अंकों का जीवन पर प्रभाव

अंकों का जीवन पर प्रभाव  

अंकों का जीवन पर प्रभाव प्रेम प्रकाश ‘विद्रोही जिस तरह ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की प्रधानता होती है, उसी तरह अंक ज्योतिष शास्त्र में एक से नौ तक की अंकों की प्रधानता होती है। इन्हीं अंकों के माध्यम से किसी भी जातक का मूलांक, भाग्यांक, संयुक्तांक ज्ञात कर तुरंत फल-कथन किया जा सकता है। अंक का प्रभाव किसी खास अंक से प्रभावित व्यक्ति के जीवन में उस अंक का दोहराव देखा गया है। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं- राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री हरिदेव जोशी जी के जन्म का वर्ष है 1921 ई. । वर्ष के अंकों का योग 1$9$2$1=13=4 तथा दशक के अंकों का योग 2$1=3 आता है। जोशी जी के जीवन में तीन या तीन के गुणांक अंकों का विशेष योग रहा। जैसे इनके स्वतंत्र जीवन की शुरुआत श्री लक्ष्मण दास जी द्वारा सन् 1938 में स्थापित संस्था से हुई। 1938 का योग 1$9$3$8=21=3 था। वे प्रथम बार मंत्रिमंडल में सम्मिलित हुए सन् 1965 में जिसका योग 1$9$6$5=21=3 हुआ। सन् 1973 में प्रथम बार वे राजस्थान के मुख्यमंत्री बने जिसका अंतिम अंक भी तीन ही है। दस बार लगातार चुनाव जीते और दसवीं बार 1993 में विधान सभा का चुनाव जीता जिसका अंतिम अंक 3 ही है। जोशी जी तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। इस प्रकार, अंक विशेष का प्रभाव व्यक्ति पर जरूर रहता है। अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म पत्रिका बनाकर अपना भाग्य ज्ञात किया जा सकता है। वैसे नामांक, संयुक्तांक आदि जानने की विधि कुछ लंबी है, लेकिन सामान्य पाठकों के लिए अपना शुभ-अशुभ जानने की सरल प्रक्रिया यह भी है कि अपने जन्म वर्ष में भाग्यांक को जोड़ते चलें। आप पाएंगे कि आपके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं इन्हीं वर्षों में घटी हैं। अंक रत्न: हम नाम राशि या जन्म राशि के अनुसार जिस तरह भाग्योदय के लिए रत्न पहनते हैं, उसी तरह अंक ज्योतिष के अनुसार भाग्यांक के प्रतिनिधि रत्नों को पहनकर लाभ उठा सकते हंै। रत्नों का चयन सारणी के अनुसार कर सकते हैं। अंक यंत्र: 15, 20 आदि अंकों के यंत्र कार्य सिद्धि में अत्यंत सहायक होते हैं। इन यंत्रों को ताम्र, रजत या स्वर्ण के पत्र पर उकेर कर पूजन आदि करके स्थापित कर लाभ उठा सकते हैं। इन्हें भोजपत्र पर भी बनवाकर और अष्टगंधादि से पूजन कर रख सकते हैं। रत्न चयन सारणी अंक प्रतिनिधि ग्रह रत्न 1 सूर्य माणिक्य 2 चंद्र मोती 3 गुरु पुखराज 4 राहु गोमेद 5 बुध पन्न्ाा 6 शुक्र हीरा 7 केतु लहसुनिया 8 शनि नीलम 9 मंगल मूंगा रत्न चयन सारणी



अंक शास्त्र विशेषांक   सितम्बर 2008

अंक शास्त्र में प्रचलित विभिन्न पद्वतियों का विस्तृत विवरण, अंक शास्त्र में मूलांक, नामांक व भाग्यांक का महत्व, अंक शास्त्र में मूलांक, भाग्यांक व नामांक के आधार पर भविष्य कथन की विधि, अंक शास्त्र के आधार पर पीड़ा निवारक उपाय, नामांक परिवर्तन की विधि एवं प्रभाव

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.