वास्तु एवं रंग समायोजन

वास्तु एवं रंग समायोजन  

व्यूस : 14040 | दिसम्बर 2008
वास्तु एवं रंग समायोजन प्रिया अरोड़ा, डा. भगवान सहाय श्रीवास्तव रंगों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। हमारी हर भावना किसी न किसी रंग से जुड़ी होती है। न केवल मनुष्य बल्कि हर जीवधारी रंगों से प्रभावित होता है। सीमेंट और्र इंटों से बना मकान भी तब तक सुंदर नहीं लगता, जब तक उसे सुंदर रंगों से अलंकृत न किया जाए। रंग सबको आकर्षित करते हैं, शायद इसीलिए फूल, तितलियां और इंद्रधनुष आदि हमारे जीवन में जीवंतता और प्रसन्नता लाते हैं। रंगों का वास्तुशास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान है। यदि रंगों का उचित प्रयोग किया जाए तो घर में एक सकारात्मक वातावरण बन सकता है। रंगों के प्रयोग से हम घर के वास्तु दोष को भी दूर कर सकते हैं। विभिन्न रंगों को वास्तु के विभिन्न तत्वों का प्रतीक माना जाता है। नीला रंग को जल का, भूरा पृथ्वी का और लाल अग्नि का प्रतीक है। फेंग शुई में भी रंगों को पांच तत्वों जल, अग्नि, धातु, पृथ्वी और काष्ठ से जोड़ा गया है। पांचों तत्वों को अलग-अलग शाखाओं के रूप में जाना जाता है। इन शाखाओं को मुख्यतः दो प्रकारों से बांटा जा सकता है- दिशा आधारित शाखाएं प्रवेश आधारित शाखाएं दिशा आधारित शाखाओं में उŸार दिशा हेतु जल तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले रंग नीले और काले माने गए हैं। दक्षिण दिशा हेतु अग्नि तत्व का प्रतिनिधि काष्ठ तत्व है जिसका रंग हरा और बैंगनी है। प्रवेश आधारित शाखा में प्रवेश सदा उत्तर से ही माना जाता है, भले ही वास्तविक प्रवेश कहीं से भी हो। इसलिए लोग दुविधा में पड़ जाते हैं कि रंगों का चयन वास्तु के अनुसार करें या फेंग शुई के अनुसार। यदि फेंग शुई का पालन करना हो, तो दुविधा पैदा होती है कि रंग का दिशा के अनुसार चयन करें या प्रवेश द्वार के आधार पर। दुविधा से बचने के लिए वास्तु और रंग-चिकित्सा की विधि या पद्धति के आधार पर रंगों का चयन करना चाहिए। रंग चिकित्सा पद्धति का उपयोग किसी कक्ष के विशेष उदद्ेश्य और कक्ष की दिशा पर निर्भर करती है। रंग चिकित्सा पद्धति का आधार सूर्य के प्रकाश के सात रंग हैं। इन रंगों में बहुत सी बीमारियों को दूर करने की शक्ति होती है। इस दृष्टिकोण से उŸार पूर्वी कक्ष, जिसे घर का सबसे पवित्र कक्ष माना जाता है, में सफेद या बैंगनी रंग का प्रयोग करना चाहिए। इस कक्ष के लिए अन्य गाढ़े रंगों का प्रयोग कतई नहीं करना चाहिए। दक्षिण पूर्वी कक्ष में पीले या नारंगी रंग का प्रयोग करना चाहिए, जबकि दक्षिण पश्चिमी कक्ष में भूरे, आॅफ ह्नाइट अर्थात् भूरा या पीला रंग मिश्रित सफेद रंग या पांच रंगों का प्रयोग करना चाहिए। यदि बिस्तर दक्षिण-पूर्वी दिशा में हो, तो कमरे में हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए। उŸार पश्चिमी कक्ष के लिए सफेद रंग को छोड़कर कोई भी रंग चुन सकते हैं। अलग-अलग रंगों के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव होते हैं, जैसा कि तालिका में दिखाया गया है। एक बेहतर और संतुलित व्यक्तित्व पाने के लिए घर व कार्यालय में विभिन्न रंगों का बेहतर प्रयोग किया जा सकता है, ताकि हमारा जीवन आनंदमय और रंगीन हो सके। फेंगशुई के सिद्धांत के अनुसार ‘ची’ के प्रवाह में रंगों का विशेष महत्व है। प्रत्येक रंग किसी न किसी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। फेंगशुई के अनुसार भवन, भवन के कक्षों, दुकान, शोरूम तथा व्यावसायिक स्थलों में शुभ रंगों का प्रयोग व्यक्ति व उसके व्यवसाय की सफलता में सहायक होता है। भवन या व्यावसायिक स्थल के लिए शुभ रंग का निर्धारण दो तत्वों के आधार पर किया जा सकता है। गृहस्वामी की राशि के तत्व या जन्म वर्ष के तत्व से। भवन के लिए उपलब्ध भूमि के तत्व से। रंगों का प्रयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि विपरीत रंगों का प्रयोग न किया जाए। मिश्रित रंगों के प्रयोग के समय भी यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वह मिश्रण प्रतिकूल तत्व की आभा से मुक्त हो। भवन के विभिन्न कक्षों के लिए शुभ रंग मुख्य शयन कक्ष- आसमानी, गुलाबी, हल्का हरा। अन्य कक्ष- श्वेत, हरा, नीला। ड्राइंग रूम- गुलाबी, क्रीम, श्वेत, भूरा। भोजन कक्ष- गुलाबी, आसमानी, हल्का हरा। अध्ययन कक्ष- गुलाबी, आसमानी, भूरा, हल्का हरा। रसोई घर- लाल, गुलाबी, नारंगी। शौचालय एवं स्नान गृह- श्वेत, गुलाबी। विभिन्न व्यवसाय से जुड़े स्थलों के लिए शुभ रंग- ज्योतिष, वास्तु और अध्यात्म के लिए नीला, हल्का हरा। पूजा पाठ, पौराणिक, पारंपरिक सामानों के लिए- काला, सिलेटी, पीला, हल्का आसमानी। पुस्तकों या स्टेशनरी की दुकान, स्कूल, कालेज, लाइब्रेरी- हल्का पीला, भूरा, आसमानी, हल्का हरा, वाष्पीय। धातु के सामान की दुकान या फैक्ट्री के लिए- पीला, सुनहरा, क्रीम, पीलापन लिए लाल, हल्का लाल रंग आदि। खिलौनों और किराने की दुकान के लिए- आसमानी, हल्का गुलाबी, सफेद, पीला। लकड़ी के फर्नीचर और हार्डवेयर की दुकान के लिए- पीला, भूरा, क्रीम, हल्का हरा आदि। पत्थर के सामान, मूर्ति, चीनी के कारोबार के स्थल के लिए- पीला, क्रीम, हल्का, भूरा, कत्थई आदि। वस्त्रों की फैक्ट्री, वस्त्र की दुकान- पीला, आसमानी, हल्का हरा, सिलेटी। आभूषण की दुकान- क्रीम, गुलाबी, आसमानी, सफेद। कम्प्यूटर व इंटरनेट के संस्थान- हल्का हरा, सफेद व सभी हल्के रंग। चिकित्सालय- सफेद, हल्का हरा। जूते, चप्पल, चमड़े आदि के उद्योग- भूरा, नारंगी, हल्का काला, कालापन लिए पीलारंग। होटल, रेस्टोरेंट, फास्टफूड शाॅप, बेकरी- पीला, भूरा, मटमैला, रूपहला आदि। बैंक, शेयर कार्यालय, वकील का कार्यालय- सफेद, नीला, काला। सीव्म् एव्म्, सलाहकार, एजेंट आदि का कार्यालय- क्रीम, सफेद, हरा। इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्राॅनिक सामानों की दुकान-गुलाबी, आसमानी, हल्का हरा, लाल सफेद आदि। ब्यूटी पार्लर, सौंदर्य प्रसाधन के सामानों की दुकान- सफेद, आसमानी, पीला, क्रीम। भवन निर्माता, कोलोनाइजर आदि का आॅफिस- हरा या सफेद। गिफ्ट व ट्वाय शाॅप- सफेद, पीला, आसमानी, नीला, हल्का गुलाबी आदि। चाय की दुकान, बीयर शाॅप, बार, जूस शाॅप- पानी का रंग, सिलेटी आदि। दवाघर, दवाओं का शोरूम- गुलाबी, सफेद, आसमानी। सिनेमा हाॅल, वीडियो लायब्रेरी, नृत्यशाला- सिलेटी, ब्राउन, नारंगी, पीला, बैंगनी आदि। गैरेज, पार्किंग, आरामघर- सफेद, आसमानी, नीला, काला, मटमैला आदि। वस्तुतः व्यवसाय की प्रकृति के अनुरूप ही रंगों का चयन करना चाहिए। कुछ अन्य सुझाव: सफेद रंग को आवश्यकतानुसार कहीं भी समायोजित किया जा सकता है। भूमि, व्यक्ति, व्यवसाय- इनके तत्वों के समीकरणों के आधार पर रंगों का चयन करना चाहिए। भारत में दक्षिणमुखी भवन के लिए हरा, समुद्री हरा, या जल के रंग का प्रयोग करना चाहिए। दिशाएं, रंग, ग्रह और उनके अधिष्ठाता दिशाएं रंग ग्रह अधिष्ठाता उत्तर हरा, पीला, भूरा बुध कुबेर पूर्व लाल, पीला, नारंगी सूर्य इंद्र दक्षिण लाल, काला, गहरे रंग मंगल यम पश्चिम गहरा नीला, सलेटी शनि वरुण उत्तर-पूर्व पीला, नारंगी, सुनहरा बृहस्पति शिव (ईश) दक्षिण-पूर्व हलका नीला और गुलाबी शुक्र अग्नि उत्तर-पश्चिम सफेद, हलका हरा और गुलाबी चंद्र वायु दक्षिण-पश्चिम हलके रंग, नारंगी, पीला या सुनहरा राहु/केतु निरुति

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2008

वास्तु के विविध नियम एवं सिद्धांत, धर्मग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों में वास्तु की चर्चा, मानव जीवन में वास्तु के उपयोग, ज्योतिष और वास्तु, विभिन्न प्रकार के घर, फ्लैट, कोठी, कालोनी, धर्मस्था, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, व्यवसायिक परिसर आदि का वास्तु के नियमानुकूल निर्माण

सब्सक्राइब


.