पीलिया: यकृत कोशिकाओं की विकृति आचार्य अविनाश सिंह महानगरीय जीवन में अन्यान्य कारणों से पीलिया गंभीर शक्ल ले चुका है जो किसी भी आयु वर्ग के स्त्री-पुरुष को समय-असमय ग्रस्त कर लेता है। इस लेख में प्रस्तुत है, इस रोग के कारण, लक्षण तथा सहज निवारण। पित्त पित्ताशय से निकलकर ग्रहणी में न जाकर सीधे रक्त में जाए, तो पित्त समस्त शरीर में फैल जाता है और पित्त में मौजूद बिलीरूबीन नामक रंजक पदार्थ सूक्ष्म रक्त वाहिनियों से निकलकर त्वचा, आंख और विभिन्न अंगों में फैलकर उन्हें पीला रंग देता है, जिससे समस्त शरीर पीला लगने लगता है क्योंकि शरीर का पीलापन इस रोग का मुख्य लक्षण हैं, इसलिए इस रोग का नाम ‘‘पीलिया’’ है। यकृत कोशिकाओं में पित्त का निर्माण होता है, जो पित्ताशय में एकत्रित होता है। पित्त आहार के पाचन में सहायक होता है। जब आहार, आमाशय से गुजरता हुआ ग्रहणी में पहुंचता है तो उसी समय पित्त भी पित्ताशय से निकलकर ग्रहणी में आता है और आहार के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किंतु जब रक्त में बिलीरूबीन की मात्रा बढ़ जाती है तो गुर्दे उसे छानकर रक्त को साफ करने में सहायक नहीं होते और मूत्र का रंग पीला हो जाता है। ऐसे ही समस्त शरीर का रंग पीला होने लगता है। पीलिया रोग के मुख्य कारण: पित्त प्रणाली का विकारग्रस्त होना, यकृत की कोशिकाओं की क्षति या इसमें सूजन आ जाने के कारण जब यकृत बिलीरूबिन को पित्त में मिश्रित नहीं कर पाता है, तो यह बिलीरूबिन पदार्थ सीधे रक्त में मिलता है। परिणामतः शरीर में पीलिया के लक्षण प्रकट होते चले जाते हैं। यकृत कोशिकाओं की विकृति के भी दो कारण है। विषाणु: पीलियाकारक विषाणु दूषित खान-पान के द्वारा आंत्र स्थान में पहुंच जाता है और फिर वहां से रक्त संचरण द्वारा यकृत तक पहुंच जाता है जिससे यकृत कोशिकाएं विकृत हो जाती है और पित्त में बिलीरूबिन पदार्थ को मिश्रित नहीं होने देती और पीलिया हो जाता है। औषधि और विषाक्त पदार्थजन्य पीलिया: जब किसी विशेष रोग के कारण लगातार लंबे समय तक औषधियों का सेवन किया जाता है, तो विपरीत प्रभाव से यकृत की कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिससे विषाक्त और हानिकारक व्यर्थ पदार्थ शरीर में ही एकत्रित होते चले जाते हैं। उन्हीं व्यर्थ पदार्थों में बिलीरूबिन भी एक है जिसके कारण पीलिया होता है। पित्ताशय एवं ग्रहणी के मध्य पित्त प्रणाली में अवरोध होने से पीलिया होता है। आहार में वसा (कोलेस्ट्राॅल) की मात्रा अधिक रहने, अथवा बार-बार भारी भोजन करते रहने से शरीर में वसा का सही पाचन नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप रक्त में उसकी मात्रा बढ़ने लगती है तथा रक्त धमनियों की आंतरिक भित्तियों के ऊपर जमने लगती है, जिससे उनमें अवरोध उत्पन्न होने लगता है। इस अवरोध के कारण पित्त ग्रहणी तक न पहुंचकर सीधे रक्त में मिलने लगता है और पीलिया हो जाता है। रोग के लक्षण: रोगी का सारा शरीर, चेहरा, आंखे, नाखून, होंठ आदि पीले हो जाते हैं तथा मूत्र भी गहरे पीले रंग का आने लगता है। रोगी की पाचन प्रक्रिया पूरी तरह बिगड़ जाती है एवं प्यास बढ़ जाती है। रोगी के मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। भूख मर जाती है। प्रायः कब्ज रहती है। कभी-कभी दस्त भी आने लग जाते हैं। रोगी कमजोरी, आलस्य, थकावट तथा बेचैनी महसूस करता है। पीलिया के उपाय: मूली के पत्तों का रस चीनी या मिश्री मिलाकर प्रातःकाल खाली पेट पिएं। यह पीलिया के लिए महत्वपूर्ण औषधि है। दो सप्ताह तक के सेवन से पीलिया रोग से राहत मिलती है। गन्ने का रस पीलिया रोगी के लिए लाभकारी होता है। बड़ी हरड़ और चीनी दोनो बराबर-बराबर पीसकर रोगी को रोजाना सुबह-शाम पानी के साथ-साथ एक चम्मच दें। कुछ दिनों में पीलिया दूर हो जाएगा। सोंठ, गिलोय और तालमखाने के बीज तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और तीस ग्राम दूध में डाल कर रात को सोने से पहले प्रतिदिन लेने से दो-तीन सप्ताह में पीलिया समाप्त हो जाता है। संतरे का रस, कच्चे नारियल का रस, फटे दूध का पानी, दही की छाछ में नमक और काली मिर्च डालकर पीना लाभकारी है। कच्चे पपीते के रस की बूंदों को बताशे में डालकर दो-तीन सप्ताह खाने से पीलिया दूर होता है। आक के पत्ते और मिश्री दोनों को बराबर मात्रा में पीस ले और छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें। दिन में दो-दो गोली तीन बार पानी के साथ लें, लाभ होगा। मेहंदी की पत्तियां मिट्टी के बर्तन में पानी डालकर चैबीस घंटे तक भिगो कर रखें और प्रातःकाल खाली पेट पीने से पीलिया रोग दूर होता जाता है। पुदीने का रस निकालकर, चीनी मिलाकर सुबह दस दिन तक पीने से पीलिया दूर होता है। लिव-52 की दो-दो गोली दिन में तीन बार लेने से पीलिया में आराम मिलता है। नीम के पत्तों के रस में चीनी मिलाकर पीने से पीलिया में लाभ होता है। शिलाजीत, केसर और चीनी मिलाकर बकरी के दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है। त्रिफला, चीनी और घी मिलाकर पानी या दूध के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है। आंवले का रस या आंवले के मुरब्बे को सेवन पीलिया में लाभकारी होता है।



यंत्र, शंख एवं दुर्लभ सामग्री विशेषांक  जुलाई 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के यंत्र शंख एवं दुर्लभ सामग्री विशेषांक में शंख प्रश्नोत्तरी, यंत्र परिचय, रहस्य, वर्गीकरण, महिमा, शिवशक्ति से संबंध, विश्लेषण तथा यंत्र संबंधी अनिवार्यताओं पर प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त श्रीयंत्र का अंतर्निहित रहस्य, नवग्रह यंत्र व रोग निवारक तेल, दक्षिणावर्ती शंख के लाभ, पिरामिड यंत्र, यंत्र कार्य प्रणाली और प्रभाव, कष्टनिवारक बहुप्रभावी यंत्र, औषधिस्नान से ग्रह पीड़ा निवारण, शंख है नाद ब्रह्म एवं दिव्य मंत्र, बहुत गुण है शंख में, अनिष्टनिवारक दक्षिणावर्ती शंख, दुर्लभ वनस्पति परिचय एवं प्रयोग, शंख विविध लाभ अनेक आदि विषयों पर विस्तृत, ज्ञानवर्द्धक व अत्यंत रोचक जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त क्या नरेंद्र मोदी बनेंगे प्रधानमंत्री, प्रमुख तीर्थ कामाख्या, विभिन्न धर्म एवं ज्योतिषीय उपाय, फलादेश प्रक्रिया की आम त्रुटियां, नवरत्न, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, सम्मोहन, सत्यकथा, आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

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