अंक ज्योतिष की प्रचलित पद्वतियां

अंक ज्योतिष की प्रचलित पद्वतियां  

अंक ज्योतिष की प्रचलित पद्धतियां डाॅ. संजय बु(िराजा अ क ज्योतिष फलादेश की अनेक विद्याओं में से एक सुलभ व सटीक विद्या है जिसके आधार पर विश्व भर में गणना एवं फलादेश किए जाते हैं। इसकी मुख्यतः तीन पद्धतियां प्रचलित हैं - कीरो, सेफेरियल और पाइथागोरस। इनमें कीरो की पद्धति को सर्वाधिक प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि कीरो की गणना के अनुसार किया जाने वाला फलित अधिकांशतः सत्य होता है। कीरो के साथ-साथ सेफेरियल व पाइथागोरस ने भी अंग्रेजी के प्रत्येक अक्षर को एक निश्चित संख्या प्रदान की है जो निम्न सारणी में देखी जा सकती है। कीरो पद्धति - इस पद्धति में मूलांक, भाग्यांक व नामांक का उपयोग किया जाता है। जन्म तारीख के योग को मूलांक और जन्म तारीख, जन्म मास व जन्म वर्ष के अंकांे के कुल योग को भाग्यांक कहा जाता है। जातक के नाम के अक्षरों के मान (वर्णित तीनों में से किसी भी पद्धति के अनुसार) के योग को नामांक कहा जाता है। इन्हीं तीनों के आधार पर जातक के लिए शुभ-अशुभ का फलकथन किया जाता है। वस्तुतः नामांक, मूलांक और भाग्यांक का आपस में अटूट संबंध होता है। उदाहरण के लिए ैभ्न्ठभ्।ड नाम लें- जिसकी जन्म तारीख 12.11. 1994 है। इसका जन्मांक हुआ 12 अर्थात् 1$2=3। भाग्यांक हुआ 12$11$1994 अर्थात् 3$2$23 =28= 2$8 =10=1$0 = 1। और कीरो के अनुसार नामांक होगा 3$5$6$2$5$1$4=26 = 2$6 = 8। विभिन्न अंकों पर किन-किन ग्रहों का प्रभाव अधिक रहता है, यह निम्न सारणी से जाना जा सकता है, साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि इन अंकों का आपस में संबंध कैसा है। ये आपस में मित्र हैं या शत्रु ! मूलांक व भाग्यांक को तो बदला नहीं जा सकता, लेकिन नामांक को बदल सकते हैं। उक्त उदाहरण में नामांक 8 है जो भाग्यांक 1 का तो मित्र है, लेकिन मूलांक 3 का शत्रु है। अतः जातक को अपने नाम के अक्षरों में परिवर्तन कर नामांक 9 करना चाहिए, क्योंकि अंक 9 मूलांक 3 का मित्र व भाग्यांक 1 का सम अंक है। इसके अनुसार जातक का नाम इस प्रकार हो सकता है- इस गणना के अनुसार जातक के जीवन पर 3 अर्थात् गुरु व 1 अर्थात् सूर्य का प्रभाव अधिक होगा। नामांक 9 हो तो मंगल ग्रह का प्रभाव भी आ जाएगा। गुरु, सूर्य व मंगल आपस में मित्र भी हैं। इस प्रकार, जातक का जीवन सुखी समृद्ध व भाग्यशाली रहेगा। सेफेरियल पद्धति: यह पद्धति कीरो पद्धति से भिन्न है, क्योंकि इसमें ग्रहों के आपसी संबंधों की गणना अलग तरीके से की जाती है। इस पद्धति के अनुसार जातक की जन्म तिथि के अंकों को एक सारणी के निर्धारित खानों में लिखकर उसके आत्मिक, मानसिक व व्यावहारिक गुणा के बारे में जाना जा सकता है। यहां जन्म वर्ष के अंतिम दो अक्षर ही लिए जाते हैं। नामांक के लिए सेफेरियल पद्धति को उपयोग में लाया जाता है। ैभ्न्ठभ्।ड के उदाहरण में - जन्म तिथि -12.11.94 है, जबकि नामांक ै़भ़्ऩ्ठ़भ़्।़ड =32=3$2=5 इस तरह नाम के अनुसार जातक पर बुध ग्रह का प्रभाव अधिक रहेगा। उसका आत्मिक गुणों पर सूर्य व मंगल का प्रभाव होगा, किंतु नामांक 5 होने के कारण मानसिक गुणों पर बुध का विशेष प्रभाव रहेगा। व्यावहारिक गुणों पर चंद्र के साथ-साथ राहु ग्रह का भी प्रभाव रहेगा। उर्पयुक्त सारणी में प्राप्त अंकों 1,2,4 और 9 में आपस में शत्रुता भी नहीं है, इसलिए जातक को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति आसानी से होगी, अन्यथा शत्रुता होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था। पाइथागोरस पद्धति: यह पद्धति कीरो पद्धति से मिलती-जुलती है, केवल अंक सारणी में भिन्नता है। इस पद्धति में नामांक ज्ञात करने के पश्चात् ही फलादेश किया जाता है जिससे यह पता चल जाता है कि कौन सा ग्रह बलवान व कौन सा निर्बल होगा। ैभ्न्ठभ्।ड के उदाहरण में- ैभ्न्ठभ्।ड = 9$8$2$2$8$1$3 =33 =3$3=6। अतः नामांक हुआ 6 अर्थात जातक पर शुक्र ग्रह का प्रभाव होगा। मूलांक 3 अर्थात गुरु व भाग्यांक 1 अर्थात सूर्य है। अतः यह आवश्यक है कि जातक के नाम के अक्षरों में परिवर्तन किया जाए ताकि 1 व 3 का मित्र अंक मिल सके और जातक खुशहाल जीवन जी सके। उदाहरण के लिए, यदि ैभ्न्ठभ्।ड को ैभ्न्ठभ्।डड किया जाए तो नामांक आता है- ै$भ्$न्$ठ$भ्$।$ड़ड = 9$8$2$2$8$1$3$3 =36 =3$6 =9। अब यहां 1,3 व 9 अंकों में शुभ संबंध बन गया जिसके फलस्वरूप जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होगी। अंकों का जीवन पर प्रभाव: विभिन्न अंकों और घटनाओं का जातक के जीवन पर खास प्रभाव पड़ता है। अंक के अनुसार कौन व्यक्ति और किस व्यवसाय से जुड़ा होगा, यह इस तालिका से जाना जा सकता है। 1- इस अंक के प्रभाववश जातक धनी, कुलीन, यशस्वी, अधिकारी, डाक्टर, जौहरी, ठेकेदार या राजनीतिज्ञ होता है। वहीं यह हृदय रोग, सिरदर्द, नेत्र रोग आदि का प्रतीक भी है। 2- यह अंक जातक को विनम्र, शांत और गुणी बनाता है। इसके प्रभाववश वह दूध, खेती या ठेकेदारी का कार्य करता है। किंतु, यह अंक मानसिक रोग, अनिद्रा आदि का प्रतीक है। 3- यह अंक जातक को सुखी, क्षमाशील, नीतिवान, लेखक, अध्यापक, वकील, ज्योतिषी या दर्शनशास्त्री बनाता है। यह शुगर, गैस, पीठदर्द आदि का प्रतीक भी है। 4- इस अंक के प्रभाववश जातक का अचानक भाग्योदय होता है। वह रेल कर्मचारी, पत्रकार या दुभाषिया हो सकता है, किंतु यह अंक उसे अपच, सिरदर्द आदि से पीड़ित रखता है। 5- यह अंक व्यक्ति को लेखक, गणितज्ञ, प्रतिभावान, ज्योतिषी, व्यापारी या लाईब्रेरियन बनाता है, किंतु इसके प्रभाववश वह लकवा ग्रस्त हो सकता 8- यह अंक व्यक्ति को दीर्घायु, दृढ़ इच्छाशक्ति का स्वामी और परिश्रमी बनाता है, किंतु इसके प्रभाववश उसे जोड़ों का दर्द, लीवर रोग आदि हो सकते हैं। 9- इस अंक का जातक नेता, डाक्टर, साहसी, सैनिक या जमींदार हो सकता है, किंतु उसे दुर्घटना, पाइल्स आदि होने की संभावना रहती है। वस्तुतः किसी भी व्यक्ति के जीवन है और उसमें भूलने की आदत भी पनप सकती है। 6- यह अंक जातक को धनी, व्यापारी, जौहरी, रूपवान, कलाकार या वस्त्र विक्रेता बनाता है, किंतु यह उसे मूत्र विकार, पथरी, गुर्दा रोग आदि से पीड़ित भी कर सकता है। 7- इस अंक के प्रभाववश जातक, कल्पनाशील, साहसी और पर्यटनप्रिय होता है, किंतु उसके चर्मरोग, थकावट, रक्तचाप आदि से ग्रस्त होने की संभावना रहती है। की घटनाएं किसी अंक विशेष को इंगित करती हैं। अगर विश्लेषण करें तो महत्वपूर्ण घटनाएं किसी खास दिन, तारीख या वर्ष (जिसके अंकों का जोड़ उस व्यक्ति के जन्मांक, नामांक या भाग्यांक का प्रतिनिधित्व करता हो) को ही घटित होती हैं। यहां तक कि जगह, आस-पास के लोगों और वह संस्था या कंपनी जहां व्यक्ति कार्य करता है, इन सब के मान का योग व्यक्ति को विशेष रूप से प्रभावित करने वाले अंकों में से ही कोई होता है।



अंक शास्त्र विशेषांक   सितम्बर 2008

अंक शास्त्र में प्रचलित विभिन्न पद्वतियों का विस्तृत विवरण, अंक शास्त्र में मूलांक, नामांक व भाग्यांक का महत्व, अंक शास्त्र में मूलांक, भाग्यांक व नामांक के आधार पर भविष्य कथन की विधि, अंक शास्त्र के आधार पर पीड़ा निवारक उपाय, नामांक परिवर्तन की विधि एवं प्रभाव

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