लाजवाब है शुक्र रत्न हीरा

लाजवाब है शुक्र रत्न हीरा  

लाजबाब है शुक्र रत्न हीरा पं. श्रीकृष्ण शमा अग्नि पुराण की कथा के अनुसार वृत्रासुर ने देव लोक पर आक्रमण किया तब भगवान विष्णु की सलाह पर देवराज इंद्र ने महर्षि दधीचि से दान में प्राप्त उनकी हड्डियों से वज्र नामक अस्त्र का निर्माण किया। वस्तुतः दधीचि की हड्डियों के पृथ्वी पर गिरने वाले सूक्ष्मखंड ही हीरे की खाने बनकर प्रकट हुए। वस्तुतः चैरासी रत्न/उपरत्नों में सबसे मूल्यवान माणिक और हीरा ही है। जहां तक हीरे की उत्पत्ति का प्रश्न है, इसका जन्म शुद्ध कोयले से होता है। वैज्ञानिक परीक्षण से ज्ञात होता है कि कोयले (कार्बन) का प्रमुख तत्व कार्बनडाई आॅक्साइड जब घनीभूत होकर जम जाता है, तो वह पारदर्शी क्रिस्टल का रूप ले लेता है। यही पारदर्शी कार्बन हीरा कहलाता है। हीरा एक मूल्यवान रत्न है। हीरे में सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह रत्नों में सर्वाधिक कठोर एवं अभंजनशील है। इन्हें विशेष तरीके से तराश कर छोटे-छोटे हीरे तैयार किये जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हीरा टूट गया है। धूप में हीरा रख दिया जाए तो उसमें से इंद्रधनुष के समान किरणें निकलती दिखाई देंगी। इसी प्रकार गर्म दूध में यदि हीरा डाल दिया जाए तो दूध अपेक्षाकृत कम समय में ठंडा हो जाता है। हीरे में अनेक दोष भी पाये जाते हैं। जिन्हें केवल अनुभवी जौहरी ही बता सकता है। मामूली दोष की वजह से किसी भी हीरे का मूल्य आसमान से जमीन पर आ जाता है। निर्दोष हीरा अत्यंत प्रभावशाली तथा दोषयुक्त अत्यंत घातक सिद्ध होता है। हीरे का प्रभाव: हजारों वर्षों से भारत के सुप्रसिद्ध वैद्य मूल्यवान रत्नों की शास्त्र सम्मत विधि से पिष्टी अथवा भस्म बनाकर अनेक बीमारियों के उपचार करते आ रहे हैं। रत्नों में रोगों को दूर करने की अद्भुत शक्ति होती है। हीरे की भस्म से क्षय रोग, भगंदर, वीर्य दोष, मधुमेह, सुजाक आदि समाप्त हो जाते हैं। वात-व्याधि के लिए हीरा रामबाण औषधि है। ‘‘रस रत्न समुच्चय’ के अनुसार यदि रोगी अंतिम सांस ले रहा हो और ऐसी अवस्था में हीरे की भस्म की एक खुराक रोगी को दे दी जाए, तो रोगी को शीघ्रता से होश आ जाता है और प्राणों की रक्षा हो जाती है। नपुंसकता को यह जड़ से समाप्त कर देता है। भूत-प्रेत की बाधा व विष की आशंका को यह दूर भगा देता है। लेकिन शुक्राचार्य के कथनानुसार पुत्र की कामना करने वाली स्त्रियों को हीरा धारण नहीं करना चाहिए। यह पुत्र संतान-प्राप्ति में बाधक हो सकता है। कुछ हीरों का आकर्षण सदा-सर्वदा से रहा है। उनको प्राप्त करने के पीछे का विविध मनोरंजक इतिहास और कथायें रही हैं। विश्व प्रसिद्ध हीरों की अपनी एक अलग ही दास्तां हैं।



रत्न विशेषांक  मई 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के रत्न विशेषांक में रत्न चयन व धारण विधि, रत्न: सकारात्मक ऊर्जा स्रोत, नवरत्न, उपरत्न, रत्नों की विविधता, वैज्ञानिक विश्लेषण एवं चिकित्सीय उपादेयता, लग्नानुसार रत्न चयन, ज्योतिषीय योगों से तय करें रत्न चयन, रत्नों की कार्य शौली का उपयोग, बुध रत्न पन्ना, चिकित्सा में रत्नों का योगदान, कई व्याधियों की औषधि है करंज तथा अन्य अनेकानेक ज्ञानवर्द्धक आलेख शामिल किये गए हैं जैसे भविष्यकथन की पद्धतियां, फलित विचार, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, सम्मोहन, सत्यकथा, स्वास्थ्य, पावन स्थल, क्या आप जानते हैं? आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

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