वास्तु के अनुसार औद्धोगिक परिसर

वास्तु के अनुसार औद्धोगिक परिसर  

वास्तु के अनुसार औद्योगिक परिसर प्रमोद कुमार सिन्हा प्र0-औद्योगिक परिसर की आंतरिक बनावट कैसी होनी चाहिए। उ0-औद्योगिक परिसर के दक्षिण और पश्चिम के तरफ की चारदीवारी 900 के कंक्रीट एवं पत्थर के बने होने चाहिए। उतर एवं पूर्व के ओर की चारदीवारी कंटीले तार से भी बनाई जा सकती है। इसका मुख्य कारण उतर एवं पूर्व क्षंेत्र को हल्का एवं खुला हुआ रखना है क्योंकि ईशान क्षेत्र को अवरूद्व या बंद रखने से कल कारखाने की प्रगति एवं समृद्वि रूक जाती है। आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाती है। भूखंड के मध्य स्थान अर्थात् ब्रह्म-स्थान को खुला रखना चाहिए। इस स्थान पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य करना वास्तु के दृष्टिकोण से निषिद्ध है। इसी तरह वायव्य कोण में भी किसी प्रकार का निर्माण कार्य कर इसे बंद नही करना चाहिए। इस क्षेत्र को बंद करने से विकास की गति रूक जाती है। फैक्ट्री में प्रवेश करने के लिए मुख्य द्वार पूर्व, ईशान, उतर में रखना श्रेष्ठ होता है। इसके अलावा पश्चिमी, वायव्य, पश्चिम-दक्षिणी आग्नेय एवं दक्षिण दिशा से भी रखा जा सकता है। फैक्ट्री की जमीन का ढाल हमेशा उतर या पूर्व की ओर रखें। इसी तरह औद्योगिक इकाइयों की मुख्य फैक्ट्री के भवन जहां उत्पादन होता है की छत का झुकाव भी उतर और पूर्व में रखना श्रेष्ठ होता है। इसके साथ ही भारी मशीन को दक्षिण से लेकर पश्चिम तक रखना श्रेष्ठ होता है। तैयार वस्तुओ को उŸार-पश्चिम अर्थात् वायव्य में रखना चाहिए । ट ª ा ॅ स फ ा र्म र , , बाॅयलर, जेनरेटर ,भट्ठी, की व्यवस्था दक्षिण-पूर्व में करना चाहिए । मालिक या व्यवस्थापक को दंिक्षण-पश्चिम एवं प्रशासकीय कक्ष को पूर्व की ओर रखना श्रेष्ठ होता है । पार्किग, लाॅन , फव्वारा या खुली जगह रखने के लियंे उŸार-पूर्व की दिशा श्रेष्ठ होती है। प्र0- औद्योगिक परिसर में सेप्टिक टैंक किस स्थान पर बनाना श्रेष्ठ होता है? उ0- औद्योगिक परिसर में सेप्टिक टैंक वायव्य क्षेत्र में बनाना लाभप्रद होता है। सेप्टिक टैंक भूखंड के ईशान क्षेत्र , नैत्य क्षेत्र, आग्नेय क्षेत्र और मध्य स्थान की ओर नहीं बनाएं। औद्योगिक परिसर के मध्य, ईशान और नैत्य में सेप्टिक टैंक पूर्णतः वर्जित है। यह पूरी व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर डालता है। प्रगति अवरूद्ध हो जाती है। प्र0- औद्योगिक परिसर के पश्चिम दक्षिण दिशा में तहखाना एवं तालाब बनाना चाहिए? उ0- किसी भी औद्योगिक परिसर के पश्चिम-दक्षिण दिशा में तहखाना एवं तालाब भूलकर भी नहीं बनाना चाहिए। अन्यथा फैक्ट्री विनाश की ओर चली जाती है। भाग्य में कमी तथा आपदाओं का सामना करते देखा गया है। साथ ही क्लेश, कर्ज, महापातकी एवं गरीबी पीछा नहीं छोडती। भाग्य सो जाता है तथा रोजी-रोटी के लिए मोहताज होने लगते है।अतः दक्षिण-पश्चिम में भूलकर भी तहखाने, तालाब ,गंदे पानी का जमाव या किसी भी प्रकार गढ्ढे न रखें। अन्यथा सारा परिश्रम एवं धन संग्रह खत्म हो जाएगा। प्र0- किसी भी फैक्ट्री के मुख्य द्वार के बाहर कचरा, गंदे पानी का कीचड़ या नाला होने से क्या प्रभाव पड़ता है? उ0- किसी भी फैक्ट्री के मुख्य द्वार के बाहर कचरा, गंदे पानी का कीचड़ या नाला नही होने चाहिए। यह उद्योग के संपन्नता को रोककर उद्योगपति को कर्जदार बना देता है। प्र0- औद्योगिक परिसर में वार्ताकक्ष मे भाग लेने वाले मुख्य व्यक्ति का चेहरा किस दिशा की ओर रखना श्रेष्ठ होता है। उ0- वार्ताकक्ष में भाग लेने वाले व्यक्तियों का मुख किसी भी दिशा में हो सकता है। लेकिन सबसे मुख्य व्यक्ति व मालिक का चेहरा हमेशा उतर या पूर्व की तरफ रखना लाभप्रद होता है। इससे मालिक वार्ताकक्ष में भाग लेने वाले व्यक्तियों पर अपना पूर्ण नियंत्रण एवं दबाव बनाये रखता है।



भूत-प्रेत, पितृदोष निवारण विशेषांक  सितम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के भूत प्रेत एवं पितृदोष निवारण विशेषांक में भूत प्रश्नोत्तरी, प्रतादि शक्तियों का रहस्य व प्रभाव, भूत प्रेत एक तार्किक विवेचन, ऋणानुबंधन पीड़ा निवारण, प्रेत कल्प अर्थात गडुड़ पुराण, ज्योतिष व प्रेत दोष, भूत प्रेतों की रहस्यमयी दुनियां, बालारिष्ट एवं भूत प्रेत बाधा, ऊपरी बाधा और ज्योतिषीय विनियोग, ऊपरी बाधा निवारण एवं हनुमान उपासना, भूत प्रेत बाधा होने पर क्या करें, पितृदोष रहस्य, पितृदोष कारण निवारण, भूत संबंधी अविस्मरणीय अनुभव, प्रेत बाधा निवारक ज्योतिषीय सामग्री, दिनमान एवं रात्रिमान में परिवर्तन क्यों, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, पिरामिड एवं वास्तु, हस्तरेखा विज्ञान, सत्यकथा, दाम्पत्य सुख के उपाय, सर्वोपयोगी कृपा यंत्र, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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