टैरो एवं एंजल कार्ड रीडिंग एक तुलनात्मक विश्लेषण

टैरो एवं एंजल कार्ड रीडिंग एक तुलनात्मक विश्लेषण  

टैरो एवं एंजल कार्ड रीडिंग- एक तुलनात्मक विश्लेषण रविन्दर सिंह टैरो कार्ड रीडिंग भविष्य जानने की एक प्राचीन विधि है जो मध्यकाल से लेकर वर्तमान समय में काफी प्रचलित है। टैरो कार्ड रीडिंग के प्रचलन का एक मुख्य कारण, टैरो से संबंधित कार्यशालाओं की अधिकता ही है। लोग टैरो कार्ड पर दर्शाये चित्रों से विस्मय-विमुग्ध हो जाते हैं। यद्यपि एंजल कार्ड रीडिंग पिछले कुछ दशकों से ही प्रचलन में आयी है परंतु इसका इतिहास भी कम प्राचीन नहीं है। इस अंक में हम एंजल कार्ड रीडिंग एवं टैरो कार्ड रीडिंग के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। टैरो-इतिहास एवं प्रचलन: टैरो शब्द अंग्रेजी एवं फ्रांसीसी भाषा में पाया जाता है जो इटालवी शब्द टैरोची से उद्धृत है। इस शब्द को उŸारी इटली की टैरो नदी से जोड़कर देखा जाता है। कुछ इतिहासकार टैरो शब्द का स्रोत अरबी भाषा के ‘‘तुर्क’’ शब्द को भी मानते हैं। एक धारणा यह भी है कि टैरो शब्द हारुत और मारुत जिनका जिक्र कुरान-ए-पाक में आता है, से संबंधित है। खेलने वाले कार्ड यूरोप में 14वीं शताब्दी में मिस्र से आये। इस कार्ड पर आजकल के टैरो कार्डों की भांति सूट (श्रेणियां) होते हैं। प्रथम ज्ञात टैरो कार्ड 1340 और 1450 ई. में इटली में निर्मित किये गये थे। इन कार्डों का नाम ‘‘काट या ट्रायोनफी’’ था। शुरुआत में टैरो कार्ड का उपयोग खेल एवं मनोरंजन के लिए किया जाता था परंतु धीरे-धीरे इसका प्रयोग भविष्य कथन के लिए किया जाने लगा। हालांकि टैरो का जन्म इटली में हुआ परंतु इनका प्रचलन इटली के मुकाबले और देशों में अधिक है। टैरो का जन्म भले ही मनोरंजन के लिए अवश्य हुआ हो परंतु इसे जादू-मंत्र एवं रहस्यवाद के साथ जोड़कर भी देखा जाने लगा। वस्तुतः यहीं से टैरो कार्ड से भविष्य के बारे में जानने की विधि का जन्म हुआ। टैरो कार्ड डेक: आजकल प्रचलित अधिकांशत डेक ‘‘टैरो दी मार्सेलस’’ डेक पर आधारित है। इस डेक को निकोलस कोनवर ने 1760 में छापा था। औकल्ट अथवा गुप्त टैरो डेक एक एटीला नामक फ्रांसीसी रहस्यवादी द्वारा बनाया गया था। इसे मेजर अथवा मुख्य आर्काना एवं माइनर अथवा लघु आर्काना में बांटा जाता है। मुख्य आर्काना में 22 और लघु आर्काना में 56 कार्ड होते हैं। मुख्य आर्काना के कार्डों में रंग अथवा सूट नहीं होता। लघु आर्काना में चार सूट होते हैं। लघु आर्काना के हर सूट में 14 कार्ड होते हैं। हालांकि आजकल भिन्न-भिन्न प्रकार के डेक बाजार में उपलब्ध हैं परंतु सबसे प्रचलित डेक रेडर-वेट डेक हैं। अधिकांश टैरो कार्ड डेक में 78 कार्ड होते हैं। परंतु कुछ डेक में 96 कार्ड भी होते हैं। टैरो विधि: कुछ लोगों का यह मानना है कि टैरो कार्ड कोई भविष्य नहीं बताते अपितु वे हमें हमारे अवचेतन मन से जोड़ने में सहायक होते हैं। अवेचतन मन हमारे मन का वह भाग है जो कि हमारे बारे में एवं हमारे आस-पास के वातावरण के बारे में समस्त जानकारी रखता है। टैरो कार्ड रीडिंग द्वारा अवचेतन मन से जानकारी चेतना में लायी जाती है। टैरो कार्ड रीडिंग मुख्यतः दो प्रकार की होती है। प्रश्न संबंधी रीडिंग खुली रीडिंग प्रश्न संबंधी रीडिंग में किसी विशेष प्रश्न का उŸार जानने का प्रयास किया जाता है। यह भूतकाल, वर्तमान अथवा भविष्य के बारे में हो सकता है। खुली रीडिंग में जो भी संदेश कार्ड हमें देना चाहें, वह संदेश रीडिंग द्वारा प्राप्त प्राप्त किये जाते हैं। टैरो कार्ड रीडिंग में भिन्न-भिन्न प्रकार के स्प्रेड अथवा कार्डों को एक समूह में बांटा जाता है। एक समूह में एक अथवा एक से अधिक कार्ड होते हैं। इन्हें अलग-अलग तरीके से बिछाया जाता है। कोई कार्ड क्या दर्शाता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह कार्ड किस क्रम में है और उसके आस-पास कौन से दूसरे कार्ड हैं। यदि कोई कार्ड उल्टा होता है तो उसका अर्थ अलग होगा। यदि वही कार्ड समूह में सीधा होता है तो उसका अर्थ अलग होगा। एक समूह से प्रश्न का उŸार देना इन पेचीदगियों से समझ में लिप्त है। इसीलिए टैरो को संपूर्ण रूप से समझाने में कई वर्ष लग जाते हैं। टैरो रीडर सत्यापन के मार्ग: अधिकांशतः हम पाते हैं कि अमुक व्यक्ति ने 2 या 3 दिन की कार्यशाला में अध्ययन करने के पश्चात टैरो रीडिंग का व्यवसाय शुरू कर दिया। यह आम देखने को अवश्य मिलता है परंतु इससे हमें टैरो कार्ड रीडर की विश्वसनीयता अथवा उनके ज्ञान के स्तर का आभास नहीं होता। इस कारणवश संयुक्त राज्य अमरीका एवं कनाडा में टैरो सर्टिफिकेशन बोर्ड का गठन किया गया है जिसके द्वारा सत्यापित व्यक्ति ही टैरो कार्ड रीडिंग को अपना व्यवसाय बना सकता है। टैरो सर्टिफिकेशन बोर्ड आॅफ अमेरिका द्वारा निम्नलिखित सत्यापन किया जाता है। सर्टिफाइड अपरैंटिस टैरो रीडर सर्टिफाइड टैरो रीडर सर्टिफाइड प्रोफेशनल टैरो रीडर सर्टिफाइड टैरो कंसलटैंट सर्टिफाइड टैरो मास्टर सर्टिफाइड टैरो इंसट्रस्टर कनाडियन टैरो एसोसिशन द्वारा निम्नलिखित सत्यापन किया जाता है। अपरैंटिस टैरो रीडर टैरो रीडर प्रोफेशनल टैरो रीडर टैरो कंसलटैंट टैरो मास्टर टैरो इंस्ट्रक्टर टैरो ग्रैंडमास्टर इन सत्यापन के स्तर से यह पता चलता है कि टैरो का अध्ययन कितना जटिल है और इसमें कितना समय निवेश करने की आवश्यकता है किसी टैरो रीडर से परामर्श लेने से पहले यह जांच लेना जरूरी है कि उन्होंने टैरो रीडिंग का प्रशिक्षण कहां से प्राप्त किया है और उनके पास किस स्तर का सत्यापन है। हालांकि भारत में अमरीका एवं कनाडा के समानांतर टैरो बोर्ड नहीं हैं परंतु यदि किसी टैरो रीडर ने उपरोक्त संस्थानों से सत्यापन प्राप्त किया है तो यह निश्चित करता है कि उनके टैरो रीडिंग की जानकारी एवं प्रशिक्षण किस स्तर का है। एंजल कार्ड रीडिंग-इतिहास एवं प्रचलन: एंजल कार्ड रीडिंग का उद्गम टैरो के समान कार्डों से ही हुआ है। जैसा कि हम पहले देख चुके हैं कि टैरो कार्ड शुरू में केवल मनोरंजन मात्र के लिए ही निर्मित किये गये थे परंतु धीरे-धीरे इनका उपयोग भविष्य जानने के लिए भी किया जाने लगा। टैरो आदि कार्डों पर तस्वीरें भी भिन्न कालों में भिन्न-भिन्न प्रकार की नजर आने लगीं। इनमें देवी देवताओं इत्यादि के चित्र भी समाहित होने लगे। मध्यकाल में माइकल एंजिलों इत्यादि चित्रकारों द्वारा एंजल के चित्र बनाये जाने से इनका खूब प्रचलन हुआ। इन चित्रों में एंजल को पक्षियों की भांति पंखों के साथ दर्शाया जाता था। बाइबल की पुरानी पुस्तकों में एंजल का वर्णन है जो यह दर्शाता है कि एंजल की मध्यकालीन यूरोप में काफी मान्यता थी। लोग अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए एंजल का सहारा लेने लगे। इसका प्रभाव उस युग में छपने वाले खेलने के कार्ड एवं टैरो कार्ड पर भी दिखने लगा। यहीं से एंजल कार्ड के प्रचलन की शुरुआत हुई। आजकल आपको बाजार में भांति-भांति के एंजल कार्ड दिखाई देंगे। इनमें सबसे प्रमुख एंव प्रचलित कार्ड डोरीन वर्चू द्वारा बनावाये गये हैं। डोरीन वर्चू ने एंजल पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं। उनके अतिरिक्त इग्लैंड में बसी डायना कूपर ने भी कई प्रकार के एंजल कार्ड का निर्माण करवाया है। कई कार्ड जिनमें एंजल के अतिरिक्त अन्य दिव्य लोक के देवी-देवताओं इत्यादि एवं पशु पक्षियों एवं पेड़ पौधों के एंजल के चित्र भी होते हैं। यह कार्ड हमें इन जीवनों एवं प्राणियों के साथ जुड़ने में मदद करते हैं। एंजल कार्ड रीडिंग विधि: एंजल कार्ड रीडिंग टैरो कार्ड रीडिंग से इस प्रकार भिन्न है कि एंजल कार्ड रीडिंग में केवल रीडर ही कार्ड को छू सकता है। यह इसलिए है कि आपकी ऊर्जा कार्ड को छूने से उसे प्रभावित करती है। इसलिए अलग-अलग लोगों के छूने पर कार्ड उनकी ऊर्जा से लिप्त हो जाते हैं और इससे रीडिंग प्रभावशाली एवं स्पष्ट नहीं रह पाती। एंजल कार्ड रीडिंग एवं टैरो रीडिंग में एक और असमानता यह भी है कि जहां टैरो कार्ड रीडिंग अधिकांशतः भविष्य जानने के लिए उपयोग में लाई जाती है क्योंकि एंजल कार्ड रीडिंग के द्वारा किसी भी समस्या को दूर करने के लिए स्पष्ट एवं क्रियान्वयन करने योग्य कदमों की जानकारी मिलती है। ऐसा भी पाया गया है कि कुछ लोग टैरो कार्ड पर बने चित्रों को देखकर भयभीत हो जाते हैं। यह केवल मानसिक कारण है और इन चित्रों का यह उद्देश्य कतई नहीं है। एंजल कार्ड रीडिंग में किसी कार्ड के उल्टा अथवा सीधा होने से कोई अंतर नहीं पड़ता परंतु टैरो कार्ड रीडिंग में कार्ड के उल्टा होने पर उसका अर्थ बदल जाता है। एंजल कार्ड के संदेश हमेशा उत्साहवर्द्धक एवं सकारात्मक होते हैं। एंजल कार्ड रीडिंग सत्यापन के मार्ग: एंजल हीलिंग के क्षेत्र में डोरीन वर्चू एवं डायना कूपर का विशेष उल्लेख होता है क्योंकि इस क्षेत्र में उनका योगदान अभूतपूर्व है। दोनों ने ही एंजल हीलिंग पर कई पुस्तकें लिखी हैं। दोंनों ने ही कई प्रकार के एंजल कार्ड बनाये हैं। डोरीन वर्चू अमरीका की निवासी हैं। डायना कूपर इग्लैंड की रहने वाली हैं। दोंनों ही हीलिंग में सत्यापित प्रशिक्षण देती हैं। इनके द्वारा दिये गये प्रशिक्षण को काफी सराहना मिली है। डोरीन वर्चू के पुत्र चाल्र्स वर्चू भी एंजल हीलिंग में प्रशिक्षण देते हैं। वे कई बार भारत भी आ चुके हैं। निष्कर्ष-कौन सी विधि बेहतर: टैरो रीडिंग एंव एंजल कार्ड रीडिंग, दोंनों ही बहुत स्पष्ट एवं सटीक भविष्यवाणी करने एवं अवचेतन मन से चेतन मन तक जानकारी पहुंचाने में सक्षम हैं। कोई भी विधि दूसरी विधि से कम नहीं है। यह रीडिंग करवाने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार की रीडिंग करवाना चाहते हैं। हां, यह बात अवश्य ध्यान रखने योग्य है कि जिससे भी आप रीडिंग करवाएं, यह अवश्य जांच लें कि उन्होंने मान्यता प्राप्त स्रोत से उचित प्रशिक्षण एवं सत्यापन प्राप्त किया हो।



वास्तु विशेषांक  December 2016

ज्योतिषीय पत्रिका फ्यूचर समाचार के इस वास्तु विशेषांक में बहुत अच्छे विवाह से सम्बन्धित लेखों जैसे वास्तुशास्त्र का वैज्ञानिक आधार, वास्तु निर्माण काल पुरुष योग, वास्तु दोष शांति हेतु कुछ सरल उपाय/टोटक,वीथिशूल: शुभाशुभ फल एवं उपाय आदि। इसके अतिरिक् प्रत्येक माह का राशिफल, वास्तु फाॅल्ट, टोटके, विचार गोष्ठी आदि भी पत्रिका का आकर्षण बढ़ा रहे हैं।

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