शादी पहले-दूसरे दस से बारह, बुध-शुक्र जब बैठा हो । शनि मदद दे एक या दस से, साल शादी का होता हो । 1। व्याख्याः- वर्षफल के अनुसार जब शुक्र और बुध खाना नं. 1-2-10-11-12 में स्थित हों और लग्न या खाना नं. 10 से शनि सहायता दे रहा हो तो उस वर्ष विवाह का योग होता है। 1 . उ प र ा े क् त कुंडली में बुध-शुक्र लग्न अर्थात खाना नं. 1 में स्थित हैं एवं खाना नं. 10 में शनि है अतः यह ग्रह स्थिति जातक के विवाह का योग बनाती है। परंतु अगर यही ग्रह स्थिति जातक के विवाह के पश्चात बनती है तो उस वर्ष जातक को धन की आमद व सुख के साधन बढ़ेंगें। बुध-शुक्र घर सातवें बैठें, शत्रु तीन न ग्यारह हो। कुंडली जन्म घर वापस आते, वक्त शादी का होता हो। 2 । व्याख्याः- जन्मकुंडली में खाना नं. 7 में बुध-शुक्र की युति हो और खाना नं. 3 व 11 में इनके शत्रु ग्रह न हों, तो जिस वर्ष यह वर्षफल में पुनः खाना नं. 7 में आयेगें उस वर्ष विवाह का योग बनता है। जातक की जन्म कुंडली में बुध-शुक्र दोनो खाना नं. 7 में है और खाना नं. 5 व 11 में इनके शत्रु ग्रह (बुध-चंद्र, शुक्र-सूर्य,चंद्र, राहु) नही हैं तो जब यह दोनो ग्रह वर्षफल के अनुसार (आयु के 12-25- 37 वर्ष में) खाना नं. 7 में आयेंगे (देखें कुंडली वर्षफल) तो उस वर्ष शादी का योग होगा। शुक्र अकेला या मिल बैठे, कुंडली जन्म में चैथे जो । सात दूजे न शत्रु होते लेखा शादी का उदय हो । 3 । व् य ा ख् य ा: - जन्मकुंडली में शुक्र खाना नं. 4 में अकेला या किसी अन्य ग्रह के साथ स्थित हो तो जब वर्षफल में पुनः खाना नं. 4 में आ जाए और खाना नं. 2 एवं 7 में सूर्य-चन्द्र एवं राहु में से कोई ग्रह न हो तो विवाह का योग होता है। घर सातवां दो गुरु, शुक्र का, खाली कुंडली जब होता हो । गुरु, शुक्र भी दो-सात आया, साल शादी का बनता हो । 4। व् य ा ख् य ा - जन्मकुंडली में खाना नं. 2 व 7 में कोई ग्रह न हो और वर्षफल में इन घरों में बृहस्पति या शुक्र आ जाये तो विवाह का योग होता है। घर पक्का जिस ग्रह का हो, बुध-शुक्र जहां बैठा हो । अपनी जगह दे बुध-शुक्र को, सात पाये या दूसरा वो । 5। व्याख्याः- बुध-शुक्र जिस घर में स्थित हों वह घर जिस ग्रह का पक्का घर हो वह ग्रह जहां स्थित हो तो जिस वर्ष बुध-शुक्र उस घर में आ जाऐं जहां वह ग्रह बैठा था एवं वह ग्रह खाना नं. 7 में हो तो उस वर्ष विवाह का योग होता है । इसको आप इस उदाहरण द्वारा समझें। मान लें कि बुध-शुक्र जन्मकुंडली में खाना नं. 4 में (जो कि चंद्र का पक्का घर है) में स्थित हैं और चंद्र खाना नं. 9 में स्थित हो तो जिस वर्ष बुध शुक्र खाना नं. 9 में आऐं और चंद्रमा खाना नं. 7 में हो तो विवाह का योग बनता है।



भूत-प्रेत, पितृदोष निवारण विशेषांक  सितम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के भूत प्रेत एवं पितृदोष निवारण विशेषांक में भूत प्रश्नोत्तरी, प्रतादि शक्तियों का रहस्य व प्रभाव, भूत प्रेत एक तार्किक विवेचन, ऋणानुबंधन पीड़ा निवारण, प्रेत कल्प अर्थात गडुड़ पुराण, ज्योतिष व प्रेत दोष, भूत प्रेतों की रहस्यमयी दुनियां, बालारिष्ट एवं भूत प्रेत बाधा, ऊपरी बाधा और ज्योतिषीय विनियोग, ऊपरी बाधा निवारण एवं हनुमान उपासना, भूत प्रेत बाधा होने पर क्या करें, पितृदोष रहस्य, पितृदोष कारण निवारण, भूत संबंधी अविस्मरणीय अनुभव, प्रेत बाधा निवारक ज्योतिषीय सामग्री, दिनमान एवं रात्रिमान में परिवर्तन क्यों, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, पिरामिड एवं वास्तु, हस्तरेखा विज्ञान, सत्यकथा, दाम्पत्य सुख के उपाय, सर्वोपयोगी कृपा यंत्र, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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