बगलामुखी एवं दस महाविद्याएं

बगलामुखी एवं दस महाविद्याएं  

बगलामुखी के ऐतिहासिक मंदिर डाॅ. भारत भूषण भारद्वाज भारत में मां बगलामुखी के तीन प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर क्रमशः दतिया (मध्य प्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) तथा नल खेड़ा, जिला शाहजहांपुर (मध्य प्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग इतिहास है। दतिया का मंदिर पीतांबरापीठ के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर महाभारत कालीन है। मान्यता है कि आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा चिरंजीवी होने के कारण आज भी इस मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं। इस मंदिर के परिसर में भगवान आशुतोष भी वनखंडेश्वर लिंग के रूप में विराजमान हंै। जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में मां बगलामुखी का मंदिर ज्वालामुखी से 22 किलोमीटर दूर वनखंडी नामक स्थान पर स्थित है। मंदिर का नाम है श्री 1008 बगलामुखी वनखंडी मंदिर। यह भी महाभारत कालीन है। मध्य प्रदेश में त्रिशक्ति माता बगलामुखी का एक मंदिर तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। इसमें माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी तथा माता सरस्वती भी विराजमान हैं। इसकी स्थापना महाभारत में विजय पाने के लिए श्री कृष्ण जी के निर्देश पर महाराज श्री युधिष्ठर जी ने की थी। इस मंदिर में बेलपत्र, चंपा, सफेद आंकड़ा, आंवला, नीम एवं पीपल के वृक्ष एक साथ स्थित हैं।



वास्तु विशेषांक  December 2017

फ्यूचर समाचार के वास्तु विशेषांक में इस बार वास्तु की बारीकियों का अच्छा विश्लेषण किया गया है इस अंक के मुख्य लेखों में वास्तु एवं व्यापर, वास्तु शास्त्र में ग्रहों की भूमिका का महत्व, वास्तु के अनुसार सीढ़ियां वास्तु दोष कारण एवं निवारण, भारत के प्रसिद्ध वास्तु सम्मत और वास्तु दोषयुक्त मंदिर, एक थी आरुषि भाग-४ सम्मिलित हैं

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