पारद सामग्री

पारद सामग्री  

पारद सामग्री पं. रमेश शास्त्री पारं ददादि पारदः निदर्शनम् पारदोऽत्ररसः। जिस धातु का उपयोग करने से प्रयोक्ता का कल्याण हो जाए, ऐसे पारद धातु को सर्वोत्तम माना गया है। आयुर्वेद में पारद को महारस एवं रसराज संबोधित किया गया है। इस धातु को रस स्वेदन, रस संस्कार तथा रस शोधन आदि क्रियाओं से शोधित कर के, उससे दुर्लभ ज्योतिषीय सामग्री का निर्माण किया जाता है। परिचय एवं संरचना: पारद वस्तुओं की साधना से सफलता षीघ्र प्राप्त होती है। वर्तमान भौतिक युग में विविध क्षेत्रों में साधनारत जातक चमत्कारी सफलताएं पाते देखे गये हैं। जीवन तो ऐसा विलक्षण क्षेत्र है, जो जड़ जगत के किसी मूल्यवान घटक से अधिक बहुमूल्य है। शिव पुराण में पारा को शिव का पौरुष कहा गया है। इसके दर्शन मात्र से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि शास्त्रों में इसे अत्यंत महत्व दिया गया है। पारद सामग्री घर, व्यवसाय, वाहन आदि में रखने से उसकी दैवीय शक्ति जातक को लाभ प्रदान करती है। घर में पारद सामग्री रखना ज्यादा उचित होता है। पारद सामग्री का तापमान हमेशा ही न्यूनतम होता है, जिसे छूते ही उसकी गुणवत्ता का आभास हो जाता है। पारद धातु में वे अनुपम एवं असीमित गुण पाये जाते हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हंै। पारद से निर्मित वस्तुओं को सूक्ष्मदर्शी से देखने पर उनपर छोटे-छोटे धब्बे दिखते हैं। वजन में यह लोहे से सोलह गुना अधिक भार का होता है। पारद सामग्री को बर्फ के बीच में रखने से वह अपने भार के अनुपात में बर्फ को शोषित कर लेता है। पारद सामग्री के निर्माण में अत्यंत कठिनाइयां आती हैं। अनेक औषधियों के संयोग, मिश्रण, घर्षण एवं विमलीकरण से इसे ठोस बनाया जाता है। ठोस होने पर इसे अलौकिक, दुर्लभ, मूल्यवान एवं शुद्ध माना जाता है। उपयोग एवं लाभ: जैसे एक ही रोग की हजारांे दवाइयां होती हैं, उसी प्रकार पारद सामग्री का उपयोग भी अनेक प्रकार से किया जा सकता है, जैसे सामग्री के सम्मुख स्तोत्र, मंत्र, कवच, पूजन, जप, अभिषेक, सामान्य रूप से नमन्, स्पर्श एवं दर्शन आदि जातक को लाभ प्रदान करते हंै। यह धातु शिव की है, अतः शिव के किसी भी मंत्र द्वारा इसकी पूजा की जा सकती है। पारद श्री यंत्र एवं पारद लक्ष्मी की स्थापना करने पर लक्ष्मी संबंधी सभी दोषों का शमन होता है तथा धनादि की वृद्धि होती है। अनेक विघ्न-बाधाओं को शमन करने तथा मंगलमय जीवन के लिए पारद गणेश की स्थापना करनी चाहिए। साढ़े साती, ढैय्या, अथवा शनि के गोचर को अनुकूल एवं लाभकारी बनाने का सरल एवं सटीक उपाय पारद शिव लिंग को माना गया है। समस्त शिव भक्तों के लिए यह इष्ट देव का कार्य करता है तथा जातक को पुष्टि प्रदान करता है। वह बुखार, जो बार-बार किसी जातक को प्रताड़ित करता हो, उसकी शांति के लिए जातक को पारद सामग्री के दर्शन, स्पर्श एवं पूजन लाभ प्रदान करते हंै। मानसिक वेदना को खत्म करने के लिए पारद शिव लिंग को, पंचामृत से स्नान करा कर, उसके चरणामृत का पान करने से लाभ होता है। कुंडली के चतुर्थ भाव एवं चंद्र दोष को शमन करने के लिए पारद शिव लिंग की उपासना एवं अभिषेक अति लाभकारी होते हंै। पारद का उपयोग जातक के ज्ञान मार्ग एवं भक्ति मार्ग दोनों को प्रशस्त करता है तथा अनैतिक कृत्यों के दुष्प्रभाव को कम करता है। यह दूषित पर्यावरण एवं विपरीत परिस्थितियों में रहने वाले जातक के वातावरण में होने वाले प्रकोप को आकाशीय ऊर्जा के माध्यम से रोकता है। शर्प दोष, काल सर्प दोष आदि का दोष होने पर पारद सामग्री की स्थापना एवं पूजा सर्वोत्तम उपाय है। पारद से निर्मित सामग्री जातक की ईष्र्या, निंदा, मोह, अहंकार, हिंसा विक्षिप्तता आदि अनेक आंतरिक दोषों को कम करती है। मानसिक पीड़ा में यदि कोई जातक पारद पिरामिड को अपने सिर पर कुछ समय प्रत्येक सुबह रखे, तो उसे शीघ्र ही चमत्कारिक लाभ होता है। बुखार, पेट दर्द, जोड़ों के दर्द में पारद पिरामिड को दर्द के स्थान पर कुछ समय तक रखने से शीघ्र ही दर्द से छुटकारा मिलता है तथा नाभि पर रखने से बुखार खत्म हो जाता है। मंत्र: बुध दोष, दरिद्रता, बौद्धिक तनाव, मानसिक रोग आदि के शमन् के लिए पारद लक्ष्मी के सम्मुख निम्न मंत्र का जप करने से अनोखा लाभ होता है: महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् काल सर्प दोष, साढ़े साती शनि के खराब गोचर, धन हानि, भाग्य वृद्धि आदि के लिए पारद शिव लिंग के सम्मुख यथाशक्ति महामृत्यंजय मंत्र का जप करने से शीघ्र ही लाभ होता है। अनेक प्रकार के दोषों को शमन करने, भौतिक सुख पाने, पूर्व जन्म के दोषों का शमन करने के लिए पारद गणेश के सम्मुख निम्न मंत्र का जप करना लाभकारी है: एक दंताय विद्महे वक्र तुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।। लक्ष्मी दोष, दरिद्रता, धन लाभ, धन रक्षा, धन संचय आदि कार्यों में लाभ पाने के लिए पारद श्री यंत्र के सम्मुख निम्न मंत्र का पाठ, अथवा जप करना लाभकारी है: ¬ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।। पारद पिरामिड को बिना किसी मंत्र जप, अथवा उपासना के उपयोग किया जा सकता है। यह पिरामिड जीवन पर्यंत लाभ प्रदान करता रहता है।



शंख विशेषांक  आगस्त 2009

ज्योतिष में शंख का क्या महत्व है, विभिन्न शंखों की उपयोगिता, शंख कहां-कहां पाए जाते है, शंख कितने प्रकार के होते है तथा घर में या पूजास्थल पर कौन सा शंख रखा जाना चाहिए और क्यों? यह विशेषांक शंखों से आपका पूर्ण परिचय कराने में मदद करेगा.

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