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वास्तु सम्मत फ्लैट का चुनाव कैसे करें

वास्तु सम्मत फ्लैट का चुनाव कैसे करें  

वास्तु सम्मत फ्लैट का चुनाव कैसे करें? कुलदीप सलूजा हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि छोटा ही सही, उसका अपना एक घर हो। शहरों व महानगरों की बढ़ती आबादी के कारण भूमि की उपलब्धता कम होती जा रही है। इस कारण जमीन-जायदाद की कीमतें आसमान छू रही हैं। अच्छे लाभ के लिए कई बिल्डर भूखंड के एक-एक इंच का उपयोग कर लेना चाहते हैं। इसी कारण बहुमंजिली इमारतों के निर्माण में वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों का पालन नहीं हो पाता। वास्तुदोष युक्त किसी बहुमंजिली इमारत में जब कोई व्यक्ति बड़े उत्साह व उमंगों के साथ जीवन भर की कमाई से फ्लैट खरीदकर रहने आता है तो वहां उसके जीवन में अनेक समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसी किसी स्थिति से बचने के कुलदीप सलूजा लिए कोई व्यक्ति फ्लैट खरीदते समय वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों का ध्यान रखे तो सुखमय जीवन व्यतीत करते हुए खूब तरक्की कर सकता है। यहां कुछ विशिष्ट वास्तु नियमों का विवरण प्रस्तुत है जिन्हें अपनाकर भवन निर्माण करने से व्यक्ति का जीवन सुखमय हो सकता है। भवन के लिए भूखंड वर्गाकार या आयताकार होना चाहिए। साथ ही उŸार व पूर्व दिशाओं में ज्यादा खुली जगह होनी चाहिए। वैसे आजकल ज्यादातर फ्लैट अनियमित आकार के भूखंड पर बनते हैं, इसलिए वास्तु के अनुकूल फ्लैट ढूंढना कठिन हो गया है। बड़े अस्पताल, श्मशान, कब्रिस्तान, बूचड़खाना आदि के आस-पास फ्लैट न खरीदें, क्योंकि वहां से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा आसपास रहने वालों को प्रभावित करती है। चारों दिशाओं एवं चारों कोणों में ईशान कोण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फ्लैट खरीदते समय इस कोण की वास्तु संबंधी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। ईशान कोण का कटा, घटा और गोल होना अशुभ किंतु बड़ा होना शुभ होता है। ऐसी बहुमंजिली इमारत में फ्लैट खरीदनी चाहिए जिसके उत्तर या पूर्व दिशा अथवा ईशान कोण में भूमिगत पानी की टंकी, कूप, नलकूप या तरणताल हो। अन्य किसी भी दिशा या कोण में जल के स्रोत का होना अशुभ होता है। ओवर हेड वाटर टैंक वायव्य कोण, पश्चिम या र्नैत्य कोण में बनाया जा सकता है। बहुमंजिली इमारत की चारदीवारी उŸार की तुलना में दक्षिण और पूर्व की तुलना में पश्चिम की ओर अधिक ऊंची होनी चाहिए। सेप्टिक टैंक मध्य पूर्व में होना चाहिए। जेनरेटर का कमरा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) क्षेत्र में होना चाहिए। यदि अंडरग्राउंड कार पार्किंग की जरूरत हो तो इसे बेसमेंट में उŸार, ईशान या पूर्व की ओर होना चाहिए। इसके दक्षिण, पश्चिम या र्नैत्य में होने से भंयकर विपŸिायों का सामना करना पड़ता है। बहुमंजिली इमारत का मुख्य द्वार और फ्लैट का दरवाजा दोनों पूर्व ईशान, दक्षिण आग्नेय, पश्चिम वायव्य या उŸार ईशान में कहीं भी हो सकते हैं। किंतु इन्हें पूर्व आग्नेय, दक्षिण र्नै त्य, पश्चिम र्नै त्य या उŸार वायव्य में नहीं होना चाहिए। बहुमंजिली इमारत का मुख्य द्वार एवं फ्लैट का दरवाजा दोनों को अवरोध रहित होना चाहिए। बहुमंजिली इमारत में ऊपर जाने की सीढ़ियां ईशान कोण में नहीं बल्कि दक्षिण या पश्चिम में क्लाॅकवाइज होनी चाहिए। ऐसा फ्लैट जो सीढ़ियों के एकदम सामने पड़ता हो, कभी न खरीदें। जिस बहुमंजिली इमारत की लिफ्ट का बेस भूखंड के मध्य, दक्षिण, र्नैत्य या पश्चिम में कहीं भी 7-8 फीट गड्ढा करके बनाया गया हो उसमें फ्लैट नहीं खरीदना चाहिए। बहुमंजिली इमारत में ग्राउंड फ्लोर पर रहने वालों पर वास्तु दोषों का पूरा प्रभाव पड़ता है। इन दोषों का प्रभाव ऊपर के फ्लोर पर रहने वालों पर क्रमशः नकारात्मक होता जाता है। ऐसी इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर रहना अशुभ होता है। फ्लैट ऐसा खरीदना चाहिए जो खुला और हवादार हो और जहां सुबह सूर्य का प्रकाश आता हो। फ्लैट में बालकनी उŸार, ईशान या पूर्व दिशा में होनी चाहिए, ताकि सूर्य से मिलने वाली जीवनदायी ऊर्जा का भरपूर लाभ मिल सके। रसोईघर फ्लैट के आग्नेय कोण में होना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो यह पश्चिम या उŸार दिशा में भी बनाया जा सकता है। खाना बनाने का प्लेटफाॅर्म इस प्रकार हो कि पकाने वाला व्यक्ति पूर्वमुखी रहे। रसोई में पानी की व्यवस्था उŸार या ईशान में होनी चाहिए। त्र बच्चों के पढ़ने का कमरा या ड्राइंग रूम फ्लैट के ईशान कोण में और डाइनिंग रूम पश्चिम में बनाना चाहिए। मास्टर बेडरूम र्नैत्य में होना चाहिए। अन्य शयनकक्ष दक्षिण, पश्चिम, उŸार व पूर्व में बनाए जा सकते हैं। फ्लैट का वायव्य कोण घर की कन्याओं एवं मेहमानों के कमरों के लिए शुभ होता है। नगद व आभूषण रखने वाली अलमारी उŸार में दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार से लगाकर रखनी चाहिए, इससे धन की हमेशा बरकत होती रहती है। फ्लैट के प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक, ¬, शुभ-लाभ आदि शुभ चिह्न लगाने चाहिए। बुरी नजर से बचने के लिए प्रवेशद्वार के ऊपर घोड़े की नाल भी लगा सकते हैं। प्रवेश द्वार पर फूलों का गुलदस्ता और ऊपर की तरफ पवन घंटियां लगाना भी शुभ होता है। इससे फ्लैट में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। फ्लैट में फोटो लगाना हो तो वह जोड़े का होना चाहिए। पशु-पक्षियों के उदासी भरे, रोते हुए बच्चे, डूबते हुए सूरज या जहाज, ठहरे हुए पानी आदि की तस्वीरें, पेंटिंग या मूर्तियां, सूखे फूल, जानवरों के सिर, खालें आदि नहीं लगाने चाहिए। ऐसी तस्वीरें जीवन में निराशा व तनाव पैदा करती हैं। शयनकक्ष में लव बर्ड या बतख के जोड़े का चित्र रखना शुभ होता है। जिस फ्लैट को कोई परिवार बहुत दुःखी एवं परेशान हो कर छोड़ गया हो, उसे न तो खरीदना चाहिए और न ही किराए पर लेना चाहिए।


वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2008

वास्तु के विविध नियम एवं सिद्धांत, धर्मग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों में वास्तु की चर्चा, मानव जीवन में वास्तु के उपयोग, ज्योतिष और वास्तु, विभिन्न प्रकार के घर, फ्लैट, कोठी, कालोनी, धर्मस्था, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, व्यवसायिक परिसर आदि का वास्तु के नियमानुकूल निर्माण

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