हृदय रोग

हृदय रोग  

हृदय रोग आचार्य अविनाश सिंह हृदय प्राणी के शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक क्रियाशील रहता है। परंतु कुछ विशेष कारणों से जब हृदय विकारग्रस्त होता है तो रोग उत्पन्न होते हैं, जो प्राणी को हानि पहुंचाते हैं, यहां तक कि जानलेवा भी साबित होते हैं। जिंदगी की दौड़-धूप एवं तनाव में हृदय-शूल की शिकायत बढ़ती जा रही है। यह कब, कैसे और कहां प्रहार करेगा, यह कहना आसान नहीं। इसलिए इस समय दुनियां भर में इसकी विशेष चर्चा है। हमारे शरीर में हृदय क्या कार्य करता है? इन पहलुओं पर विचार करने पर मालूम होता है कि हृदय शारीरिक रचना का वह महत्वपूर्ण अंग है जिससे शरीर के प्रत्येक सूक्ष्म हिस्से तक पोषक सामग्री पहुंचती है और वहां से अनुपयोगी तत्त्वों को इकठ्ठा कर उन्हें शरीर से बाहर निकालने में सहायक है। इस कार्य के लिए रक्त का उपयोग होता है । इसलिए रक्त का निरंतर प्रवाह आवश्यक है। हृदय द्वारा रक्त फेफड़ों तक भेजा जाता है जहां रक्त में आक्सीजन घुल जाती है और रक्त में विद्यमान अनुपयोगी वायु के अंश फेफड़ों में आकर श्वांस द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं। आक्सीजनयुक्त रक्त फिर हृदय में चला जाता है और हृदय उसे संपूर्ण शरीर में भेज देता है। एक बार श्वास लेने पर 1200 मिलीलीटर आॅक्सीजन रक्त में घुल जाती है। शरीर पांच मिनट में ही इसका उपयोग कर लेता है। इस सारी प्रणाली को कार्डीयो-वेस्कुलर सिस्टम कहते हैं। जब यह प्रणाली नियमित रूप से अपना कार्य करने में असमर्थ हो जाती है तो कई तरह के हृदय रोग हो जाते हैं। हृदय रोग में आयुर्वेदिक कारण आयुर्वेद में किसी भी रोग का मुख्य कारण तीन विकारों पर निर्भर करता है। वात, पित्त और कफ का असंतुलन भी हृदय रोग का मुख्य कारण होता है। प्रकोप-कारणों से, जैसे अधिक परिश्रम, भय, शोक, चिंता, तनाव एवं अधिक गर्म, अम्लीय, कसैले, तीखे एवं नशीले पदार्थों के सेवन से कुपित, वातादि दोष हृदय में पहुंचकर रक्त के साथ मिलकर हृदय रोग उत्पन्न होता है, सांस रूकने लगती है और कभी-कभी तो रूक ही जाती है। उसका तुरंत उपचार न होने पर व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है। आयुर्वेद में इस रोग को हृदय-शूल कहते हैं। आधुनिक युग में ‘दिल का दौरा’ कहते हैं। हृदय-शूल ‘वायु’ प्रधान दोष होता है। वायु निजी प्रकोप-कारणों से तो कुपित होता ही है कफ तथा पित्त द्वारा उसका अवरोध होने से उनके प्रकार में और अधिक वृद्धि हो जाती है। यही वायु रक्त के साथ मिलकर हृदय के काम में बाधा डालती है, जिससे दर्द उत्पन्न होता है और दिल का दौरा या हृदय का कारण बनता है।



हस्तरेखा विशेषांक  April 2017

फ्यूचर समाचार के हस्त रेखा विशेषांक अप्रैल 2017 में हस्त रेखा विज्ञान सम्बन्धित विस्तृत जानकारी, विभिन्न शोधपरक लेख जिनमें अंगूठे का महत्व, हथेली में विभिन्न रोगों के लक्षण, जातक नौकरी करेगा अथवा व्यवसाय तथा हस्तरेखा से अनुमानित आयु आदि प्रमुख हैं। सत्य कथा में चैन्नई की राजनेता शशिकला के सितारे तथा विचार गोष्ठी में हस्तरेखा एवं कुण्डली मिलान के अतिरिक्त डाॅ. राकेश कुमार सिन्हा का पावन स्थल नामक स्थायी स्तम्भ में श्री हरिहर क्षेत्र का वर्णन अत्यन्त रोचक है। वास्तु परामर्श में फ्लैट का वास्तु विश्लेषण नामक विषय पर चर्चा की गई है। सम्पादकीय में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार हस्त रेखाओं का ज्ञान स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के लिए विशेष रूप से उपयोग में लाया जा सकता है। अन्य स्थायी स्तम्भों में दी गई जानकारी भी नियमित पाठकों के लिए उपायोगी सिद्ध होगी।

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