नींद के साथ ही रत्न से डिप्रेशन व् टेंशन ध्यान और नियंत्रण

नींद के साथ ही रत्न से डिप्रेशन व् टेंशन ध्यान और नियंत्रण  

नींद के साथ ही रत्न से डिप्रेशन व टेंशन ध्यान और नियंत्रण डी. के. पोडवाल स्वस्थ व्यक्ति को छः से आठ घंटे सोना जरूरी है। इससे कम या ज्यादा कोई सोता है तो वह किसी बीमारी का लक्षण है व ऐसे व्यक्ति अवसाद, नशे और निराशा जैसे मनोविकारों से घिरे होते हैं। अवसाद से घिरे लोगों की नींद ज्यादा अनियमित देखी गयी है। नींद के साथ ध्यान जोड़ दिया जाय तो इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। बिना ध्यान के नींद वजन बढ़ाने, हाई-ब्लडप्रेशर और मधुमेह का कारण बन जाती है। इस प्रक्रिया की मींसासा अभी नहीं की जा सकती लेकिन अवसाद का सामाजिक व आर्थिक स्थिति के अंतर और उदासी से गहरा संबंध है। नींद न आने में, उŸोजना भी एक बड़ा कारण है। ध्यान उŸोजना को नियंत्रित करता है। भारतीय पद्धति जिसमें सुबह उठने के बाद और शाम को सोने से पहले भजन-कीर्तन या हल्के-फुल्के ढंग से किसी सर्वोच्च सŸाा को याद किया जाता है, जो उŸोजना को नियंत्रित करता है। ज्योतिष के अनुसार लग्न, चंद्रमा व सूर्य आपकी सोच को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। लग्न के कारक ग्रह व सूर्य चंद्रमा को शुभ करके भी अवसाद को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है व शुभ फल प्राप्त किये जा सकते हैं। इसके लिए रत्न पहनने या रत्न मुठ्ठी में रखकर ध्यान करने व दान करने से अच्छे परिणाम अवसाद के नियंत्रण के संबंध में देखे गये हैं। विभिन्न ग्रहों के लिए विभिन्न रत्न जैसे चंद्रमा के लिए चंद्रमणि, सूर्य के लिए रूबी का प्रावधान है। इन सब के अलावा देखें तो सोने से पहले सबके प्रति शुभ कामना और अपने दुखों और चिंताओं को अपने से बड़ी किसी शक्ति के हवाले कर देने की मानसिक प्रक्रिया उŸोजना और थकान को कम कर देती है। ध्यान, नींद और मन को नियंत्रित करने वाले ग्रहों के रत्न-संबंधों का विवेचन करते हुए लोग यह भी हिसाब लगा रहे हैं कि सात घंटे की जरूरी नींद में अगर दो-तीन घंटे भी कम हो गये हों तो व्यक्ति की कार्य क्षमता में इजाफा होगा, उससे वह अपनी और जिस क्षेत्र में वह कार्य कर रहा है, उसकी ज्यादा प्रगति हो सकेगी।



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