औषाधि स्नान से ग्रह पीड़ा निवारण

औषाधि स्नान से ग्रह पीड़ा निवारण  

औषधि स्नान से ग्रह पीड़ा निवारण भारतीय ज्योतिष के अनुसार 9 ग्रहों की मान्यता एवं महŸाा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि के अलावा और हैं दो ग्रह राहु और केतु जो अकाश में दिखाई नहीं देते हैं वस्तुतः ये छाया ग्रह हैं। चाहे कोई माने या ना माने, ग्रहों के दुष्प्रभाव बहुत भयंकर होते हैं और जब ग्रह अनुकूल होते हैं, तो आपके शत्रु भी परास्त हो जाते हैं और इन ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए उनके उपाय एवं टोटके करते रहते हैं। यहां मैंने इन ग्रहों से बचने के उपाय बताए हैं। इनका उपयोग करके हम ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम कर सकते हैं। सूर्य पीड़ा के लिए निवारण औषधि स्नान: मैनसिल, इलायची, केसर एवं गुलहठी, लाल रंग के फूल मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से सूर्य पीड़ा के दुष्प्रभाव का निवारण होता है। चंद्र पीड़ा निवारण औषधि स्नान: पंचगव्य, सीप, शंख, खिरनी मूल, सफेद चंदन और सुगंधित फूल मिश्रित जल से स्नान करें। मंगल पीड़ा निवारण औषधि स्नान: लाल चंदन, लाल फूल, बेल वृक्ष की छाल, जटामांसी, मौलश्री, खरेंटी, हींग, गंुदी, मालकांगनी तथा सिंगरफ मिश्रित जल से स्नान करें। बुध पीड़ा निवारण औषधि स्नान: अक्षत, गोरोचन, विधारामूल, राइप, जायफल, पीपरमूल, गाय के गोबर मिश्रित जल से स्नान करने से बुध पीड़ा का निवारण होता है। गुरु पीड़ा निवारण औषधि स्नान: सफेद सरसों, गूलर, दमयंती, मूलद्रवी, चमेली के फूल, राइय तथा नई कोपलों या पŸाों के मिश्रित जल से स्नान करने से निवारण होता है। शुक्र पीड़ा निवारण औषधि स्नान: जायफल, मैनसिल, पीपरामूल, केसर, इलायची तथा मूली के बीज के मिश्रित जल से स्नान करने से शुक्र पीड़ा का निवारण होता है। शनि पीड़ा निवारण औषधि स्नान: सौंफ, लोधा, खस, लोबान, सुरमा, धमनी, काले तिल, गोंद, शतुकुसुम, खरेंटी, खिल्ला मिश्रित जल से स्नान करने से शनि पीड़ा का निवारण होता है। राहू पीड़ा निवारण औषधि स्नान: कस्तूरी, गजदन्त, लोबान एवं मुत्थरा मिश्रित जल से स्नान करने से राहू पीड़ा का निवारण हो जाता है। केतु पीड़ा निवारण औषधि स्नान: लाल चंदन और छाग-मूत्र मिश्रित जल से स्नान करने से केतु पीड़ा का निवारण हो जता है।



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