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क्या कहते है सौरव के सितारे

क्या कहते है सौरव के सितारे  

क्या कहते हैं सौरव के सितारे? गुबंगाल के टाइगर सौरव के पास एक बार फिर अपने बल्ले से जौहर दिखाने का समय है। इस समय उनके सिर कप्तानी का भार न सही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अवश्य है। क्या वे 13 मार्च 2007 से होने वाले विश्वकप में खेल पाएंगे, भारतीय क्रिकेट टीम में उनका रुतबा कैसा रहेगा, प्रस्तुत है उसका ज्योतिषीय विश्लेषण... भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को एक लंबे समय के बाद टीम में वापसी मिली है। एक सफल कप्तान होने का श्रेय सौरव को जाता है लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम से जिस तरह उन्हें बाहर किया गया था उसके बाद वापसी की संभावनाएं नजर कम ही आ रही थीं। इस समय उनकी वापसी भारतीय क्रिकेट टीम की डूबती नाव की पतवार संभालने वाले नाविक के रूप में हुई है। क्या वे इस जिम्मेदारी को निभाने में सफल हो पाएंगे? उनकी कुंडली में स्थित सितारे उनका क्या भविष्य बताते हैं, आइए जानने का प्रयास करें। सौरव का लग्न सिंह है और शनि ने जैसे ही द्वादश भाव में कर्क राशि में प्रवेश किया, उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब शनि सिंह राशि में आ गया है तो वह पुनः मुख्य धारा में वापस आ गए हैं। लेकिन सभी के मन में एक प्रश्न है कि वह टीम में जगह बना पाएंगे या नहीं, एक दिवसीय मैच खेल पाएंगे या नहीं। 10 जनवरी को शनि दोबारा कर्क में आ जाएगा तो दोबारा अड़चनें पैदा हो सकती हैं इसलिए विश्व कप में उनका खेलना संदेहास्पद माना जा सकता है लेकिन जुलाई 2007 के बाद शनि के पुनः सिंह राशि में आते ही उनकी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। लेकिन चंद्रमा क्योंकि 150 से अधिक अंशों पर है अतः कुछ अड़चनों के उपरांत भी वह अब आगे बढ़ते जाएंगे और जुलाई के बाद उनके सितारे पूर्ण रूप से बुलंद होंगे।


गणपति विशेषांक   जनवरी 2007

भारतीय संस्कृति में भगवान गणेश का व्यक्तित्व अपने आप में अनूठा है. हाथी के मस्तक वाले, मूषक को अपना वाहन बनाने वाले गणेश प्रथम पूज्य क्यों हैं? उनकी आराधना के बिना कार्य निर्विध्न संपन्न होने में संदेह क्यों रहता है? कैसे हुआ

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