भयभीत न हों अष्टम चंद्र से

अप्रैल 2009

व्यूस: 33265

अष्टम चंद्र यानि जन्म कुंडली में आठवें भाव में स्थित चंद्र। आठवां भाव यानि छिद्र भाव, मृत्यु स्थान, क्लेश'विघ्नादि का भाव। अतः आठवें भाव में स्थित चंद्र को लगभग सभी ज्योतिष ग्रंथों में अशुभ माना गया है और वह भी जीवन के लिए अशुभ। ज... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

विभिन्न लग्नों में सप्तम भावस्थ गुरु का प्रभाव एवं उपाय

अप्रैल 2013

व्यूस: 32939

पौराणिक कथाओं में गुरु को भृगु ऋषि का पुत्र बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सर्वाधिक शुभ ग्रह माना गया है। गुरु को अज्ञान दूर कर सदमार्ग की और ले जाने वाला कहा जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

मई 2014

व्यूस: 32191

प्रथम भाव केतु यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति रोगी, चिन्ताग्रस्त, कमजोर, भयानक पशुओं से परेशान तथा पीठ के कष्ट का भागी होता है। वह अपने द्वारा पैदा की गई समस्याओं से लड़ने वाला, लोभी, कंजूस तथा गलत लोगों का चयन करने के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकराशि

राहु: शुभ अथवा अशुभ

मार्च 2013

व्यूस: 30857

ज्योतिष की दृष्टि से हमारे जीवन में घटित होने वाली शुभ या अशुभ प्रत्येक घटना नव ग्रहों पर ही आधारित होती है और नवग्रहों में ही राहु का नाम विशेष चर्चा में रहता है। जन्मकुंडली में राहु का नाम सुनते ही व्यक्ति अनिष्ट की आशंका करने ल... और पढ़ें

ज्योतिषउपायदशाघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकटोटके

ज्योतिष द्वारा संतान योग कैसे जानें

अप्रैल 2012

व्यूस: 27144

आजकल हर मनुष्य चाहता है हमारे पास सभ्य संतान हों जो माता पिता की सेवा करें एवं कुल का नाम रोशन करें, हर मानव का सपना होता है कि उसकी संतान तेजस्वी एवं गुणों से संपन्न होगी। इसके लिए वह हर संभव प्रयास करता है, पढ़ाता है अच्छी उच्च श... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगबाल-बच्चेकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

विवाह के समय ध्यान रखने योग्य बातें

अकतूबर 2013

व्यूस: 25066

हिंदू धर्म शास्त्रों में हमारे सोलह संस्कार बताए गए हैं। इन संस्कारों में काफी महत्वपूर्ण विवाह संस्कार है। शादी को व्यक्ति का दूसरा जन्म भी माना जाता है क्योंकि इसके बाद वर-वधू सहित दोनों के परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल जाता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टकवर्ग से फलकथन

अकतूबर 2013

व्यूस: 24188

ज्योतिष शास्त्र में फलित करने की प्रायः तीन विधियां प्रचलन में रहती हैं - जन्म कुंडली, चन्द्र कुंडली तथा नवांश कुंडली। लग्न से शरीर का विचार होता है, चंद्रमा से मन का। जन्म पत्रिका में चंद्रमा से मन की स्थिति देखकर यह निश्चय किया ... और पढ़ें

ज्योतिषअष्टकवर्गकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

सुदर्शन चक्र कुंडली एक अध्ययन

जुलाई 2011

व्यूस: 23746

किसी भी कुंडली का फलकथन राशि, लग्न एवं ग्रह दशा को ध्यान में रखकर किया जाता है। जन्म नक्षत्र ज्योतिषीय शास्त्र में वह केंद्र बिंदु है जिसके चारों तरफ जातक की जीवन गति चलती रहती है। सटीक फलकथन करने के लिए जन्म नक्षत्र विचार करना पर... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

कैसे जानें बंधन दोष

अकतूबर 2010

व्यूस: 23507

मंगलवार को 3 किलो पालक, सूर्यास्त से पहले, ला कर घर में किसी परात आदि में रख दें। बुधवार के दिन प्रातः, पालक किसी थैले में रख कर, घर से बाहर जा कर, किसी गाय को खिला दें। यदि गाय पालक सूंघ कर छोड़ दे, या थोड़ा खा कर छोड़ दे, तो समझें ... और पढ़ें

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अष्टम भाव का राजयोग

अकतूबर 2007

व्यूस: 21803

अष्टम भाव का राजयोग

आचार्य किशोर

वर्तमान समय में हमारे भारत के प्रधानमंत्री के लग्न से अष्टम भाव में चंद्र, शुक्र व मंगल का होना यह सूचित करता है कि अष्टम भाव में स्थित ग्रहों का शुभ फल भी मिलता है। प्रधानमंत्री बनने से पहले मनमोहन सिंह जी रिजर्व बैंक में गर्वनर ... और पढ़ें

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