वास्तु दोषों को दूर करे फेंगशुई

वास्तु दोषों को दूर करे फेंगशुई  

वास्तु दोषों को दूर करे फेंगशुई फेगशुई चीन की एक विद्या है तो पिरामिड मिस्र की देन है। ये दोनों ही मानव कल्याण के लिए हैं। फेंगशुई दो शब्द-फेंग और शुई से मिलकर बनी है। यह चीन की वास्तु शास्त्रीय पद्धति है। चीनी भाषा में फंेग का अर्थ है जल और शुई का अर्थ है वायु। यह विज्ञान हमें बताता है कि हम अपने आस-पास की वस्तुओं को आकार, रंग, तत्व, ग्रह और अंकों के अनुसार किस दिशा में रख सकते हैं। फेंगशुई के आधार पर किया गया संशोधन किसी भी आम मनुष्य के भाग्य को ठीक करने का सबसे सरल इलाज है। इसे भाग्य का त्रित्व कहते हंै। भाग्य तीन प्रकार का होता है - 1.पृथ्वी से प्राप्त भाग्य, 2. मनुष्य का अपने द्वारा प्राप्त किया गया भाग्य और 3. स्वर्ग द्वारा प्राप्त किया गया भाग्य। प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी सामथ्र्य के अनुसार पूरी शक्ति के साथ काम करता है। फेंगशुई में जिस पद्धति का सर्वाधिक उपयोग होता है वह है कम्पास पद्धति जो मुख्य रूप से लो-शु (चमत्कार वर्ग) पा-कुआ चैखट पर आधारित है। फेंगशुई के उपयोग से हम अपने फ्लैट को घर की अनुभूति दे सकते हंै तथा उसे सामंजस्यपूर्ण बना कर स्वयं को पहले से ज्यादा प्रसन्न, स्वस्थ तथा जीवन के प्रत्येक पक्ष को ज्यादा सफल बना सकते हैं। चीन के अधिकांश महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण फेंगशुई के सिद्धान्तों के अनुसार किया गया है। फेंगशुई की उपयोगी वस्तुएं बागुआ: इसको मुख्य शयन कक्ष के द्वार पर बाहर की ओर लगाना चाहिए। कार्यालय के द्वार पर भी लगा सकते हैं। इसे लगाने से नकारात्मक ऊर्जा भवन व कक्ष में नहीं आती। पाकुआ: मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का द्वार वेध या अशुभ स्थान होने पर इसे द्वार से ऊपर बाहर लगाया जाता है जिससे नकारात्मक ऊर्जा अन्दर नहीं आती। क्रिस्टल बाॅल: क्रिस्टल ऊर्जा वर्धक होते हैं। पूर्व दिशा में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। उत्तर पश्चिम दिशा में लगाने से परिवार में आपसी प्रेम बढ़ता है। पश्चिम में लगाने से संतान सुख व दक्षिण पश्चिम में लगाने से दाम्पत्य सम्बन्धों में सुधार होता है। विंड चाईम: विंड चाईम अर्थात् हवा से जिसमें झंकार हो, ऐसी पवन घंटी घर व व्यापार के वातावरण को मधुर बनाती है। वास्तु और फेंगशुई के पाँच तत्वों को दर्शाने वाली पाँच राॅड की विंड चाईम शुभ मानी जाती है। ब्रह्म स्थान पर लगाने से स्वास्थ्य लाभ व उत्तर पश्चिम में लगाने से जीवन में नये सुअवसर प्राप्त होते हैं। लाफिंग बुद्धा: हंसते हुए बुद्ध की मूर्ति धन दौलत के देवताओं में से एक मानी जाती है। इससे घर में संपन्नता, सफलता और समृद्धि आती है। यह मूर्ति शयन कक्ष तथा भोजन कक्ष में नहीं रखनी चाहिए। तीन टांग का मेंढक: मुंह में सिक्का लिए तीन टांग का मेंढक भी इस प्रकार ही लगाना चाहिए जिससे यह लगे कि यह धन लेकर घर के अंदर आ रहा है। इसे रसोई या शौचालय में कभी नहीं रखना चाहिए। धातु का कछुआ: यह आयु को बढ़ाने वाला व धन समृद्धि देने वाला है। इसे भगवान विष्णु का कच्छप अवतार माना गया है। ल व बडर््स: पति-पत्नी के आपसी सम्बन्धों को मधुर बनाने के लिए शयन कक्ष में लगाया जाता है। मेनडेरियन डक: कुंवारे लड़के या लड़की की शादी के लिए मेनडेरियन डक का जोड़ा उस लड़के या लड़की के कमरे के दक्षिण पश्चिम भाग में ल ग व ा य ा जाता है, िज स स े उसकी शादी जल्दी हो जाए। एजुकेशन टावर: विद्यार्थियों को सामने रख कर पढ़ने से पढाई में ध्यान एकाग्रचित होता है। इच्छा शक्ति व तर्क शक्ति में वृद्धि होती है। अधिक पढ़ने की प्रेरणा मिलती है। दोहरा खुशी संकेत ः इस चिन्ह को घर के दक्षिण पश्चिम में लगाने से घर में खुशियों के मौके बढ़ते हैं। विवाह य ा े ग् य लड़के-लड़कियों की शादी हो जाती है। मिस्टिक नाॅट सिम्बलः रहस्यमय गांठ अर्थात् जिसका न प्रारंभ पता है न अंत। इस चिन्ह को घर व आफिस की उत्तर दिशा में लगाने से धन व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। एनीमल सेटः इसे ड्राईंग रूम की चारों दिशाओं में लगाया जाता है। ड्रैगन पूर्वी दीवार पर, टाईगर पश्चिमी दीवार पर, फिनिक्स दक्षिणी दीवार पर तथा कछुआ उत्तर की दीवार पर लगाया जाता है। इसे लगाने से व्यक्ति की चहुँमुखी उन्नति होती है। भाग्यशाली सिक्के: तीन भाग्यशाली चीनी सिक्के घर के मुख्य द्वार के अन्दर के हैंडल पर बाँधे जाते है। इसे लगाने से घर में धन की वृद्धि होती है। परिवार के सभी सदस्य इससे लाभान्वित होते है। इन्हें पर्स में रखने से जेब में धन की वृद्धि होती है। रत्नों का पेड़: घर में सुख, शांति व धन को बढ़ाने के लिए इसे घर में लगाया जाता है। हरे रंग का पेड़ उत्तर दिशा में तथा मिश्रित रंगों का पेड़ दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए। बांसुरी: बीम के प्रभाव को कम करने के लिए बाँसुरियों पर लाल रिबन लपेट कर बीम के साथ इस प्रकार लटकाते हैं कि बाँसुरी का मुँह नीचे की ओर रहे और आपस में त्रिकोण बनाएं। सुनहरी मछली: सुनहरी मछली धन और समृद्धि की वृद्धि करती है। इनको घर की उत्तर दिशा में पूर्व की ओर मुँह करके लगाना चाहिए। ड्रैगन के मुँह वाली बोट: संयुक्त परिवार को एकजुट बनाये रखने के लिए इसको घर के दक्षिणी पश्चिमी कोने में रखना चाहिए। क्रिस्टल ग्लोब: क्रिस्टल ग्लोब ।।।। अआाववररण्णा ककथ्थाा ।।।। को घर या व्यापारिक स्थल पर इस प्रकार रखना चाहिए कि यह आपके सामने रहे और दिन में कम से कम तीन बार इसे घुमाना चाहिए। यह कैरियर व व्यापार की सफलता में सहायक सिद्ध होगा। झाड़-फानूस- ’ची’: घर में दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व से सम्बन्ध रखता है। यह विवाह एवं आपसी सम्बन्धों से जुड़ा है। प्रतिदिन दो घन्टे शाम के समय जला कर रखने से परिवार के सदस्यों में मेल-जोल की भावना बलवती होगी और साथ ही साथ अविवाहित व्यक्तियों के विवाह होने की सम्भावनाएं भी बढ़ेंगी। पवन घंटी: यह मुख्य दरवाजे के पास लटकायी जाती है। बैठक, या कार्यालय में लगाने से यह समृद्धि प्रदान करती है। इसकी पवित्र ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को कम कर के सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है। मंत्रों की ध्वनि और पवित्र धुन से वास्तु दोष नष्ट हो कर सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। पवन घंटी हर क्षेत्र में नहीं लटकानी चाहिए। इनके लटकाने का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। फीनिक्स: फेंगशुई के अनुसार यह इच्छा पूरी होने वाले भाग्य का प्रतीक है। भाग्य को क्रियाशील करने के लिए फीनिक्स के प्रतीक के रूप में उसके चित्र या पेन्टिंग दक्षिण कोने में लगाएं। फुक, लुक और साउ: ये क्रमशः स म ृ िद्ध , उच्च श्रेणी ए व ं दीघार्यु के देवता हैं। इनकी उपस्थिति केवल प्रतीकात्मक होती है, इनकी पूजा नहीं की जाती है। घर में इनकी उपस्थिति अत्यन्त भाग्यशाली मानी गई है। फुक समृद्धि के देवता हैं, वे अन्य दोनों देवताओं से कद में ऊँचे हैं। आम तौर पर उन्हें बीच में रखा जाता है। फुक, लुक, साउ तीनों मिलकर अत्यन्त महत्वपूर्ण सौभाग्य का प्रतिनिधित्व करते हंै। इनकी उपस्थिति समृद्धि, प्रभुत्व, सम्मान, दीर्घायु एवं अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है। ड्रैगन: ड्रैगन उत्तम यांग ऊर्जा का प्रतीक है। इसका सम्बन्ध पूर्व दिशा से जुड़ा हुआ है। इस दिशा का तत्व काष्ठ है। इसलिए लकड़ी की नक्काशी वाला ड्रैगन अच्छा रहता है। मिट्टी व स्फटिक से बना हुआ भी रख सकते हैं, परन्तु धातु का कभी मत रखें क्योंकि पूर्व दिशा में धातु काष्ठ को नष्ट कर देती है। डेैªैगन यांग ऊर्जा का प्रतीक होने के कारण रेस्टोरेन्ट, दुकानें, डिपार्टमेन्टल स्टोर्स जहां पर ऊर्जा की अधिक आवश्यकता होती है, लोगों का आना-जाना अधिक रहता है, वहां पर भी पूर्व दिशा में चित्र रखना बहुत अच्छा होता है। इसे शयनकक्ष में न लगाएं क्योंकि वहां यांग ऊर्जा की जरूरत नहीं होती है। फेंगशुई के टिप्स घर में कैक्टस के पौधे ना रखें। कैक्टस का पौधा नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करता है। सूखे हुए फूल नकारात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें मुरझाते ही फेंक दें। ताजे फूल सौभाग्यवर्द्धक होते हैं। बंद पड़ी घड़ियां नकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक होती है, इन्हें तुरंत ठीक कराएं। घर में हिंसात्मक दृश्य ना लगवाएं। घर के सदस्य तनाव में रहते हैं। रात को बाहर कपड़े सुखाने से नकारात्मक ची पहननेवाले के मन पर बुरा प्रभाव डालती है। शौचालय का दरवाजा खुला नहीं रखना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। दरवाजें के ऊपर कैलेंडर अथवा घड़ी ना लगाएं। यह आयु को प्रभावित करता है। कैश बाॅक्स, बैंक पास बुक, कैश रजिस्टर पर 3 फेंगशुई सिक्के चिपकाने से आय में वृद्धि होती है। लाल धागे में बंधे 3 फेंगशुई सिक्के एवं 3 छोटी घंटियां दरवाजे में लटकाने से समृद्धि आती है, पर ये उन दरवाजों के पीछे नहीं लगाने चाहिए, जो बाहर की ओर खुलते हैं। मुंह में सिक्का लिए 3 टांगोंवाला मेढ़क घर में इस तरह रखें कि लगे वह घर में प्रवेश कर रहा है। इससे प्रतीत होता है कि मेढ़क घर में धन ला रहा है। यदि इसका मुंह बाहर की तरफ कर दें, तो प्रभाव उल्टा हो जाएगा। इसे ड्राइंगरूम में रखना शुभ है। शौचालय में नहीं रखना चाहिए। सौभाग्य वृद्धि के लिए घर में ड्रैगन रखें। इसे ड्राइंगरूम में लगाते हैं, पर इसे शयनकक्ष में नहीं रखना चाहिए। ड्रैगन के मुंहवाला यान घर में रखें। यह इस बात का प्रतीक है कि हमारा परिवार लंबे समय तक सुख समृद्धि से चलता रहेगा। धन-समृद्धि के लिए घर में कैश-ज्वैलरी रखने की जगह पर सोने की नाव रखें। इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखते हैं। कैरियर, एजुकेशन तथा व्यापार में सफलता के लिए क्रिस्टल ग्लोब कमरे में रखें। इसे दिन में 3 बार घुमाएं। इससे ग्लोब से निकली सकारात्मक ऊर्जा पूरे क्षेत्र में फैल जाती है। प्रयोग से पहले इस ग्लोब को स्टैंड से उतार कर नमक के पानी में धो कर कांच की बरतन में रख कर 2-3 घंटे सुबह की धूप में रखते हैं। पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में धातु से बने सिक्कों का कटोरा या पौधा रखने से मित्रों की संख्या बढ़ती है। पति-पत्नी के शयनकक्ष में लव बर्ड लगाने से उनके बीच रोमानी संबंध बने रहते हैं। लव बर्ड खरीदते समय ध्यान रखें कि उसमें 2 ही परिंदे हों। जिन बच्चों का पढ़ाई में मन ना लगता हो, उनके स्टडी टेबल पर एजुकेशन टाॅवर रखने से लाभ मिलता है। इसे उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। चीन में चांद को विवाह का देवता मानते हैं। पूर्णिमा के दिन अविवाहित कन्या को 1 संतरा नहर, नदी या समुद्र में प्रवाहित करना चाहिए। मान्यता के अनुसार वायु और जल के देवता कन्या का संदेश चंद्रमा तक पहुंचा देते हैं, जिससे कन्या को जल्द ही मनचाहा वर मिल जाता है। चांद की रोशनी या चंद्रमा का चित्र भी अविवाहित कन्याओं के कमरे में लगाने से उन्हें योग्य वर मिलता है। 2 लोगों के बीच रिश्ते की गरमाहट बरकरार रखने के लिए 2 डाॅल्फिन का चित्र लगाएं। अगर आप बिजनेस पार्टनरशिप में हैं, तो भी डाॅल्फिन का चित्र लगा सकते हैं। चील सुरक्षा की प्रतीक है। इसकी मूर्ति घर में रखने से बीमारियों तथा दुश्मनों से रक्षा होती है। मछलियां संपत्ति और समृद्धि दिलाती हैं। इसलिए छोटी मछली की मूर्ति घर के संपत्ति क्षेत्र में रखें। इसे दक्षिण-पूर्व या उत्तर दिशा में रखते हैं।



वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2008

वास्तु के विविध नियम एवं सिद्धांत, धर्मग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों में वास्तु की चर्चा, मानव जीवन में वास्तु के उपयोग, ज्योतिष और वास्तु, विभिन्न प्रकार के घर, फ्लैट, कोठी, कालोनी, धर्मस्था, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, व्यवसायिक परिसर आदि का वास्तु के नियमानुकूल निर्माण

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.