टैरो पद्वति एवं भारतीय ज्योतिष

टैरो पद्वति एवं भारतीय ज्योतिष  

टैरो पद्धति एवं भारतीय ज्योतिष रंजू नारंग अ बूझ को बूझना, अनसुलझे रहस्यों का भेद जानना मानव मन की चिरंतन पिपासा रही है। भविष्य के गर्भ में हमारा भाग्य कैसा है? यह जानने की उत्सुकता संपूर्ण मानव जाति में सदा से ही रही है। इसी उत्सुकता ने जन्म दिया, संपूर्ण विश्व में प्रचलित विभिन्न भविष्यकथन की पद्धतियों को। टैरो पद्धति ऐसी ही एक पद्धति है, जिसमें ताश के पत्तों की भांति टैरो कार्ड्स का प्रयोग करके भविष्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया जाता है। उत्पत्ति एवं प्रचलनः इसकी उत्पत्ति के विषय में अनेक मत प्रचलित हैं। कुछ लोग इस विद्या की उत्पत्ति प्राचीन मिस्र की सभ्यता को मानते हैं, कुछ के अनुसार यह यूरोप में उत्पन्न हुई। ले मो-उ प्रियमिटफ (1781) के अनुसार ये कार्ड्स भारत में जिप्सियों के द्वारा लाए गए थे। इजिप्ट इनका प्रमुख स्त्रोत था, जहाँ से 14वीं शताब्दी में ये इटली व फ्रांस में पहुँचे। आज भी इटली में टैरो कार्ड्स की माइनर अरकाना का प्रयोग टारोच्ची नामक एक प्राचीन खेल खेलने के लिए किया जाता है। 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में शायद फ्रैन्च लोगों ने टारोच्ची नाम को छोटा करके टैरो कर दिया। अब अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में इसे टैरो कहा जाता है। इन टैरो कार्ड्स के माध्यम से भविष्य कथन की रहस्यमयी पद्धति को सर्वप्रथम पेरिस के राज मिस्त्राी एण्टोइनी कोर्ट दी गेवेलिन ने कहा। उसने इनसे जुड़ी अनेक कहानियाँ प्रचलित की। उनके समकालीन एटीला ने एक निबन्ध लिखा त्मूपदक ंदक ब्वततमबजमक ब्ंतक क्मबा द्वारा भविष्य कथन। फ्रांस से इन कार्डों की लोकप्रियता इंग्लैण्ड पहुँची तथा यूरोप में इन कार्डों का प्रयोग और महत्ता काफी बढ़ गई। टैरो कार्ड्स - एक संक्षिप्त परिचयः टैरो 78 कार्डों का एक समूह है जिसके साथ कई धारणाएँ एवं विश्वास जुड़े हैं। इन कार्ड्स के दो प्रमुख समूह हैं। मेजर अरकाना एवं माइनर अरकाना। मेजर अरकाना में 22 कार्ड्स हैं। इन 22 मेजर अरकाना कार्डों पर विभिन्न चित्र अंकित हैं जो जीवन से जुड़ी घटनाओं, आंतरिक शक्तियों, रहस्यों व उपलब्ध्यिों की ओर संकेत करते हैं। डपदवत ।तबंदं (माइनर अरकाना) माइनर अरकाना में कुल 56 कार्ड्स हैं जिन्हेें चार समूहों में विभाजित किया जा सकता है, जो चार प्राकृतिक तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि तथा वायु से संबंध्ति हैं। इन कार्डों को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है। इस प्रकार टैरो कार्ड्स अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी आदि तत्वों के प्राकृतिक संतुलन को इंगित करते हैं। माइनर अरकाना मानव की ऊर्जा से संचालित होते हैं। मनुष्य किस दिशा की ओर अग्रसर है, इन कार्डों से स्पष्ट होता है। कोर्ट काडर््स च्ंहमए ज्ञदपहीजए फनममद और ज्ञपदह जीवन में आने वाली घटनाओं, व्यक्तियों व परिस्थितियों को इंगित करते हैं। जब कार्ड्स बिछाए जाते हैं तो ये प्रश्नकत्र्ता के साथ होने वाली घटनाओं और संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं। कोई घटना कब होगी? इसका निर्धरण कार्डों के संकेत तथा टैरो रीडर के अंतर्मन के आभास पर निर्भर करता है। कार्डों को बिछाने के कई तरीके प्रचलित हैं जैसेµ 1ण् ज्ीम ज्ीतमम ैचतमंकए 2ण् ज्ीम ब्तवेे ैचतमंकए 3ण् ज्ीम भ्वतेमेीवम ैचतमंकए 4ण् ज्ीम थ्ंद.ैचतमंकए 5ण् ज्ीम ब्ंसमदकंत ैचतमंकए 6ण् ज्ीम ज्तमम व िस्पमि ैचतमंकए 7ण् ज्ीम भ्वतवेबवचम ैचतमंकए आदि। इन सभी ैचतमंक (बिछाव) में प्रश्नकत्र्ता द्वारा टैरो कार्ड्स की गड्डी में से खींचे गए कार्ड रखे जाते हैं, जो प्रश्नकत्र्ता की समस्या का समाधान करते हैं, उसके भूत, वर्तमान व भविष्य को बताते हैं। उनके सामाजिक जीवन, साझेदारी, प्रेम, यात्रा, वित्त संबंधी प्रश्नों के उत्तर देते हैं। मान्यता है कि इन कार्ड्स को बिछाने में प्राकृतिक वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। संभव हो तो आसन बिछाकर भूमि पर बैठें, लकड़ी के फर्नीचर का प्रयोग करें। फाइबर या प्लास्टिक का नहीं। बिछाने का कपड़ा सूती या रेशमी होना चाहिए सिंथेटिक नहीं। टैरो पद्धति एवं भारतीय ज्योतिषः भारतीय ज्योतिष में लग्न कुंडली का सर्वाधिक महत्व है, जिसमें मनुष्य के जन्म के समय आकाशीय ग्रहों की स्थिति की व्याख्या की जाती हैं। इन ग्रहों का मानव जीवन पर स्थायी प्रभाव बताया जाता है। इसके अतिरिक्त गोचर ग्रहों अर्थात् चलायमान ग्रहों का भी प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। टैरो पद्धति भी ग्रहों के प्रभाव से अछूती नहीं है। मेजर अरकाना के सभी कार्ड्स किसी न किसी ग्रह से प्रभावित हैं। यथाµज्ीम डंहपबपंद बुध से, ज्ीम ॅीममस व िथ्वतजनदम बृहस्पति से, ज्ीम ज्वूमत मंगल से आदि। इस प्रकार मेजर अरकाना की तुलना लग्न कुंडली से की जा सकती है। माइनर अरकाना को ऊर्जा के प्रवाह से जोड़ा गया है। इसकी तुलना गोचर के ग्रहों से की जा सकती है। ये प्रश्नकत्र्ता की वर्तमान ऊर्जा से संबंध्ति हैं अर्थात् उसके विचार, भावनाएँ व धारणाएँ आदि। माइनर अरकाना के चार समूहों में से प्रत्येक में 14-14 कार्ड्स हैं जिनमें से 10, एक से दस तक संख्याओं को प्रतिबिंबित करते हैं तथा 4 कार्ड्स प्रत्येक समूह में च्ंहमए ज्ञदपहीजए ज्ञपदहे और फनममदे के हैं। इन्हें ब्वनतज ब्ंतके कहा जाता है। माइनर अरकाना के चार समूह ॅंदकेए ब्नचेए ैूवतके और च्मदजंबसमे क्रमशः अग्नि, जल, वायु व पृथ्वी को इंगित करते हैं। भारतीय ज्योतिष में भी इन तत्वों का अत्यध्कि महत्व है। मानवीय ऊर्जा को संतुलित करने में इन तत्वों का योगदान हैं। भारतीय ज्योतिष की सभी राशियाँ इनमें से किसी न किसी तत्व से प्रभावित होती हैं। इसे निम्नलिखित चार्ट द्वारा समझा जा सकता है। तत्व टैरो समूह प्रभावित राशि अग्नि ॅंदके मेष, सिंह, ध्नु पृथ्वी च्मदजंबसमे वृष, कन्या, मकर वायु ैूवतके मिथुन, तुला, कुंभ जल ब्नचे कर्क, मीन, वृश्चिक अतः भारतीय ज्योतिष की राशियाँ एवं माइनर अरकाना कार्ड्स के समूह दोनों ही अग्नि, जल, वायु व पृथ्वी तत्व से प्रभावित हैं। टैरो कार्ड्स से प्रश्न का हल जानते समय कुछ कार्ड्स उलटे भी आते हैं अर्थात् प्रश्नकत्र्ता टैरो कार्ड्स की गड्डी में से कुछ कार्ड जब खींचता है तो वे उल्टे हो जाते हैं। कार्ड के बताए अर्थ से उल्टे कार्डों का अर्थ विपरीत होता है। उदाहरणार्थ डंरवत ।तबींदं का श्रनेजपबम कार्ड यदि सीध आए तो इसका अर्थ है जिम्मेदारी एवं संतुलित व्यक्तित्व। इसके विपरीत यदि कार्ड उलटा जाए तो इसका अर्थ है अन्यायपूर्ण एवं प्रतिकूल निर्णय अथवा गलत सलाह। इन उलटे कार्डों की तुलना जन्मपत्रिका के वक्री ग्रहों से की जा सकती है। पृथ्वी की गति की तुलना में जब कोई ग्रह मंद गति से चलते हैं तो वे विपरीत दिशा में चलते हुए प्रतीत होते हैं उस अवस्था को वक्री अवस्था कहते हैं। परंतु वक्री ग्रह मानव जीवन पर सदैव विपरीत प्रभाव नहीं डालते। उदाहरणार्थ जन्मकालिक वक्री बृहस्पति वाले जातक अधिकतर उन कामों में सफलता अर्जित करते हैं जिनमें दूसरे लोग असफल होते हैं। वक्री नेपच्यून के प्रभाव से जातक में गूढ़ विद्याओं में प्रवीणता आती है। इसी प्रकार सभी टैरो कार्ड्स के उलटा पड़ने पर सदैव विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। यह तो प्रश्नकत्र्ता की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरणार्थ थर्ड आॅफ स्वोर्डस कार्ड यदि उलटा निकल आए तो दिल टूटने एवं धोखा खाने की पीड़ा काफी कम हो जाएगी जबकि सीधा कार्ड आहत हृदय का कारक होगा। उलटा कार्ड यदि बाकी सभी शुभ प्रभाव वाले कार्डों से घिरा है तो उस कार्ड का ऋणात्मक प्रभाव काफी कम हो जाएगा। इस प्रकार भारतीय ज्योतिष एवं टैरो पद्धति में कुछ समानताएँ होने पर भी दोनों पद्धतियाँ पूरी तरह से समान नहीं है। टैरो पद्धति पिछले कुछ वर्षों से बहुत अधिक प्रचलन में है। भविष्य के गर्भ में दिए गए अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने की चाह सभी में होती है परंतु मेरे विचार में भारतीय ज्योतिष पद्धति का क्षेत्र बहुत व्यापक है। भारतीय पद्धति ही अधिक सटीक, स्थायी एवं वैज्ञानिक है।



वास्तु विशेषांक  December 2016

ज्योतिषीय पत्रिका फ्यूचर समाचार के इस वास्तु विशेषांक में बहुत अच्छे विवाह से सम्बन्धित लेखों जैसे वास्तुशास्त्र का वैज्ञानिक आधार, वास्तु निर्माण काल पुरुष योग, वास्तु दोष शांति हेतु कुछ सरल उपाय/टोटक,वीथिशूल: शुभाशुभ फल एवं उपाय आदि। इसके अतिरिक् प्रत्येक माह का राशिफल, वास्तु फाॅल्ट, टोटके, विचार गोष्ठी आदि भी पत्रिका का आकर्षण बढ़ा रहे हैं।

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