथा बुध ग्रह का भी उदय हो जाना बाजारों में तेजी की लहर को और आगे बढ़ाएगा। 20 जुलाई को मिथुन राशि स्थित बुध का मार्गी गति में आना चांदी में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी ही बनाएगा। 24 जुलाई को बुध का पुनर्वसु नक्षत्र में आकर मूला, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वाभाद्र को वेधना चांदी में मंदी का रूझान बना देगा। 29 जुलाई को बृहस्पति का आद्र्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करना सोना व चांदी के बाजारां में भी तेजी बनाएगा। गुड़ व खांड़ मासारंभ में 1 जुलाई को गुरु ग्रह का उदय होना तथा बुध ग्रह का अस्त हो जाना बाजारों में तेजी का ही योग बनाएगा। 5 जुलाई को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश कर सूर्य, बुध व गुरु से राशि संबंध बनाना तथा सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र पर आकर मूला, उत्तराफाल्गुनी व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी की लहर को और आगे बढ़ाएगा। 6 जुलाई को शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र पर आकर अनुराधा नक्षत्र को वेधना बाजारों को पूर्ववत तेजी के रूझान में ही रखेगा। 8 जुलाई को शनि का मार्गी गति में आना और सोमवती अमावस्या का होना तेजी का ही सूचक है। 10 जुलाई को चंद्रदर्शन बुधवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में मंदी का सूचक बन रहा है। 14 जुलाई को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र पर आकर पूर्वाषाढ़ा, हस्त व उत्तराभाद्रपद नक्षत्रों को वेधना बाजारों में मंदी की लहर चला देगा। 16 जुलाई को सूर्य का कर्क राशि में आकर शुक्र से राशि संबंध बनाना तथा शनि से दृष्टित होना और आषाढ़ मास की संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों में पुनः तेजी का रूझान बना देगा। 17 जुलाई को शुक्र का मघा नक्षत्र पर आकर भरणी, श्रवण व अश्लेषा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में चल रही तेजी की लहर को और आगे बढ़ाएगा। 19 जुलाई को सूर्य का पुष्य नक्षत्र में आकर ज्येष्ठा, पूर्वाफाल्गुनी व शतभिषा नक्षत्रों को वेधना तथा बुध ग्रह का उदय होना बाजारों में पूर्ववत तेजी की स्थिति को बनाए रखेगा। 20 जुलाई को मिथुन राशि स्थित बुध का मार्गी गति में आना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक बनाएगा। 24 जुलाई को बुध का पुनर्वसु नक्षत्र में आकर मूल नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदी का रूझान बना देगा। 29 जुलाई को बृहस्पति का आद्र्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करना बाजारों में मंदी का ही सूचक बनता है। अनाज व दलहन मासारंभ में 1 जुलाई को गुरु का उदय होना तथा बुध ग्रह का अस्त हो जाना गेहूं, जौ, चना, ज्वार बाजरा इत्यादि अनाजवान तथा मूंग, मौठ, मसूर अरहर इत्यादि दलहन के बाजार में तेजी का ही योग बनाएगा। 5 जुलाई को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश कर सूर्य, बुध व गुरु ग्रह से राशि संबंध बनाना तथा सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कर मूला, उत्तरा फाल्गुनी तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी की लहर ही बनाएगा। 6 जुलाई को शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र पर आकर अनुराधा नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव अधिक बनाए रखेगा। 8 जुलाई को शनि का मार्गी गति में सोमवती अमावस्या के दिन आना तेजी का ही सूचक बन रहा है। 10 जुलाई को चंद्रदर्शन बुधवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना अनाजों व दलहन में कुछ मंदी का रूख बना देगा। 14 जुलाई को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र पर आकर पूर्वाषाढ़ा, हस्त व दक्षिण वेध से उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को वेधना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजवान तथा मूंग मौठ, मसूर इत्यादि दलहन में तेजी की लहर चला देगा। 16 जुलाई को सूर्य का कर्क राशि में आकर शुक्र से राशि संबंध बनाना तथा शनि से दृष्टित होना तथा आषाढ़ मास की संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना बाजारों में तेजी का रूझान बनाए रखेगा। 17 जुलाई को शुक्र का मघा नक्षत्र पर आकर भरणी नक्षत्र को वेधना बाजारों के तेजी के वातावरण में और वृद्धि करेगा। 19 जुलाई को सूर्य का पुष्य नक्षत्र में आकर ज्येष्ठा, पूर्वा फाल्गुनी व शतभिषा नक्षत्रों को वेधना तथा बुध ग्रह का भी उदय हो जाना अनाजां व दलहन की पूर्व तेजी की लहर को आगे चलाएगा। 20 जुलाई को मिथुन राशि स्थित बुध का मार्गी गति में आना तेजी का ही सूचक बन रहा है। 24 जुलाई को बुध का पुनर्वसु नक्षत्र पर आकर मूल नक्षत्र को वेधना गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजां तथा मूंग, मौठ, मसूर अरहर इत्यादि दलहन में पूर्ववत रूख को बनाए रखेगा। 29 जुलाई को बृहस्पति का आद्र्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करना बाजारों को मंदी की ओर ले जाने वाला योग है। घी व तेलहन मासारंभ में 1 जुलाई को गुरु ग्रह का उदय होना तथा बुध ग्रह का अस्त हो जाना बाजारों में तेजी का ही सूचक बनता है। 5 जुलाई को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश कर सूर्य, बुध व गुरु ग्रह से राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कर मूला, उत्तराफाल्गुनी व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों को वेधना बाजारां में पूर्ववत तेजी का रूख ही बनाए रखेगा। 8 जुलाई को शनि का मार्गी गति में आना और सोमवती अमावस्या का होना तेजी की लहर को और आगे चलाएगा। 10 जुलाई को चंद्र दर्शन बुधवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में मंदी का सूचक बनता है। 14 जुलाई को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र पर आकर पूर्वाषाढ़ा, हस्त व उत्तरा भाद्रपद नक्षत्रों को वेधना घी व तेलवान में मंदी का रूझान बना देगा। 16 जुलाई को सूर्य का कर्क राशि में आकर शुक्र से राशि संबंध बनाना तथा शनि से दृष्टित होना और आषाढ़ मास की संक्रांति का 30 मुहूर्ती में होना घी व तेलों के बाजारां में पुनः तेजी की लहर चला देगा। 17 जुलाई को शुक्र का मघा नक्षत्र पर आकर भरणी नक्षत्र को वेधना तेजी के वातावरण को बनाए रखेगा। 19 जुलाई को सूर्य का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर ज्येष्ठा, पूर्वाफाल्गुनी व शतभिषा नक्षत्रों को वेधना तथा इसी दिन बुध ग्रह का भी उदय हो जाना घी व तेलवान में चल रही तेजी की लहर को और आगे चलाएगा। 20 जुलाई को मिथुन राशि स्थित बुध का मार्गी गति में आना बाजारों में उतार-चढ़ाव का रूख बनाते हुए तेजी का ही रूझान बनाए रखेगा। 24 जुलाई को बुध का पुनर्वसु नक्षत्र पर आकर मूल नक्षत्र को वेधना बाजारां में पूर्व रूख को बनाए रखेगा। 29 जुलाई को बृहस्पति का आद्र्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करना घी व तेलवान के बाजारों में आगे तेजी का ही वातावरण बनाएगा।



पराविद्या विशेषांक  जुलाई 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शिक्षा के क्षेत्र में सफलता/असफलता के योग, मानसिक वेदना, विवाह के लिए गुरु, शुक्र एवं मंगल का महत्व, ईश्वर एवं देवताओं के अवतार, वास्तु दोष व आत्महत्या, श्रीयंत्र का अध्यात्मिक स्वरूप, पितृमोक्ष धाम का महातीर्थ ब्रह्म कपाल, फलित ज्योतिष में मंगल की भूमिका, प्रेम का प्रतीक फिरोजा, स्त्री रोगों को ज्योतिष व वास्तु द्वारा आकलन, हृदय रोग के ज्योतिषीय कारण, क्या है पूजा में आरती का महत्व, राजयोग तथा विपरीत राजयोग, चातुर्मास का माहात्म्य इत्यादि रोचक व ज्ञानवर्धक आलेखों के अतिरिक्त दक्षिणामूर्ति स्तोत्र, अंक ज्योतिष के रहस्य, सीमा का वहम नामक सत्यकथा, अर्जुन की शक्ति उपासना नामक पौराणिक कथा, कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लालकिताब के अचूक उपाय, भगवान श्री गणेश और उनका मूल मंत्र तथा जियोपैथिक स्ट्रेस व अन्य नकारात्मक ऊर्जाओं आदि विषयों पर भी विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.