शंख ध्वनि का गुप्त रहस्य

शंख ध्वनि का गुप्त रहस्य  

शंख ध्वनि का गुप्त रहस्य पं. दिनेश कुमार त्रिपाठी ध्वंिन विज्ञान की सत्ता-महत्ता को विश्व के सभी वैज्ञानिक एक मत से स्वीकार करते हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन के आविष्कार ने ध्वनि की महत्ता को सिद्ध कर दिया है। भारतीय-मीनीषियों ने दृश्य और अदृश्य, प्रत्यक्ष और काल्पनिक सभी पदार्थों का सूक्ष्म विवेचन कर प्रकृति के अनेकानेक रहस्यों और गुप्त-शक्तियों का उद्घाटन किया। शंख भी उन्हीं ऋषि मुनियों की खोज है, जिसमें प्रकृति के कई रहस्य छिपे हुए हैं। शंख ध्वनि के चमत्कार: अनेक मनीषियों ने शंख ध्वनि में सारे ब्रह्मांड को समाहित माना है। उनके कथनानुसार, शंख ध्वनि अखिल विश्व-ब्रह्मांड का संक्षिप्त रूप है। कुछ ऐसा ही भाव ‘शंखनाद- ब्रह्म’ शब्द से भी प्रकट होता है। जिस प्रकार किसी पदार्थ से, रासायनिक-प्रक्रिया द्वारा उसमें निहित तत्वों को पृथक करके उनका विश्लेषण किया जाता है, उसी प्रकार विशेषज्ञों ने ध्वनि में अंतर्निहित शक्तियों की खोज करके, उनके प्रयोग द्वारा विभिन्न प्रभावों का विश्लेषण किया था। अपने परीक्षणों से आश्वस्त होकर उन्होंने उन प्रयोगों को ‘सिद्धांत’ की संज्ञा दी। आगे चलकर दूसरे विद्वानों ने उन सिद्धांतों को विकसित किया। आज का विकसित विज्ञान भी शंख ध्वनि की क्षमता को स्वीकार करता है। इसके नियमित-प्रयोग के प्रभाववश सूक्ष्मतम हानिकर बैक्टीरियाओं का नाश हो जाता है। वैज्ञानिकों ने ध्वनि-प्रभाव के अस्तित्व और उसकी सार्थकता पर गहन शोध किया है। शंख ध्वनि के विश्लेषण में एक विद्वान ने लिखा है: जब शंखनाद होता है, तब उससे वायु में एक विशेष किस्म की तरंगें उत्पन्न होती हंै। ये तरंगें वायुमंडल में व्याप्त ईथर-तत्व के माध्यम से कुछ ही क्षणों में ब्रह्मांड की परिक्रमा कर डालती हैं। इस परिक्रमा के दौरान जहां उन्हें अनुकूल तरंगें प्राप्त होती हंै, वे उनसे मिल जाती हंै और उसके प्रभाव से साधक की अभिलाषा पूरी हो जाती है। किंतु यह सब इतनी शीघ्रता से होता है कि इसके सीधे प्रभाव का ज्ञान हमें तत्काल नहीं हो पाता। शंख ध्वनि के प्रभाव का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है। संगीत के ही एक पूरक अंग (वाद्य-शंख ध्वनि) के माध्यम से आज भी अनेक क्षेत्रों में चमत्कारपूर्ण कार्य सम्पादित हो रहे हैं। तज्जौर के एक विद्यालय में वनस्पति-शास्त्रियों ने शंख ध्वनि के माध्यम से वानस्पतिक उत्पादन (पैदावार) में वृद्धि के सफल प्रयोग कर दिखाए हैं। शंख ध्वनि के द्वारा पशु-पक्षियों को सम्मोहित करने के कितने ही प्रसंग इतिहास में मिलते हैं। सम्राट विक्रमादित्य, उदयन बाबा हरिदास, संन्यासी सच्चिदानंद, अजय कृष्णानंद, लाल बाबा तांत्रिक और तानसेन ध्वनि क्षेत्र में देवताओं की भांति पूज्य हंै, क्योंकि उन्होंने शंख ध्वनि की शक्ति के प्रयोग में सिद्धि प्राप्त की थी। जंगली जानवर भी शंख ध्वनि से प्रभावित होते हैं। मृग का ‘वाणी-प्रेम’ विख्यात है। समुद्री जीवों में डाॅल्फिन और सील जाति की मछलियां शंख ध्वनि से मुग्ध होकर अपनी रक्षा करना भी भूल जाती हैं तथा समुद्र से बाहर आ जाती हैं। कि सांप, चूहे तथा अन्य जीव-जंतु भी शंख ध्वनि से प्रभावित, स्तब्ध, प्रमित, भयभीत अथवा वशीभूत हो जाते हैं। पशु-मनोविज्ञान के प्रकांड पंडित जाॅर्ज केरविन्सन का कथन है कि शंख की ध्वनि से मुग्ध होकर चूहे दिन में भी निर्भय होकर पास आ जाते हैं। कुत्ते, उल्लू और गरुड़ भी इस ध्वनि से प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार नार्वे के विद्वान डाॅ. हन्सन का कहना है कि शंख ध्वनि का आनंद लेने में मधुमक्खी का स्थान सर्वोच्च है। जड़ पदार्थों को भी शंख ध्वनि से प्रभावित होते देखा गया है। आॅस्ट्रेलिया के मेलबर्न नगर में एक बार बिना पेट्रोल, बिजली या डीजल की कार को शंख ध्वनि से चलाने की खबर आई थी। यह चमत्कार अमेरिका के ग्राहम और नील नाम के दो वैज्ञानिकों ने किया था। प्रथम विश्व युद्ध (1914-1919) के समय जर्मन सेना ने युद्ध के दौरान शंखनाद किया था। यह शंख पांचजन्य था। कहते हैं कि इससे एक ऐसी विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न की जाती थी, जिसकी शक्ति मृत्यु-कारण जैसी घातक थी। उस शंख से एक ऐसी और उसे इस तरह से वायुमंडल में प्रसारित किया जाता था कि उसके प्रभाव से शत्रु सैनिक निश्चेष्ट और अंततः निष्प्राण हो जाते थे। चिकित्सा में भी शंख ध्वनि का उपयोग किया जाता है। घाव, नेत्र विकार, स्नायुदोष, दमा, सन्निपात, हृदयरोग, मधुमेह, मस्तिष्क रोग आदि की चिकित्सा में शंख ध्वनि का प्रयोग किया जाता है। यहां तक कि ध्वनि का संबल लेकर आॅपरेशन जैसे जटिल कार्य भी सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। चिकित्सा जगत का नवीनतम आविष्कार अल्ट्रासाउंड ध्वनि विज्ञान पर ही आधारित है। इतना ही नहीं, अब तो वातानुकूलन में भी ध्वनि की उपादेयता सिद्ध हो चुकी है। शंख ध्वनि के कुछ अन्य चमत्कारिक प्रसंग: पिट्सवर्ग (अमेरिका) के एक चिकित्सक ने शंख ध्वनि चिकित्सा प्रणाली को विकसित करने के लिए एक संस्था का सृजन किया है जहां अधिकतर रोगों का उपचार शंख ध्वनि से किया जाता है। इस संस्था का नाम रिकार्डिंग शंख फाॅर रिलैक्जेशन, रिस्पांस एंड डिस्कवरी है जिसे संक्षेप में आर फाॅर आर कहा जाता है। भारत में भी शंख और शंख ध्वनि के माध्यम से रोगों की चिकित्सा की जाती है। प्राचीन-काल के संदर्भों को भले ही कपोल-कल्पित कह लें, पर मध्ययुगीन इतिहास को नकार नकार नहीं सकते। कई उदाहरण इस बात के गवाह हैं। इस संदर्भ में मियामी विश्वविद्यालय (अमेरिका) के डाॅ. रिचर्ड्स का उल्लेख आवश्य है। उनकी उपलब्धि भी चकित करने वाली थी। वह शंखध्वनि से मुग्ध करके समुद्र से मछलियां पकड़ा करते थे। शिकारी लोग पाल का सहारा लेते थे, परंतु डाॅ. रिचर्ड्स शंखनाद का आश्रय लेकर यह असंभव जैसा कार्य संभव कर देते थे। फ्रांस भी, जो अपने वैभव-विलास के लिए यूरोप में चिरकाल से प्रसिद्ध है, इस क्षेत्र में पीछे नहीं रहा। वहां पेरिस की एक महिला मैडम किनलांग शंख ध्वनि के प्रति पूर्णतया समर्पित थी। वह शंख ध्वनि के सहारे विभिन्न प्रकार की आकृतियां बना कर पर्यटकों के मन को मोह लेती। ध्वनि प्रभाव के चमत्कार का यह अद्भुत उदाहरण है। लेकिन आगे चलकर इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अमेरिकी अंतरिक्ष शोध संस्थान नासा की रिपोर्ट के अनुसार शंखध्वनि से खगोलीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। यह ऊर्जा आसपास के हानिकारक जीवाणुओं का नाश और लोगों में शक्ति तथा स्फूर्ति का संचार करती है। स्थूल की अपेक्षा सूक्ष्म की शक्ति को आज का भौतिक-विज्ञान और वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं। बारूद और उसकी गैस की प्रभाव-भिन्नता सर्वविदित है। यही सिद्धांत ध्वनि और मंत्र के संदर्भ में भी लागू है। भारतीय मनीषियों ने ध्वनि के महत्व को समझा और उसे मंत्र के रूप में उपादेय घोषित किया था। मंत्र विद्या के विकास का यही वैज्ञानिक आधार रहा है कि ध्वनि (शब्द) की शक्ति अन्य भौतिक पदार्थों की शक्ति से कहीं अधिक सूक्ष्म और विभेदक होती है। आज के अणु सिद्धांत की उत्पत्ति में इस ध्वनि सिद्धांत का भी योगदान है। ध्वनि तरंगों के माध्यम से किसी भी व्यक्ति अथवा वस्तु को, वह कहीं भी हो, प्रभावित किया जा सकता है। तात्पर्य यह कि शंख ध्वनि का अपने आप में एक विशेष महत्व है। ध्वनि का नाश नहीं होता। दूर संचार तथा रेडियो इसके प्रमाण हैं जो हजारों मील दूर बोले गए शब्दों को लोगों तक पहुंचाते हैं। शंख नाद से भौतिक, आध्यात्मिक तथा मानसिक सुखों की अनुभूति हो है। इस तरह शंख नाद का आध्यात्मिक महत्व तो है ही, वैज्ञानिक महत्व भी है और यह बात आज के वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हो चुकी है।



शंख विशेषांक  आगस्त 2009

ज्योतिष में शंख का क्या महत्व है, विभिन्न शंखों की उपयोगिता, शंख कहां-कहां पाए जाते है, शंख कितने प्रकार के होते है तथा घर में या पूजास्थल पर कौन सा शंख रखा जाना चाहिए और क्यों? यह विशेषांक शंखों से आपका पूर्ण परिचय कराने में मदद करेगा.

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.