हस्त रेखाएं व् आपका मूलांक

हस्त रेखाएं व् आपका मूलांक  

हस्त रेखाएं व आपका मूलांक भारती आनन्द हर जातक के लिए कुछ अंक शुभ कुछ अशुभ व कुछ सम या उदासीन होते हैं। किसी भी जातक के हाथों की रेखाओं का अवलोकन करके यह जाना जा सकता है कि वह किस अंक से प्रभावित है। विभिन्न मूलांक वाले जातकों की हथेली की रेखाओं में भी भिन्नता होती है। यहां हम हर मूलांक वाले जातकों की हस्तरेखाओं का विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं- मूलांक 1 जिन जातकों की जन्म तिथि किसी महीने की 1,10,19,28 तारीख है तो उन पर सूर्य का प्रभाव होता है। ऐसे जातक अत्यधिक मेहनत करने वाले होते हैं। सरकारी नौकरी, राजनीति, समाज सेवा क्षेत्रों में ये उन्नति करते हैं। इनके हाथ में सूर्य की अंगुली सीधी व आकर्षक होती है। यदि किसी की हथेली में सूर्य पर्वत व सूर्य रेखा साफ-सुथरी हो और उसकी संख्या एक से अधिक हो व सूर्य रेखा भाग्य रेखा या जीवन रेखा में विलीन हो रही हो तो व्यक्ति सूर्य प्रधान होता है। हथेली में कोई अन्य दोष न हो तो ऐसे जातकों का जन्म अवश्य ही 1,10,19,28 तारीख को होता है। सूर्य पर्वत पर छोटा सा वृत हो, या साफ-सुथरा त्रिभुज हो और उसके नीचे साफ-सुथरी सूर्य रेखा हो तो व्यक्ति का सूर्य बहुत ही सशक्त होता है। मूलांक 2 किसी महीने की 2,11,29,20 तारीख को जन्मे व्यक्तियों पर ‘चंद्र’ का प्रभाव अधिक होता है। ऐसे लोग भावुक होते हैं। ये शरीर से नाजुक, चंचल प्रवृति सजने-संवरने वाले, कम हौसले वाले, शारीरिक रूप से नाजुक, आलसी परंतु विशिष्ट कल्पना शक्ति वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति आर्किटेक्ट, डिजाइनर, फिल्म निर्देशक आदि बनें तो सफल होते हैं। मूलांक 2 वाले जातक की हथेली में चंद्र पर्वत उŸाम हो, उस पर कटाव न हो, वहां आड़ी रेखाएं हों, साफ सुथरी हों तो व्यक्ति का चंद्र अच्छी स्थिति में होता है। मूलांक ‘2’ वाले व्यक्ति का यदि चंद्र खराब हो तो चंद्र पर्वत पर रेखाओं का जाल बना होता है या चंद्र क्षेत्र दबा हुआ होता है। ऐसे व्यक्ति को पानी में डूबने का खतरा होता है। मूलांक 3 जिनका मूलांक 3 होता है अर्थात् जिनकी जन्मतिथि किसी भी महीने की 3,12,21,30 तारीख होती है उन पर बृहस्पति का प्रभाव होता है। धन, शिक्षा व आय के साधन ऐसे जातक को प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं। ऐसे जातकों में बचपन से ही नेतृत्व का गुण होता है। ये मरते दम तक सामाजिक कार्यों में लगे रहते हैं। साहस, शक्ति, दृढ़ता और आत्मविश्वास आदि के धनी होते हैं। ऐसे जातक अपने परिवार-मित्रों व सहजनों की सहायता करने में अग्रसर रहते हैं। अपनी प्रभाव शक्ति से ये शत्रु को भी अपना मित्र बना लेते हैं। ऐसे व्यक्ति यदि गुरुवार के दिन अपना विशेष कार्य करते हैं तो इन्हें सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है। मूलांक 3 वाले जातकों का गुरु पर्वत उठा हुआ व शनि पर्वत की ओर से थोड़ा उभार लिये होता है। इस पर्वत पर गुरु वलय होता है। गुरु की अंगुली यदि सूर्य की अंगुली से बड़ी हो, सीधी हो तो व्यक्ति गुरु प्रधान होता है। इन्हें ‘गुरु’ की वजह से ज्ञान, सम्मान, शिक्षा आदि मिलती है। यदि गुरु पर्वत दबा हुआ हो, गुरु की अंगुली तिरछी व टेढ़ी हो, गुरु पर्वत पर कटाव या तिल हो, गुरु की अंगुली काली या मोटी हो, नाखून टेढ़ा-मेढ़ा हो व अंगुली पर चार पर्व हों, तो ऐसे व्यक्ति को गुरु के दोषपूर्ण होने से समाज में सम्मान नहीं मिलता है। मूलांक 4 जिन जातकों का जन्म किसी महीने की 4,13,22,31 तारीख को हुआ है उनका मूलांक 4 होता है। इन जातकों पर राहु का प्रभाव रहता है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में संघर्षशील रहते हैं। अत्यधिक आधुनिक विचारों वाले, पुरानी प्रथाओं के विरोधी, हर बात को विपरीत नजर से देखने वाले ऐसे जातक झगड़ालु प्रवृति के न होते हुए भी अपने विचारों से बहुतों को दुश्मन बना लेते हैं। इनके जीवन में भिखारी से लखपति और लखपति से भिखारी बनने की स्थिति आती रहती है। ऐसे जातकों की हथेली का विश्लेषण करें तो शनि पर्वत के नीचे हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा के नीचे का राहु पर्वत महत्वपूर्ण होता है। यदि हाथ में गुरु पर्वत उठा हुआ हो, इस स्थान पर कटाव न हो, तो ऐसे जातक 4 मूलांक से प्रभावित होते हैं। यदि राहु पर्वत पर कोई भी दोष न हो तो जातक का स्वास्थ्य अच्छा होता है। राहु प्रधान या 4 अंक वाले जातक अपने जीवन में कुछ पैसा अनैतिक रूप से अवश्य कमाते हैं। यदि इस पर्वत पर ‘त्रिभुज हो या चतुष्कोण हो तो ऐसे व्यक्ति अच्छा धनार्जन करते हैं। मूलांक 5 जिन जातकों का जन्म किसी महीने की 5,14,23 तारीख को हुआ है तो उनका मूलांक ‘5’ होता है। ऐसे जातकों का जीवन पर ‘बुध’ ग्रह का प्रभाव होता है। ऐसे व्यक्ति ज्ञानी, जीवन भर मित्रता निभाने वाले, कल्पनाशील, सूझ-बूझ वाले व हमेशा तनाव ग्रस्त रहने वाले होते हैं। ऐसे लोग शारीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक श्रम ज्यादा करते हैं। धनोपार्जन के लिए ऐसे लोग कई बार अपना व्यवसाय बदलते रहते हैं। यह मूलांक वाले शत्रुता नहीं करते, लेकिन अगर कोई इनसे दुश्मनी करता है तो वह उसका विनाश अवश्य कर डालते हैं। अधिकांश ऐसे लोगों का मन नौकरी में नहीं लगता है। ऐसे जातकों की हथेली में बुध पर्वत की स्थिति छोटी अंगुली के नीचे अच्छी होती है। बुध पर्वत पर सीधी रेखाएं हों, बुध की अंगुली सीधी हो, इस क्षेत्र पर कटाव या जाल न हो व इसके चार पर्व न हों, तो जातक की वाक् शक्ति, बुद्धिमता, तर्क शक्ति बहुत ही अच्छी होती है। शुभ लक्षणों से युक्त ऐसे जातकों की वाणी बहुत मीठी होती है। इसके विपरीत, यदि हथेली में उपरोक्त शुभ लक्षण न हों, बुध पर्वत दबा हुआ हो, बुध पर्वत पर आड़ी-तिरछी रेखाएं हांे तो ऐसे जातकों के जीवन में बुध का शुभ प्रभाव नहीं होता है। इनकी वाणी में मधुरता भी नहीं रहती। मूलांक 6 जिन जातकों का जन्म किसी महीने की 6,15,24 तारीख में हो तो ऐसे जातकों पर ‘शुक्र’ का प्रभाव होता है। ऐसे जातक ‘रोमांटिक’, शांत, ईमानदार, तेज बुद्धि, धनी, निडर, प्रेमी, ऐश्वर्य सम्पन्न, कामुक, कला के शौकीन, हंसमुख आदि गुणों से संपन्न होते हैं। ऐसे लोगों को सुंदर भोजन, शृंगार तथा कलात्मक वस्तुएं सदैव प्रिय होती हैं। ऐसे मूलांक वाले हमेशा जिम्मेदारी को निभाने वाले होते हैं, किंतु इनका गृहस्थ जीवन बहुत अच्छा नहीं होता है। अगर ‘6’ अंक वाले व्यक्तियों को ऐब लग जाए तो आसानी से नहीं छूटता। ऐसे जातकों की हथेली में शुक्र पर्वत साफ-सुथरा व उभार लिये होता है। शुक्र पर्वत को यदि जीवन रेखा पूर्ण रूप से घेरती हो, शुक्र पर्वत पर यदि मोटी-मोटी रेखाएं न हों व जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा साफ-सुथरी हो तो जातक को धन प्राप्ति के कई साधन जीवन में मिलते हैं। शुक्र पर्वत अगर दबाव लिये हो, शुक्र पर्वत पर मोटी-मोटी रेखाएं हों तो जातक को सभी सुख-सुविधाएं नहीं मिलती। मूलांक 7 जिन जातकों का जन्म किसी भी महीने की 7,16,25 तारीख को हुआ हो तो वे ‘7’ मूलांक की श्रेणी में आते हैं। इस मूलांक का प्रतिनिधि ग्रह ‘केतु’ है। ऐसे जातक अपनी सबसे अलग पहचान बनाने में सफल होते हैं। ऐसे जातक प्रत्येक व्यक्ति के राज जानने की कला में निपुण होते हैं। ऐसे जातक योजना से जुड़े क्षेत्र कला व चित्रकला आदि में नाम अर्जित करते हैं। पत्रकारिता, अभिनय, प्लास्टिक, खेल कार्य, चिकित्सा, पर्यटन औषधि, खनिज आदि से जुड़े कार्यों में ये विशेष सफल होते हैं। ये परम्परावादी नहीं होते हैं। किसी जातक की हथेली में केतु पर्वत उभार लिये हो, साफ-सुथरा हो, भाग्य रेखा जीवन से दूर हो व साफ-सुथरी हो तो जातक को ‘7 मूलांक’ से प्रभावित माना जाता है। ऐसे जातक की हथेली में अन्य स्थिति शुभ हो तो मनुष्य को लाखों में एक बना देता है। ‘केतु’ पर्वत यदि विशेष उन्नत हो तो व्यक्ति के पास अथाह धन-संपŸिा होती है। यदि जातक की हथेली में अशुभ लक्षण भी हों तो जातक कभी भी धन, वैभव, मान, सम्मान, बुद्धि आदि का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है। ऐसे मूलांक वालों को केतु के उपाय अवश्य करने चाहिए। मूलांक 8 जिन जातकों का जन्म किसी महीने की 8, 17, 26 तारीख को हुआ है तो वे मूलांक ‘8’ वे और ‘शनि’ ग्रह से प्रभावित होते हैं। ऐसे व्यक्ति जिम्मेवार होते हैं, पर खतरों से खेलना इनके लिए ठीक नहीं होता है। इनकी उन्नति के मार्ग में बहुत रुकावटें आती हैं। जीवन में इन्हें यश पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं होता है। ऐसे लोग गुस्सा करने वाले, परेशान व किसी का दबाव नहीं सह पाते हैं। ऐसे लोग संवेदनशील होते हैं, इनकी उन्नति धीरे-धीरे होती है। इनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। धार्मिक क्रिया कलापों में भी ऐसे लोग अग्रसर होते हैं। इन्हें जीवन में अकस्मात् धन की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग जुए, लाॅटरी, सट्टे, शेयर आदि से भी लाभ अवश्य प्राप्त करते हैं। शनि से प्रभावित क्षेत्रों संगीत, काली चीजों व लोहे के व्यापार, ज्योतिष, ट्रांसपोर्ट, कोयला, धर्म-कर्म, बिजली, दवाइयां, चमड़े का व्यवसाय ठेकेदारी, बागवानी, पुलिस से जुड़े कार्य करने चाहिए। यदि किसी भी जातक की कुंडली में शनि पर्वत साफ-सुथरा हो व साफ-सुथरी भाग्य रेखा हो, शनि की अंगुली सीधी हो या शनि क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से त्रिकोण बना हो व उसके नीचे हृदय रेखा स्पष्ट हो तो ऐसे जातक ‘8’ मूलांक वाले होते हंै। अन्य लक्षण शुभ हों तो ऐसे जातक धनी व कार्य कुशल साबित होते हैं। यदि शनि पर्वत पर रेखाएं साफ-सुथरी हों तो व्यक्ति को बचपन से ही सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं मिलन े लगती हं।ै यदि हाथ में शनि की अंगुली सीधी हो, पर्वत उभार लिये हो, शनि की अंगुली पर केवल 3 ही पर्व हों, अंगुली पतली व नाखून साफ-सुथरा हों तो ऐसे व्यक्तियों पर शनि की विशेष कृपा होती है। पूर्व जन्मों में ऐसे लोग साधु-संतांे की सेवा करने वाले, बुजुर्गों का सम्मान दान व पुण्य व दूसरों की मदद करने वाले होते हैं। ऐसे जातक को शनि देव की पूजा करनी चाहिए। मूलांक 9 जिनका जन्म किसी भी महीने की 9,18,27 तारीख को हुआ हो वे मूलांक ‘9’ और मंगल ग्रह से प्रभावित होते हैं। इस अंक से प्रभावित लोग साहसी, सम्पन्न, क्रोधी, भजबूत, अनुशासित, जल्दबाज, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं और पुलिस, सैन्य विभाग, साहसिक कार्य, ज्योतिष, भूमि के क्रय-विक्रय, वकालत, सत्संग आदि से जुड़े होते हैं। ऐसे जातकों की गृहस्थी बहुत अच्छी नहीं होती है। भाषा में कड़वाहट रखने वाले ऐसे लोग परंपराओं में जीते मरते हैं। इनमें कुछ दोष अवश्य होते हैं। मूलांक 9 वाले जातकों की हथेली में उच्च मंगल व निग्न मंगल पर्वत उभार लिए होता है। मंगल पर कटाव न हो, पर्वत साफ-सुथरा हो, तो ऐसे जातकों पर मूलांक ‘9’ का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अगर मंगल पर्वत उन्नत नहीं हों, अन्य शुभ लक्षण भी कम हों तो ऐसे जातक जिद्दी व शीघ्र गुस्सा करने वाले होते हैं। ऐसे जातक अधिकतर मेहनत मजदूरी करके अपनी जीविका चलाते हैं। प्रायः इस मूलांक वाले जातकों की अंगुलियां मोटी होती हैं। इस मूलांक से प्रभावित जातकों की हथेली में यदि रेखाएं अच्छी हों, मंगल पर्वत उभार लिये हो तो जातक संपŸिा की खरीद-फरोख्त, बिल्डिंग मेटेरियल का कार्य करने वाले या किसी बड़े विभाग के चीफ होते हैं। ऐसे जातक अक्सर अति आत्मविश्वास के शिकार होते हैं। ऐसे जातकों को मंगलवार वाले दिन हनुमान की पूजा करनी चाहिए।



अंक शास्त्र विशेषांक   सितम्बर 2008

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