व्यावसायिक वास्तु के ४२ सूत्र

व्यावसायिक वास्तु के ४२ सूत्र  

व्यावसायिक वास्तु के 42 सूत्र 1. व्यापारिक संस्थान के मालिक को दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण पश्चिम (र्नैत्य) में इस प्रकार बैठना चाहिए कि उसका मुंह उत्तर या पूर्व की ओर हो। 2. दुकान व शोरूम में बिक्री का सभी सामान दक्षिण, पश्चिम एवं वायव्य में रखना चाहिए। 3. बिक्री काउन्टर पर खड़े सेल्समैन का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। 4. कैश कांउटर, मालिक या मैनेजर के स्थान के ऊपर कोई बीम नहीं होना चाहिए। 5. दुकान/शोरूम में भारी वस्तुएं या कम उपयोगी वस्तुए नैत्य में रखनी चाहिएं। 6. जो माल काफी दिनों से न बिक रहा हो उसे वायव्य कोण में रख दंे, शीघ्र बिक जाएगा। 7. मुख्य कार्यालय का प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व की ओर रखें। 8. कार्यालय में कैन्टीन आग्नेय कोण में ही बनानी चाहिए। 9. कार्यालय में खजांची व लेखा विभाग के कर्मचारियों को उत्तर दिशा में बिठाना चाहिए। 10. सभी केबिनों के द्वार अन्दर की ओर खुलने चाहिए। 11. स्वागत कक्ष प्रवेश द्वार के समीप होना चाहिए व स्वागत कर्ता का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर हो। 12. स्वागत कक्ष में उत्तर, पूर्व, ईशान की तरफ सजावटी पौधे व फूलों के गमले लगाए जा सकते हैं। 13. स्वीमिंग पूल उत्तर या पूर्व दिशा में बनाना चाहिए। 14. सीढ़ियों की संख्या विषम होना शुभ होता है। 15. सार्वजनिक सुविधाएँ भवन के र्नैत्य या पश्चिमी भाग में बनानी चाहिएं। 16. रेस्टोरेंट का डाइनिंग हाल पश्चिम में बनाना चाहिए। आवश्यकता होने पर दक्षिण व पूर्व में भी बनाया जा सकता है। 17. रेस्टोरेन्ट में रसोई आग्नेय में तथा वितरण काउन्टर वायव्य में बनाया जा सकता है। 18. अस्पताल व नर्सिंग होम में दक्षिण का द्वार नहीं बनाना चाहिए। 19. अस्पताल का आपातकालीन वार्ड वायव्य के समीप उत्तर में बनाना चाहिए। 20. अस्पताल में गहन चिकित्सा कक्ष (प्ण्ब्ण्न्ण्) वायव्य में बनाना चाहिए। 21. अस्पताल में प्रसूति वार्ड ईशान एवं पूर्व के बीच बनाना चाहिए। 22. अस्पताल में शल्य चिकित्सा विभाग पश्चिम में बनाना चाहिए। 23. र्नैत्य कोण में कोई वार्ड नहीं बनाना चाहिए। 24. रोगियों के कमरे दक्षिण में नहीं बनाने चाहिए। 25. रोगियों के सिर उत्तर दिशा में नहीं होने चाहिए। 26. मुर्दा घर या पोस्टमार्टम का कमरा दक्षिण में बनाया जा सकता है। 27. लिफ्ट उत्तर या पूर्व में बनायी जा सकती है। 28. अस्पताल में नर्सों का होस्टल वायव्य एवं उत्तर के बीच में और डाक्टरों का होस्टल पश्चिम में बनाना चाहिए। 29. सिनेमा हाल में पर्दा वायव्य या उत्तर में होना चाहिए। 30. क्लब में आउटडोर गेम्स के स्टेडियम पूर्व, उत्तर या पश्चिम में बनाने चाहिए। 31. क्लब में जिम्नेजियम पश्चिम में पूर्वमुखी बनाना चाहिए। 32. क्लब में मदिरालय पश्चिम में कभी नहीं बनाना चाहिए। 33. योगाभ्यास व ध्यान के कमरे ईशान या पूर्व में होने चाहिए। 34. विद्यालय में अध्यापन के कमरे पूर्व, उत्तर एवं पश्चिम में बनाने चाहिए। 35. पढ़ते समय विद्यार्थियों का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए। 36. विद्यालय में स्टाफ रूम वायव्य या उसके आसपास होना चाहिए। 37. दुकान में तराजू पश्चिम, दक्षिण या वायव्य में लगा सकते हैं। 38. बर्फखाने में बर्फ का संग्रह वायव्य में होना चाहिए। 39. ज्योतिष कार्यालय में ज्योतिषी के दाएं हाथ की तरफ पंचांग व पुस्तकंे होनी चाहिए। 40. केमिस्ट की दुकान में नैत्य में कोई दवाईयाँ नहीं रखनी चाहिए। 41. पीने का पानी ईशान कोण में रखना चाहिए। 42. तैयार माल के सेम्पल, बिक्री विभाग से सम्बन्धित अधिकारी व कर्मचारी वायव्य कोण में होने चाहिए।



वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2008

वास्तु के विविध नियम एवं सिद्धांत, धर्मग्रंथों, पौराणिक ग्रंथों में वास्तु की चर्चा, मानव जीवन में वास्तु के उपयोग, ज्योतिष और वास्तु, विभिन्न प्रकार के घर, फ्लैट, कोठी, कालोनी, धर्मस्था, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, व्यवसायिक परिसर आदि का वास्तु के नियमानुकूल निर्माण

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