क्या है रेकी

क्या है रेकी  

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की हस्तरेखाओं का अध्ययन भारती आनंद मती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव इसलिए प्राप्त हुआ कि जीवन के उत्तरार्ध में उनकी भाग्यरेखा में राजयोग है। यही कारण रहा कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की रस्साकशी के बीच श्रीमती पाटिल के नाम का पहली ही बार श्रीमती सोनिया गांधी ने प्रस्ताव किया और शीघ्र ही इस प्रस्ताव को समर्थन भी मिल गया। वर्तमान समय के बाद उनकी भाग्य रेखाएं और प्रबल होंगी। राष्ट्रपति के रूप में तो वह भारत में ही शीर्षस्थ हैं लेकिन उनके हस्तरेखाओं का अध्ययन यह संकेत दे रहा है कि भविष्य में वह विश्व शांति, आतंकवाद उन्मूलन और विशेष रूप से विश्व महिला सशक्तीकरण के लिए संपूर्ण दुनिया में एक आदर्श राष्ट्रपति के रूप में स्थापित होंगी। किसी को मालूम नहीं होगा, यहां तक कि स्वयं श्रीमती पाटिल भी यह नहीं जानती होंगी कि उम्र की चैथी अवस्था में उन्हें देश का गौरव बनने का सुअवसर मिलेगा, लेकिन उनकी हस्तरेखाएं स्पष्ट करती हैं कि उनमें प्रबल राजयोग है। इस राजयोग का ही प्रतिफल रहा कि श्रीमती पाटिल ने राष्ट्रपति चयनित होने से लेकर अब तक जो भी कामयाबियां प्राप्त की हैं उनके आयाम अभूतपूर्व व अप्रत्याशित रहे हैं। आइए, जानें कि उनके हाथ की रेखाओं में कौन सा प्रबल योग है जिसने उन्हें यह सर्वाेच्च सम्मान प्राप्त कराया। हम हस्तरेखा शास्त्र के माध्यम से प्राप्त अनुभव के आधार पर 10 बिंदुओं को रख रहे हैं जो श्रीमती पाटिल के शिखर पर पहुंचने की प्रबल संभावनाएं बना रहे हैं। श्रीमती पाटिल की उंगलियां छोटी, पतली व सीधी हैं। उनका हाथ भारी है तथा उसमें सभी ग्रह उच्चस्थ हैं। ऐसा हाथ कम ही पाया जाता है। उच्च कोटि के व्यक्तित्व को दर्शाने वाली इन हस्तरेखाओं ने श्रीमती पाटिल के सर्वोच्च पद पर पहुंचने में अहम भूमिका निभाई। बाधाएं आती तो जरूर थीं लेकिन हस्तरेखाओं में भाग्य इतना प्रबल है कि सारे मसले स्वयं हल होते गए और वह सर्वोच्च पद पर आसीन हो गईं। राष्ट्रपति महोदया की जीवन रेखा गोल है, मस्तिष्क रेखा द्विभाजित है तथा हृदयरेखा शनि व गुरु के बीच में समाप्त हो रही है। वहीं इनके ग्रह उन्नत हैं। फलतः जब दो विरोधी दावों के बीच इनके नाम का प्रस्ताव किया गया तो दोनों दलों का अनुमोदन मिल गया। श्रीमती पाटिल का अंगूठा पतला व लचकदार है। यह स्थिति किसी व्यक्ति के जीवन के उत्तरार्द्ध में अद्वितीय प्रगति व ख्याति प्राप्त करने की द्योतक है। यही कारण था कि उन्हें देश का सर्वोच्च पद प्राप्त हुआ। उनके हाथ भारी, मुलायम व गुलाबी हैं। भाग्य से संबंधित समस्त हस्तरेखाएं स्पष्ट हैं। यह स्थिति प्रबल राजयोग को दर्शाती है। सूर्य रेखा साफ सुथरी व उन्नत है। साथ ही सभी ग्रह भी शीर्षस्थ हैं। उक्त रेखा तथा ग्रहों की यह स्थिति भी उनके इस पद पर पहुंचने का कारण रही। इनकी उंगलियों के सभी आधार बराबर हैं और उनमें एकरूपता है। यह एक प्रबल राजयोग का लक्षण है और व्यक्ति के सर्वोच्च पद पर पहुंचने का संकेत देता है। श्रीमती पाटिल की हृदय व मस्तिष्क रेखाओं में रिक्त स्थान है। मस्तिष्क रेखा चंद्रमा पर जाती है। हाथ भारी, रेखाएं कम व सुस्पष्ट हैं। यह सारी स्थिति इनके प्रगति के पथ पर निरंतर बढ़ते जाने का संकेत देती है। हस्तरेखाओं के आधार का बराबर होना यह परिलक्षित करता है कि उनके जीवन के सारे पहलू स्वर्णिम व सुसज्जित रहेंगे और वह राष्ट्रहित से पूरित होकर पद की गरिमा व मर्यादा बनाए रखेंगी। हाथ मुलायम व गुलाबी होना यह भी प्रदर्शित करता है कि ऐसे व्यक्तित्व में भाग्योदय की संभावनाएं सदा प्रबल होती हंै। यही कारण रहा कि श्रीमती पाटिल अपने सेवा काल के आरंभ से अब तक कामयाबी की बुलंदियां प्राप्त करती रहीं। गुरु की उंगली का सूर्य की उंगली से बड़ी होना इस बात का द्योतक है कि इस प्रकृति के व्यक्ति का व्यक्तित्व महान व एकाकी होता है और वह परिवार तथा समाज के प्रति समर्पित रहता है ऐसे लोगों में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भी भावना कूट-कूट कर भरी रहती है। ऐसे व्यक्तित्व के लोग चुनौतियों का सामना बड़े साहस व शालीनता के साथ करते हैं और लक्ष्य भी प्राप्त कर लेते हैं। तात्पर्य यह कि रेखाओं, ग्रहों व उंगलियों की इस उत्कृष्ट स्थिति के कारण श्रीमति पाटिल इस सर्वोच्च पद पर पहुंची हैं।



बगलामुखी विशेषांक   मार्च 2008

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