दाम्पत्य सुख के उपाय

दाम्पत्य सुख के उपाय  

व्यूस : 8149 | सितम्बर 2012
दाम्पत्य सुख के उपाय नूर चैधरी कई बार पति-पत्नी के बीच किसी भी बात को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाता है। जो कभी भी कलह का रूप ले लेता है और परिवार में अशांति का कारण बनने लगता है, ऐसे पति-पत्नी के बीच मधुर एवं पे्रेमपूर्ण संबंधों के लिए यहां पर कुछ उपायों की चर्चा की जा रही है जिनके माध्यम से पति-पत्नी के मध्य कटुता कम होकर प्रेम का संचार हो सके। यदि पति अपनी पत्नी को अधिक समय नहीं दे पाता है अथवा कोई अन्य कारण हो जिससे वह अपनी पत्नी से कम प्रेम करता हो, तो उसके लिए उस महिला को चाहिए कि पहले केले का पूजन और देव गुरु बृहस्पति की सेवा आराधना करे। उपाय आप शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार से आरंभ करें। गुरुवार को प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। एक तांबे के पात्र में जल में गुड़ व पिसी हल्दी मिला लें। एक नारियल, दो आटे के पेड़े, गीली चने की दाल व गुड़ लें। अब आप इस केले के वृक्ष के पास जाकर वृक्ष पर हल्दी से तिलक करें और शुद्ध घी का दीपक तथा अगरबŸाी अर्पित करें और देव गुरु से अपनी समस्या के निवारण की प्रार्थना करें। यथासंभव गुरु की कथा, 108 नाम अथवा स्तोत्र आदि का पाठ करें और जल अर्पित कर वापस आ जाएं। आटे के पेड़े व अन्य सामग्री गाय को खिला दें और नारियल को शुद्ध स्थान पर रख दें। आने वाले बुधवार को किसी शक्ति मंदिर में नारियल के साथ थोड़ा-सा सिंदूर व अन्य पूजा सामग्री लेकर जाएं। मां को दीपक, धूप अर्पित करने के बाद नारियल व सिंदूर माँ के चरणों में अर्पित कर दें। अपनी समस्या का निवेदन कर मां का कवच, चालीसा, 108 अथवा 32 नाम की माला का पाठ करें। पाठ के बाद नारियल किसी बच्चे से फुड़वा दें व सिंदूर लेकर घर आ जायें। अगले गुरुवार को पुनः यही क्रिया करें। बुधवार को भी यही क्रिया करनी है। इस प्रकार आपको तीन गुरुवार व तीन बुधवार यह करना है। अब आपने जो सिंदूर एकत्रित किया है उसे भोग भरने में प्रयोग करें। कुछ ही समय में आपको चमत्कारिक फल महसूस होंगे। उपाय जितने विश्वास से करेंगे, उतनी ही जल्दी आपको फल मिलेगा। किसी भी कृष्णपक्ष की अष्टमी अथवा चतुर्दशी को आप घर के पूजा स्थल में माँ दुर्गा को धूप, दीप अर्पित कर थोड़ा-सा सिंदूर, 12 लाल चूड़ियां और मंगल सूत्र के रूप में धागा अर्पित करें, अब माँ से सिर्फ इतनी प्रार्थना करें कि माँ, मैं तेरी पुत्री हूं और यह सामग्री मैं तेरे उपहार स्वरूप स्वीकार कर रही हूं जिससे तेरी कृपा और आशीर्वाद से मेरा दाम्पत्य जीवन सही सलामत रहे। इतना करने के पश्चात् प्रणाम कर मंदिर में थोड़े से सिंदूर से मांग भरें तथा मंगल सूत्र का धागा आौर चूड़ी धारण कर लें। पुनः प्रणाम कर मंदिर से बाहर आ जायें। बचे सिंदूर को आप अपने प्रयोग करने वाले सिंदूर में मिला लें। दाम्पत्य जीवन की किसी भी समस्या के लिए यह उपाय लाभकारी रहेगा। पहले गुरुवार को आप किसी चैराहे के पीपल पर जाये। शुद्ध घी का दीपक व चंदन की अगरबŸाी अर्पित कर एक पात्र में या दोने में तीन तरह की मिठाई अर्पित करें और प्रार्थना करंे कि मेरे दाम्पत्य जीवन में अमुक समस्या आ रही है। देवगुरु बृहस्पति और आपके आशीर्वाद से इस समस्या का निवारण होगा। इसलिए आपसे निवेदन है कि मेरी समस्या का निवारण करें। इसके लिए मैं साक्ष्य रूप से यह कील आपके समक्ष मिट्टी में दबा रही हूं। जब आपकी कृपा से मेरी समस्या का समाधान हो जायेगा, तब मैं यह कील निकालकर ले जाऊंगी। इतना कहकर एक बड़ी कील लेकर उसमें लाल धागा बांध दें और पीपल के समक्ष मिट्टी से दबा दें। जब आपकी समस्या का समाधान हो जाय तो कील निकालकर एक जटा नारियल के साथ जल में प्रवाहित कर दें। दाम्पत्य की सभी समस्याओं के निवारण के लिए आप नियमित रूप से केले और पीपल के वृक्ष की सेवा करें। गुरुवार को केले और पीपल में सामान्य जल और शुद्ध घी का दीपक और शनिवार को पीपल में सरसों के तेल का दीपक व मीठा जल अर्पित करें। ऐसा करने से कभी भी किसी भी प्रकार की समस्या आपके दाम्पत्य जीवन में नहीं आयेगी।

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भूत-प्रेत, पितृदोष निवारण विशेषांक  सितम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के भूत प्रेत एवं पितृदोष निवारण विशेषांक में भूत प्रश्नोत्तरी, प्रतादि शक्तियों का रहस्य व प्रभाव, भूत प्रेत एक तार्किक विवेचन, ऋणानुबंधन पीड़ा निवारण, प्रेत कल्प अर्थात गडुड़ पुराण, ज्योतिष व प्रेत दोष, भूत प्रेतों की रहस्यमयी दुनियां, बालारिष्ट एवं भूत प्रेत बाधा, ऊपरी बाधा और ज्योतिषीय विनियोग, ऊपरी बाधा निवारण एवं हनुमान उपासना, भूत प्रेत बाधा होने पर क्या करें, पितृदोष रहस्य, पितृदोष कारण निवारण, भूत संबंधी अविस्मरणीय अनुभव, प्रेत बाधा निवारक ज्योतिषीय सामग्री, दिनमान एवं रात्रिमान में परिवर्तन क्यों, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, पिरामिड एवं वास्तु, हस्तरेखा विज्ञान, सत्यकथा, दाम्पत्य सुख के उपाय, सर्वोपयोगी कृपा यंत्र, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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